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आईओएस सागर: भारतीय नौसेना की समुद्री साझेदारी में १६ देशों की भागीदारी

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आईओएस सागर: भारतीय नौसेना की समुद्री साझेदारी में १६ देशों की भागीदारी

सारांश

भारतीय नौसेना ने 'आईओएस सागर' के दूसरे संस्करण के माध्यम से १६ मित्र देशों के साथ समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस पहल का उद्देश्य संयुक्त प्रशिक्षण और समुद्री अनुभव साझा करना है।

मुख्य बातें

आईओएस सागर की शुरुआत १६ मार्च को हुई।
इसमें १६ मित्र देशों के नौसैनिक भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण के सत्र कोच्चि में आयोजित हो रहे हैं।
यह पहल भारत की समुद्री सहयोग नीति को मजबूत करती है।
इससे समुद्री सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।

नई दिल्ली, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक समुद्री सुरक्षा की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर से प्रस्तुत किया है। इसी क्रम में, नौसेना ने 'आईओएस सागर' के दूसरे संस्करण की शुरुआत कर दी है।

भारतीय नौसेना द्वारा आरंभ किया गया 'आईओएस सागर' एक विशेष ऑपरेशनल कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य मित्र देशों के नौसैनिकों को भारतीय नौसेना के जहाजों पर एकत्रित होकर प्रशिक्षण और समुद्री अनुभव प्रदान करना है। यह कार्यक्रम अब शुरू हो चुका है।

नौसेना ने १६ मार्च से इसकी औपचारिक शुरुआत कर दी है। भारतीय नौसेना के अनुसार, इस पहल के तहत विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को जहाज पर होने वाली गतिविधियों और पेशेवर प्रशिक्षण में भाग लेने का अवसर दिया जाता है। इस प्रकार, विभिन्न देशों के नौसैनिकों के बीच सहयोग, तालमेल और समुद्री अभियानों की समझ को बढ़ावा मिलता है। इस संस्करण में १६ मित्र देशों के नौसैनिक शामिल हो रहे हैं।

कार्यक्रम की महत्वपूर्ण शुरुआत केरल के कोच्चि में स्थित नौसेना प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में पेशेवर प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से होगी। यहां विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों को नौसैनिक संचालन, समुद्री कौशल और समुद्री सुरक्षा से जुड़े प्रमुख पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद, प्रतिभागी भारतीय नौसेना के जहाज पर तैनात होकर समुद्र में संयुक्त रूप से संचालन गतिविधियों में भाग लेंगे। इस दौरान, वे भारतीय नौसेना के साथ मिलकर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।

यात्रा के दौरान, नौसेना का यह समुद्री जहाज विभिन्न बंदरगाहों का दौरा करेगा। इन समुद्री यात्राओं में क्षेत्रीय नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य पेशेवर संबंधों को मजबूत करना, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना और साझा समुद्री चुनौतियों की गहन समझ विकसित करना है।

यह ध्यान देने योग्य है कि इसी वर्ष फरवरी में भारतीय नौसेना ने इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम की अध्यक्षता की थी। इसी के तहत इस संस्करण में हिंद महासागर क्षेत्र के १६ सदस्य देशों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह पहल भारत की दीर्घकालिक समुद्री सहयोग नीति को आगे बढ़ाने में सहयोगी साबित होगी।

यह पहल, क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर) से संबंधित भारत सरकार के दृष्टिकोण को साकार करती है। साथ ही, यह व्यापक महासागर सुरक्षा ढांचे को भी मजबूती प्रदान करती है। भारतीय नौसेना का मानना है कि यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भारत की सक्रिय भूमिका को और सुदृढ़ करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सभी मित्र देशों के लिए सामूहिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईओएस सागर पहल का उद्देश्य क्या है?
आईओएस सागर पहल का मुख्य उद्देश्य मित्र देशों के नौसैनिकों को एकत्रित करके उन्हें प्रशिक्षण और समुद्री अनुभव प्रदान करना है।
इस कार्यक्रम में कितने देशों के नौसैनिक भाग ले रहे हैं?
इस कार्यक्रम में कुल १६ मित्र देशों के नौसैनिक भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत कहाँ से हुई है?
कार्यक्रम की शुरुआत केरल के कोच्चि स्थित नौसेना प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों से हुई है।
इस पहल का भारत की समुद्री नीति पर क्या प्रभाव है?
यह पहल भारत की दीर्घकालिक समुद्री सहयोग नीति को आगे बढ़ाने में सहायक है।
इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस क्या है?
इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस समुद्री सुरक्षा, तालमेल और सहयोग को बढ़ावा देना है।
राष्ट्र प्रेस
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