सत्येंद्र जैन की जमानत पर राऊज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सुरक्षित, 3 सितंबर को होगा आदेश
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) घोटाले में राहत मिलेगी या नहीं — इसका फैसला अब 3 सितंबर को आएगा। नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 25 अगस्त को जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया।
बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत के समक्ष कई अहम तर्क रखे। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज होने के 27 महीने बाद जैन की गिरफ्तारी की गई, इस दौरान उन्हें केवल एक बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था और दूसरी बार बुलाने पर सीधे गिरफ्तार कर लिया गया।
वकील ने यह भी तर्क दिया कि मामले से जुड़ी समस्त सामग्री दस्तावेजी प्रकृति की है और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही जाँच एजेंसियों के पास हैं। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में गिरफ्तारी की कोई ठोस आवश्यकता नहीं थी और यह कार्यवाही दंडात्मक स्वरूप ले चुकी है।
जाँच की स्थिति पर सवाल
अधिवक्ता हरिहरन ने अदालत को बताया कि दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जाँच एजेंसी अब भी यह कह रही है कि जाँच अपने शुरुआती दौर में है। उन्होंने कहा कि पूरा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच पर निर्भर है, जो अभी तक अनिर्णीत है।
बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि सत्येंद्र जैन ने संबंधित निर्णय अकेले नहीं लिए थे — उन्हें तकनीकी विशेषज्ञता रखने वाले अधिकारियों की सलाह और सिफारिशों के आधार पर कदम उठाने पड़े थे।
रोहिणी एसटीपी क्षमता विस्तार का आरोप
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि रोहिणी एसटीपी की क्षमता सत्येंद्र जैन के निर्देश पर 15-25 एमजीडी से बढ़ाकर 15-30 एमजीडी की गई। इस पर वकील ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड इस आरोप की पुष्टि नहीं करते।
एसीबी का विरोध
एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। एसीबी ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं और जमानत पर निर्णय लेते समय उनके आचरण को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि सत्येंद्र जैन पहले भी धन-शोधन के एक अलग मामले में जेल जा चुके हैं, जो उनके लिए यह दूसरा बड़ा कानूनी मोर्चा है। अब सभी की निगाहें 3 सितंबर पर टिकी हैं, जब अदालत अपना आदेश सुनाएगी।