31 जुलाई 2026
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ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया

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ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया

सारांश

ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों — सतीश सेठ और गौतम दोशी — को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार कर क्रमशः 6 और 5 दिन की हिरासत में भेजा है। आरोप हैं कि सेठ ने रोड प्रोजेक्ट्स से सार्वजनिक धन की हेराफेरी की, जबकि दोशी ने कथित अनियमित धन को इधर-उधर करने के लिए कॉर्पोरेट ढाँचे बनाए।

मुख्य बातें

ईडी ने 12 जून 2026 को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप ( आरएएजी ) के पूर्व ग्रुप एमडी सतीश सेठ और गौतम भईलाल दोशी को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया।
सतीश सेठ को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मामले में 6 दिन की ईडी हिरासत मिली; गौतम दोशी को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड मामले में 5 दिन की हिरासत।
ईडी के अनुसार सेठ पर रोड कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स से सार्वजनिक धन की हेराफेरी का आरोप; दोशी पर कथित अनियमित धन के हस्तांतरण के लिए कॉर्पोरेट ढाँचे बनाने का आरोप।
रिलायंस ग्रुप के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि सेठ 2025 में और दोशी 2020 में ग्रुप छोड़ चुके हैं।
दोनों की हिरासत अवधि समाप्त होने पर उन्हें संबंधित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पुनः पेश किया जाएगा।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 12 जून 2026 को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (आरएएजी) के दो पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर — सतीश सेठ (आयु 70 वर्ष) और गौतम भईलाल दोशी (आयु 73 वर्ष) — को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया। दोनों अधिकारी अब ईडी की हिरासत में हैं और जाँच जारी है।

गिरफ्तारी और कस्टडी का विवरण

सतीश सेठ को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े प्रवर्तन मामले (ईसीआईआर) में गिरफ्तार किया गया। उन्हें पहले ग्रेटर मुंबई की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पेश किया गया, जहाँ ट्रांजिट रिमांड मिली। इसके बाद उन्हें नई दिल्ली के द्वारका स्थित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने 6 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा।

गौतम दोशी को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े ईसीआईआर में गिरफ्तार किया गया। उन्हें नई दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने 5 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा।

ईडी के आरोप: क्या है मामला

ईडी के अनुसार, सतीश सेठ साल 2000 से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में महत्वपूर्ण निदेशक और प्रबंधकीय पदों पर रहे और उन्होंने ग्रुप की कई कंपनियों के प्रमुख वाणिज्यिक एवं वित्तीय निर्णयों पर नियंत्रण रखा। जाँच में यह सामने आया है कि उन्होंने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के रोड कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स से सार्वजनिक धन की कथित हेराफेरी में अहम भूमिका निभाई।

गौतम दोशी के बारे में ईडी का कहना है कि उन्होंने ऐसे कॉर्पोरेट ढाँचे बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिनका उपयोग रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड में कथित अनियमित लेनदेन से अर्जित धन को स्थानांतरित करने के लिए किया गया। दोशी कई भारतीय और विदेशी आरएएजी कंपनियों के बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज्ड सिग्नेटरी) भी थे।

ग्रुप का पक्ष

रिलायंस ग्रुप के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'सेठ और दोशी ग्रुप से जुड़े हुए नहीं हैं।' प्रवक्ता के अनुसार, सतीश सेठ 2025 में ग्रुप से अलग हो गए थे, जबकि गौतम दोशी 2020 में — यानी लगभग छह साल पहले — ग्रुप छोड़ चुके हैं। ग्रुप ने स्पष्ट किया कि दोनों पूर्व अधिकारी हैं और वर्तमान संगठन से उनका कोई संबंध नहीं है।

व्यापक संदर्भ

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब ईडी रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के खिलाफ चल रही व्यापक जाँच को आगे बढ़ा रही है। गौरतलब है कि आरएएजी की कई कंपनियाँ — जिनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं — पिछले कुछ वर्षों से कर्ज संकट और कानूनी विवादों के घेरे में रही हैं। यह मामला उस लंबी जाँच श्रृंखला की कड़ी है जिसमें ईडी ने आरएएजी की कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की है।

आगे क्या होगा

दोनों अधिकारियों की हिरासत अवधि क्रमशः 6 और 5 दिन की है, जिसके बाद उन्हें संबंधित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पुनः पेश किया जाएगा। ईडी ने संकेत दिया है कि जाँच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उनकी गिरफ्तारी हुई — यह दर्शाता है कि ईडी के लिए कॉर्पोरेट पद और निर्णय-नियंत्रण की अवधि अधिक प्रासंगिक है, न कि वर्तमान संबद्धता। आरएएजी की कंपनियाँ वर्षों से कर्ज और दिवालियापन की प्रक्रियाओं में उलझी रही हैं, और अब पीएमएलए की कार्रवाई यह सवाल उठाती है कि क्या उन प्रक्रियाओं के दौरान सार्वजनिक धन के साथ क्या हुआ — इसका जवाब अदालत में तय होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने सतीश सेठ और गौतम दोशी को क्यों गिरफ्तार किया?
ईडी ने दोनों को पीएमएलए के तहत रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में गिरफ्तार किया। सेठ पर रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के रोड प्रोजेक्ट्स से सार्वजनिक धन की हेराफेरी का आरोप है, जबकि दोशी पर रिलायंस कम्युनिकेशंस और टेलीकॉम के कथित अनियमित धन को स्थानांतरित करने के लिए कॉर्पोरेट ढाँचे बनाने का आरोप है।
सतीश सेठ और गौतम दोशी को कितने दिनों की ईडी हिरासत मिली?
नई दिल्ली के द्वारका स्थित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने सतीश सेठ को 6 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा। गौतम दोशी को राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने 5 दिनों की हिरासत दी।
रिलायंस ग्रुप ने इन गिरफ्तारियों पर क्या कहा?
रिलायंस ग्रुप के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि सतीश सेठ 2025 में और गौतम दोशी 2020 में ग्रुप से अलग हो चुके हैं और वर्तमान में ग्रुप से उनका कोई संबंध नहीं है। ग्रुप ने उन्हें 'पूर्व अधिकारी' बताया।
इस मामले में कौन-सी कंपनियाँ जाँच के दायरे में हैं?
ईडी की जाँच मुख्यतः रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े मामलों पर केंद्रित है। रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड भी जाँच के दायरे में बताई जा रही है।
पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगा?
हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद दोनों अधिकारियों को संबंधित स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पुनः पेश किया जाएगा, जहाँ कोर्ट आगे की हिरासत या जमानत पर फैसला करेगी। ईडी ने संकेत दिया है कि जाँच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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