ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 12 जून 2026 को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (आरएएजी) के दो पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर — सतीश सेठ (आयु 70 वर्ष) और गौतम भईलाल दोशी (आयु 73 वर्ष) — को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया। दोनों अधिकारी अब ईडी की हिरासत में हैं और जाँच जारी है।
गिरफ्तारी और कस्टडी का विवरण
सतीश सेठ को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े प्रवर्तन मामले (ईसीआईआर) में गिरफ्तार किया गया। उन्हें पहले ग्रेटर मुंबई की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पेश किया गया, जहाँ ट्रांजिट रिमांड मिली। इसके बाद उन्हें नई दिल्ली के द्वारका स्थित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने 6 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा।
गौतम दोशी को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े ईसीआईआर में गिरफ्तार किया गया। उन्हें नई दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने 5 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा।
ईडी के आरोप: क्या है मामला
ईडी के अनुसार, सतीश सेठ साल 2000 से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में महत्वपूर्ण निदेशक और प्रबंधकीय पदों पर रहे और उन्होंने ग्रुप की कई कंपनियों के प्रमुख वाणिज्यिक एवं वित्तीय निर्णयों पर नियंत्रण रखा। जाँच में यह सामने आया है कि उन्होंने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के रोड कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स से सार्वजनिक धन की कथित हेराफेरी में अहम भूमिका निभाई।
गौतम दोशी के बारे में ईडी का कहना है कि उन्होंने ऐसे कॉर्पोरेट ढाँचे बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिनका उपयोग रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड में कथित अनियमित लेनदेन से अर्जित धन को स्थानांतरित करने के लिए किया गया। दोशी कई भारतीय और विदेशी आरएएजी कंपनियों के बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज्ड सिग्नेटरी) भी थे।
ग्रुप का पक्ष
रिलायंस ग्रुप के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'सेठ और दोशी ग्रुप से जुड़े हुए नहीं हैं।' प्रवक्ता के अनुसार, सतीश सेठ 2025 में ग्रुप से अलग हो गए थे, जबकि गौतम दोशी 2020 में — यानी लगभग छह साल पहले — ग्रुप छोड़ चुके हैं। ग्रुप ने स्पष्ट किया कि दोनों पूर्व अधिकारी हैं और वर्तमान संगठन से उनका कोई संबंध नहीं है।
व्यापक संदर्भ
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब ईडी रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के खिलाफ चल रही व्यापक जाँच को आगे बढ़ा रही है। गौरतलब है कि आरएएजी की कई कंपनियाँ — जिनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं — पिछले कुछ वर्षों से कर्ज संकट और कानूनी विवादों के घेरे में रही हैं। यह मामला उस लंबी जाँच श्रृंखला की कड़ी है जिसमें ईडी ने आरएएजी की कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की है।
आगे क्या होगा
दोनों अधिकारियों की हिरासत अवधि क्रमशः 6 और 5 दिन की है, जिसके बाद उन्हें संबंधित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पुनः पेश किया जाएगा। ईडी ने संकेत दिया है कि जाँच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।