23 जुलाई 2026
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डीके शिवकुमार का उद्योग जगत से आह्वान: सीएसआर से प्राथमिक शिक्षा सुधारें, 10,000 परियोजनाओं की निगरानी को बनेगी विशेष टीम

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डीके शिवकुमार का उद्योग जगत से आह्वान: सीएसआर से प्राथमिक शिक्षा सुधारें, 10,000 परियोजनाओं की निगरानी को बनेगी विशेष टीम

सारांश

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु के ग्लोबल सीएसआर समिट में उद्योग जगत से प्राथमिक शिक्षा को सीएसआर की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने का आग्रह किया। राज्य में चल रही 10,000 सीएसआर परियोजनाओं की निगरानी के लिए समर्पित सरकारी टीम गठित करने की घोषणा भी की गई।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में ग्लोबल सीएसआर एंड सस्टेनेबिलिटी समिट 2026 को संबोधित किया।
उद्योग जगत से प्राथमिक शिक्षा को सीएसआर की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने और स्कूल गोद लेने की अपील।
कर्नाटक में चल रही करीब 10,000 सीएसआर परियोजनाओं की निगरानी के लिए मैसूरु, हुबली समेत पूरे राज्य में विशेष सरकारी टीम बनाई जाएगी।
राज्य के आईटी क्षेत्र में करीब 26 लाख लोग कार्यरत; कैलिफोर्निया के 13 लाख इंजीनियरों में से 6 लाख कर्नाटक से।
कर्नाटक में 71 मेडिकल कॉलेज , हर साल करीब 13,900 डॉक्टर तैयार, लेकिन बड़ी संख्या में विदेश पलायन।
देश के 140 अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में से करीब 38 कर्नाटक में; बेंगलुरु की आबादी अब लगभग 1.4 करोड़ ।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 24 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में आयोजित 'ग्लोबल सीएसआर एंड सस्टेनेबिलिटी समिट 2026' में उद्योग जगत से अपील की कि वे अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) निधि का उपयोग प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने में करें। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार कर्नाटक भर में चल रही करीब 10,000 सीएसआर परियोजनाओं की निगरानी के लिए एक समर्पित सरकारी टीम गठित करेगी।

समिट में मुख्यमंत्री का संबोधन

फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफकेसीसीआई) द्वारा आयोजित इस शिखर सम्मेलन में शिवकुमार ने संगठन के योगदान की सराहना करते हुए कहा, "एक साथ आना शुरुआत है, साथ मिलकर विचार करना प्रगति है और साथ मिलकर काम करना सफलता है।" उन्होंने यह भी कहा कि आईटी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उभरने से पहले भी एफकेसीसीआई ने राज्य के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाई थी।

सीएसआर की अवधारणा पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को याद किया और कहा कि देश में सीएसआर व्यवस्था लागू करने का श्रेय उन्हें जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया, "सीएसआर कोई दान नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास में किया गया निवेश है।"

शिक्षा पर विशेष जोर

शिवकुमार ने उद्योग जगत से ग्रामीण और प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा के लिए छात्रों को बेंगलुरु पलायन करने पर मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कंपनियों से स्कूल गोद लेने, बुनियादी सुविधाएं विकसित करने और शिक्षा विशेषज्ञों का सहयोग देने की अपील की।

उन्होंने टोयोटा का उदाहरण देते हुए कहा, "टोयोटा जैसी कंपनियां पहले से ही स्कूल बना रही हैं। मैं चाहता हूं कि दूसरी कंपनियां भी उनसे प्रेरणा लेकर ऐसा करें।" उन्होंने जोड़ा कि आज के बच्चों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी होती है, इसलिए शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।

बेंगलुरु और कर्नाटक की वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि दिवंगत एस.एम. कृष्णा के साथ मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में शहर की आबादी करीब 70 लाख थी, जो अब बढ़कर लगभग 1.4 करोड़ हो गई है। शहर में अब करीब 1.30 करोड़ वाहन हैं और कर्नाटक की 43 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करती है।

उन्होंने बताया कि देश के 140 अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में से करीब 38 कर्नाटक में हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि बेंगलुरु दुनिया के नेताओं की पसंदीदा जगह बनेगा। उन्होंने दावा किया, "पहले दुनिया के नेता सबसे पहले दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद या कोलकाता जाते थे, लेकिन अब वे सबसे पहले बेंगलुरु आते हैं।"

आईटी क्षेत्र और प्रतिभा पलायन

शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक के आईटी क्षेत्र में करीब 26 लाख लोग कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया में काम कर रहे 13 लाख इंजीनियरों में से लगभग 6 लाख कर्नाटक के हैं। राज्य में 71 मेडिकल कॉलेज हैं, जहाँ हर साल करीब 13,900 डॉक्टर और लगभग एक लाख अन्य स्वास्थ्यकर्मी तैयार होते हैं — हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इनमें से बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली लोग विदेश चले जाते हैं।

संतुलित विकास और सीएसआर निगरानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का विकास अब केवल बेंगलुरु तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने मैसूरु, हुबली और अन्य जिलों में भी सीएसआर परियोजनाओं की निगरानी के लिए समर्पित सरकारी टीम बनाने की घोषणा की। उन्होंने नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संतुलन पर जोर देते हुए कहा, "अगर नियोक्ता नहीं होंगे तो कर्मचारी भी नहीं होंगे। यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारियों पर काम का जरूरत से ज्यादा बोझ न पड़े।" एआई जैसी नई तकनीकों के तेज बदलाव के बीच उन्होंने टिकाऊ विकास और प्राथमिक शिक्षा को सरकार की प्राथमिकता बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 परियोजनाओं की निगरानी के लिए अलग टीम का गठन स्वीकारोक्ति है कि मौजूदा तंत्र पर्याप्त नहीं है। प्राथमिक शिक्षा पर जोर सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि कंपनियों की स्वैच्छिक भागीदारी को बाध्यकारी परिणामों से कैसे जोड़ा जाए। राज्य से प्रतिभा पलायन — चाहे आईटी हो या चिकित्सा — का जिक्र करते हुए भी ठोस नीतिगत उपाय का अभाव दिखा। बेंगलुरु की वैश्विक छवि को लेकर गर्व स्वाभाविक है, परंतु शहर के बाहर संतुलित विकास की बात वर्षों से होती आ रही है और ज़मीनी बदलाव सीमित रहा है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सीएसआर के तहत किस क्षेत्र पर ध्यान देने की अपील की?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने उद्योग जगत से अपील की कि वे सीएसआर निधि की सर्वोच्च प्राथमिकता प्राथमिक शिक्षा को बनाएं। उन्होंने कंपनियों से स्कूल गोद लेने, बुनियादी सुविधाएं विकसित करने और शिक्षा विशेषज्ञों का सहयोग देने का आग्रह किया।
कर्नाटक में सीएसआर परियोजनाओं की निगरानी के लिए क्या घोषणा हुई?
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में चल रही करीब 10,000 सीएसआर परियोजनाओं की निगरानी के लिए एक समर्पित सरकारी टीम बनाई जाएगी, जो मैसूरु, हुबली और अन्य जिलों में भी सक्रिय रहेगी।
ग्लोबल सीएसआर एंड सस्टेनेबिलिटी समिट 2026 का आयोजन किसने किया?
इस शिखर सम्मेलन का आयोजन फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफकेसीसीआई) ने बेंगलुरु में किया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
कर्नाटक के आईटी क्षेत्र और प्रतिभा के बारे में मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
शिवकुमार ने बताया कि राज्य के आईटी क्षेत्र में करीब 26 लाख लोग कार्यरत हैं और कैलिफोर्निया में काम कर रहे 13 लाख इंजीनियरों में से लगभग 6 लाख कर्नाटक के हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राज्य के बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी विदेश चले जाते हैं।
बेंगलुरु की वैश्विक स्थिति पर मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु अब दुनिया के नेताओं की पहली पसंद बन गया है। उन्होंने बताया कि देश के 140 अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में से 38 कर्नाटक में हैं और शहर की आबादी अब लगभग 1.4 करोड़ हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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