आईएनएस सिंधु केसरी कोलंबो पहुंची, भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस सिंधु केसरी 4 मई 2026 को श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर पहुंची, जिसे दोनों देशों के बीच बढ़ते समुद्री और रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है। भारतीय नौसेना के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और आपसी विश्वास को सुदृढ़ करना है।
स्वागत और कूटनीतिक महत्व
कोलंबो पहुंचने पर आईएनएस सिंधु केसरी और उसके चालक दल का श्रीलंकाई नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने पारंपरिक और औपचारिक तरीके से स्वागत किया। इस अवसर पर श्रीलंका में भारत के रक्षा सलाहकार भी उपस्थित रहे, जिन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की मजबूती पर विशेष जोर दिया। यह दौरा दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, संचालन क्षमता और समन्वय को बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
पेशेवर और सामरिक गतिविधियाँ
पनडुब्बी के कोलंबो पहुंचने पर दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच विभिन्न पेशेवर और सामरिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इनका उद्देश्य अनुभवों का आदान-प्रदान और संयुक्त संचालन की क्षमता को बेहतर बनाना था। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के दौरे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति या संयुक्त मिशन के दौरान बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने में सहायक होते हैं।
इंडिया-श्रीलंका डाइवेक्स अभ्यास का चौथा संस्करण
गौरतलब है कि आईएनएस सिंधु केसरी के कोलंबो पहुंचने से ठीक पहले, 21 से 28 अप्रैल 2026 के बीच भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं ने कोलंबो में संयुक्त डाइविंग अभ्यास आयोजित किया था। यह इंडिया-श्रीलंका डाइवेक्स अभ्यास का चौथा संस्करण था। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना का विशेष जहाज आईएनएस निरीक्षक शामिल था, जो गहरे समुद्र में डाइविंग और पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
जटिल तकनीकी प्रशिक्षण और ऐतिहासिक स्थल
इस अभ्यास में दोनों देशों की नौसैनिक डाइविंग टीमों ने मिलकर गहरे समुद्र में उन्नत डाइविंग, मिक्स्ड गैस डाइविंग जैसी तकनीकी ट्रेनिंग और बंदरगाह व खुले समुद्र दोनों जगह डाइव का अभ्यास किया। सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि नौसैनिक डाइवर्स ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय के जहाजों के मलबे — एसएस वूस्टर और एसएस पर्सियस — के निकट जाकर यह अभ्यास संपन्न किया। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक असर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। दोनों देश नियमित संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उच्चस्तरीय यात्राओं के माध्यम से अपने रणनीतिक संबंधों को और सुदृढ़ बना रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच इस तरह की पहलें क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं और आगे भी दोनों देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाएँ खुलती रहेंगी।