सतीश सेठ को 6 दिन की ईडी हिरासत, द्वारका कोर्ट का आदेश — मनी लॉन्ड्रिंग में RAAG के पूर्व MD गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने 14 जून 2026 को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 6 दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हिरासत में भेज दिया। वेकेशन जज वंदना जैन (एएसजे-3, साउथ वेस्ट) ने यह आदेश सुनाते हुए कहा कि फंड का पूरा ट्रेल जानने के लिए कस्टोडियल पूछताछ अनिवार्य है।
मुख्य घटनाक्रम
13 जून 2026 की रात 8 बजे सतीश सेठ को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया। अगले दिन उन्हें द्वारका कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ ईडी ने 13 दिन की हिरासत की माँग की थी। कोर्ट ने आंशिक रूप से माँग स्वीकार करते हुए 6 दिन की कस्टडी मंजूर की। सतीश सेठ की मेडिकल जाँच कराई गई और उनके पुत्र हर्ष सेठ तथा नयन भी अदालत में उपस्थित रहे।
आरोप और जाँच का दायरा
ईडी के अनुसार, सतीश सेठ पर हवाला चैनल के ज़रिए विदेशों में ओवर-रेटेड डायमंड इंपोर्ट के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर फंड साइफन करने का आरोप है। इस मामले में ईसीआईआर नंबर ECIR/STF/08/2026 दर्ज किया गया है, जो पीएमएलए 2002 की धारा 3 और 4 के तहत है।
जाँच में गीत एक्सिम प्राइवेट लिमिटेड, विभा इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड और पहल इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कथित शेल कंपनियों की संलिप्तता सामने आई है। आरोप है कि इन कंपनियों के ज़रिए हीरे के आयात में अधिक कीमत दिखाकर फर्जी बिल बनाए गए और हवाला रूट से धन विदेश भेजा गया।
एफआईआर और कानूनी आधार
यह मामला मुंबई के डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में 11 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर नंबर 172/2026 से जुड़ा है। एफआईआर में आईपीसी की धाराएँ 409, 465, 467, 468, 471 और 120B लगाई गई हैं। गौरतलब है कि ये धाराएँ आपराधिक विश्वासघात, जालसाज़ी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित हैं।
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें
ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक साइमन बेंजामिन ने दलील दी कि बिना कस्टोडियल पूछताछ के फंड का पूरा ट्रेल उजागर नहीं किया जा सकता। ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर विक्रम अहलावत और ईओ दिनेश यादव समेत कई अधिकारी सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। आरोपी के वकीलों ने हिरासत का विरोध किया, परंतु कोर्ट ने ईडी की आंशिक माँग स्वीकार कर ली।
सतीश सेठ की पृष्ठभूमि और आगे की राह
सतीश सेठ रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर और RAAG में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं। यह मामला RAAG की कंपनियों से जुड़ी बड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जाँच का हिस्सा माना जा रहा है। ईडी की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद कोर्ट में अगली सुनवाई होगी, जिसमें आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।