आईओएस सागर कोलंबो पहुंचा: 16 देशों के नौसैनिकों के साथ भारत का बहुराष्ट्रीय समुद्री मिशन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईओएस सागर 16 मई 2025 को कोलंबो बंदरगाह पर पहुंचा, जिसमें 16 देशों के नौसैनिक कर्मी सवार हैं। यह जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत 'आईओएस सागर 2026' अभियान पर निकला है, जो भारत की बहुराष्ट्रीय समुद्री साझेदारी का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन है। श्रीलंका नौसेना के एक युद्धपोत ने श्रीलंकाई जलक्षेत्र में प्रवेश के समय आईओएस सागर को एस्कॉर्ट करते हुए बंदरगाह तक पहुंचाया।
तीन दिवसीय पोर्ट कॉल का उद्देश्य
भारतीय नौसेना के अनुसार, 15 से 18 मई तक चलने वाले इस तीन दिवसीय पोर्ट कॉल का प्रमुख उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करना तथा क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करना है। यह यात्रा हिंद महासागर में शांति, स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
उच्चस्तरीय बैठकें और आधिकारिक कार्यक्रम
आईओएस सागर के कमांडिंग ऑफिसर कोलंबो प्रवास के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, जिनमें वेस्टर्न नेवल एरिया के कमांडर और फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग नेवल फ्लीट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त वे कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायुक्त से भी भेंट करेंगे। श्रीलंका नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ भारतीय जहाज का दौरा कर बहुराष्ट्रीय दल के नौसैनिकों से संवाद करेंगे।
सांस्कृतिक और खेल गतिविधियाँ
आईओएस सागर का बहुराष्ट्रीय दल एक विशेष संवाद में हिस्सा लेगा, जिसमें 'आईओएस सागर 2026' अभियान के उद्देश्यों की जानकारी साझा की जाएगी। भारत और श्रीलंका नौसेना के कर्मियों के बीच वॉलीबॉल और बास्केटबॉल के मैत्रीपूर्ण मुकाबले भी आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना है। इस दौरान जहाज को स्थानीय आगंतुकों के लिए भी खोला जाएगा — जिसमें श्रीलंका नौसेना के कर्मी, स्कूली बच्चे और कोलंबो में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग शामिल होंगे।
आधिकारिक कार्यक्रमों के अलावा दल कोलंबो पोर्ट, गॉल, कैंडी और पिन्नावाला जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भी दौरा करेगा, जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और संपर्क और गहरा होगा।
प्रस्थान पर पासेक्स अभ्यास
आईओएस सागर 18 मई 2025 को कोलंबो से रवाना होगा। प्रस्थान के समय भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच 'पासेज सैन्य एक्सरसाइज' (PASSEX) आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है।
भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति का प्रतिबिंब
गौरतलब है कि आईओएस सागर की यह यात्रा भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति का एक ठोस उदाहरण है। यह ऐसे समय में आई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और भारत अपनी समुद्री उपस्थिति को बहुपक्षीय ढाँचे के ज़रिये और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। 16 देशों के नौसैनिकों की एकसाथ भागीदारी इस मिशन को महज़ द्विपक्षीय यात्रा से आगे, एक क्षेत्रीय सहयोग के प्रतीक के रूप में स्थापित करती है।