25 अगस्त 2026
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सत्येंद्र जैन की जमानत पर राऊज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सुरक्षित, 3 सितंबर को होगा आदेश

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सत्येंद्र जैन की जमानत पर राऊज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सुरक्षित, 3 सितंबर को होगा आदेश

सारांश

दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी घोटाले में आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत 3 सितंबर को आदेश सुनाएगी। बचाव पक्ष ने 27 महीने बाद गिरफ्तारी और दस्तावेजी साक्ष्य का हवाला दिया, जबकि एसीबी ने जमानत का विरोध किया।

मुख्य बातें

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 25 अगस्त को सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
अदालत 3 सितंबर को अपना आदेश सुनाएगी।
बचाव पक्ष का तर्क: मामला दर्ज होने के 27 महीने बाद गिरफ्तारी हुई और सभी दस्तावेज पहले से जाँच एजेंसी के पास हैं।
रोहिणी एसटीपी की क्षमता 15-25 एमजीडी से 15-30 एमजीडी करने का आरोप; बचाव पक्ष ने रिकॉर्ड के आधार पर खंडन किया।
एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने जमानत का विरोध करते हुए जैन को आदतन अपराधी बताया।
जाँच ED की कार्यवाही पर निर्भर; दो वर्ष बाद भी शुरुआती दौर में होने का दावा।

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) घोटाले में राहत मिलेगी या नहीं — इसका फैसला अब 3 सितंबर को आएगा। नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 25 अगस्त को जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया।

बचाव पक्ष की दलीलें

सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत के समक्ष कई अहम तर्क रखे। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज होने के 27 महीने बाद जैन की गिरफ्तारी की गई, इस दौरान उन्हें केवल एक बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था और दूसरी बार बुलाने पर सीधे गिरफ्तार कर लिया गया।

वकील ने यह भी तर्क दिया कि मामले से जुड़ी समस्त सामग्री दस्तावेजी प्रकृति की है और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही जाँच एजेंसियों के पास हैं। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में गिरफ्तारी की कोई ठोस आवश्यकता नहीं थी और यह कार्यवाही दंडात्मक स्वरूप ले चुकी है।

जाँच की स्थिति पर सवाल

अधिवक्ता हरिहरन ने अदालत को बताया कि दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जाँच एजेंसी अब भी यह कह रही है कि जाँच अपने शुरुआती दौर में है। उन्होंने कहा कि पूरा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच पर निर्भर है, जो अभी तक अनिर्णीत है।

बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि सत्येंद्र जैन ने संबंधित निर्णय अकेले नहीं लिए थे — उन्हें तकनीकी विशेषज्ञता रखने वाले अधिकारियों की सलाह और सिफारिशों के आधार पर कदम उठाने पड़े थे।

रोहिणी एसटीपी क्षमता विस्तार का आरोप

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि रोहिणी एसटीपी की क्षमता सत्येंद्र जैन के निर्देश पर 15-25 एमजीडी से बढ़ाकर 15-30 एमजीडी की गई। इस पर वकील ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड इस आरोप की पुष्टि नहीं करते।

एसीबी का विरोध

एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। एसीबी ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं और जमानत पर निर्णय लेते समय उनके आचरण को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि सत्येंद्र जैन पहले भी धन-शोधन के एक अलग मामले में जेल जा चुके हैं, जो उनके लिए यह दूसरा बड़ा कानूनी मोर्चा है। अब सभी की निगाहें 3 सितंबर पर टिकी हैं, जब अदालत अपना आदेश सुनाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एसीबी का 'आदतन अपराधी' वाला दावा न्यायालय के लिए जमानत की शर्तें तय करने में निर्णायक हो सकता है। यह भी उल्लेखनीय है कि ED की जाँच दो वर्ष बाद भी 'प्रारंभिक दौर' में बताई जा रही है — यह या तो मामले की जटिलता को दर्शाता है या एजेंसी की गति पर सवाल उठाता है। 3 सितंबर का आदेश केवल एक नेता की जमानत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण का एक संकेत भी होगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी घोटाले में सत्येंद्र जैन पर क्या आरोप हैं?
सत्येंद्र जैन पर आरोप है कि उनके निर्देश पर रोहिणी एसटीपी की क्षमता 15-25 एमजीडी से बढ़ाकर 15-30 एमजीडी की गई, जो कथित तौर पर अनियमित रूप से हुआ। एंटी करप्शन ब्रांच ने उन्हें इस घोटाले का मुख्य आरोपी बताया है।
राऊज एवेन्यू कोर्ट सत्येंद्र जैन की जमानत पर कब फैसला सुनाएगी?
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 25 अगस्त को जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है और 3 सितंबर को अपना आदेश सुनाएगी।
सत्येंद्र जैन के वकील ने जमानत के पक्ष में क्या दलीलें दीं?
वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि मामला दर्ज होने के 27 महीने बाद गिरफ्तारी हुई, सभी दस्तावेज पहले से एजेंसी के पास हैं, और जैन ने निर्णय तकनीकी अधिकारियों की सलाह पर लिए थे। उनके अनुसार कार्यवाही दंडात्मक हो गई है।
एसीबी ने जमानत का विरोध क्यों किया?
एंटी करप्शन ब्रांच ने अदालत में तर्क दिया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं और जमानत देते समय उनके आचरण पर विचार किया जाना चाहिए। एसीबी ने जमानत याचिका को खारिज करने की माँग की।
इस मामले में ED की जाँच की स्थिति क्या है?
बचाव पक्ष के अनुसार, दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच अभी भी शुरुआती दौर में है। पूरा अभियोजन पक्ष का मामला ED की जाँच पर निर्भर बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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