28 जुलाई 2026
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ईडी ने ADAG के दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया, ₹114.98 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में कार्रवाई

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ईडी ने ADAG के दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया, ₹114.98 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में कार्रवाई

सारांश

ईडी ने एडीएजी के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों को ₹114.98 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी में गिरफ्तार किया। एनसीएलटी ने अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया भी शुरू की। ईडी, सीबीआई और एनसीएलटी — तीनों मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई ने एडीएजी संकट को नए मोड़ पर ला दिया है।

मुख्य बातें

ईडी ने 13 जून 2026 को पीएमएलए के तहत एडीएजी के पूर्व अधिकारियों सतीश सेठ और गौतम दोशी को मुंबई में गिरफ्तार किया।
मामला एसबीआई से जुड़े ₹114.98 करोड़ के कथित लोन धोखाधड़ी से संबंधित है; 11 बैंकों ने रिलायंस टेलीकॉम को कुल ₹735 करोड़ की टर्म लोन दी थी।
सतीश सेठ ने 2025 में और गौतम दोशी ने 2020 में समूह छोड़ा था; रिलायंस समूह ने कहा उनका अब समूह से कोई संबंध नहीं।
इससे पहले जून में सीबीआई ने अमिताभ झुनझुनवाला को ₹2,929.05 करोड़ के कथित एसबीआई नुकसान के मामले में गिरफ्तार किया था।
एनसीएलटी ने अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया; अंबानी ने कानूनी चुनौती देने की बात कही।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 13 जून 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को मुंबई में गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व निदेशक सतीश सेठ (70 वर्ष) और गौतम दोशी (73 वर्ष) के रूप में हुई है, जिन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मार्च 2026 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से जुड़े ₹114.98 करोड़ के कथित लोन धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत दोनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी और उनके परिसरों पर छापेमारी भी की थी। माना जा रहा है कि ईडी ने सीबीआई की इसी शिकायत का संज्ञान लेकर बैंक लोन धोखाधड़ी में इन दोनों की भूमिका की जांच शुरू की है।

सीबीआई के अनुसार, एसबीआई उन 11 बैंकों के समूह का हिस्सा था जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल ₹735 करोड़ की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी।

कौन हैं सतीश सेठ और गौतम दोशी

सतीश सेठ पहले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और उन्होंने समूह प्रबंध निदेशक तथा कई कंपनियों के निदेशक के रूप में कार्य किया था। उन्होंने वर्ष 2025 में समूह छोड़ा था। गौतम दोशी ने भी समूह प्रबंध निदेशक और समूह के भीतर व बाहर कई कंपनियों के निदेशक के रूप में काम किया था और वर्ष 2020 में, अर्थात् लगभग छह वर्ष पहले, समूह से अलग हो गए थे। सतीश सेठ को आगे की हिरासत के लिए दिल्ली की अदालत में पेश किया जाएगा।

रिलायंस समूह की प्रतिक्रिया

रिलायंस समूह के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि "सतीश सेठ (70 वर्ष) और गौतम दोशी (73 वर्ष) का अब समूह से कोई संबंध नहीं है।" प्रवक्ता ने दोनों की समूह में पूर्व भूमिकाओं का उल्लेख करते हुए यह भी बताया कि उन्होंने क्रमशः 2025 और 2020 में समूह छोड़ा था।

अमिताभ झुनझुनवाला की गिरफ्तारी और व्यापक जांच

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब जून 2026 में ही सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला को कथित लोन धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था। अधिकारियों के अनुसार, उस मामले में कंपनी द्वारा एसबीआई को ₹2,929.05 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया था। इस प्रकार एडीएजी से जुड़ी जांच का दायरा तेज़ी से बढ़ता दिख रहा है।

अनिल अंबानी के विरुद्ध एनसीएलटी का आदेश

इस बीच, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने एसबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) को दिए गए ऋणों के लिए उनकी व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर की गई है।

एनसीएलटी के इस फैसले पर अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद उनकी कानूनी टीम उसका अध्ययन करेगी और कानूनी सलाह के अनुसार उपयुक्त मंचों पर उसे चुनौती देगी। प्रवक्ता के अनुसार, "अंबानी को पूरा विश्वास है कि वह उचित कानूनी मंचों पर अपना पक्ष सफलतापूर्वक साबित करेंगे।"

गौरतलब है कि एडीएजी समूह के विरुद्ध यह बहु-एजेंसी कार्रवाई — ईडी, सीबीआई और एनसीएलटी तीनों मोर्चों पर एक साथ — भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में दुर्लभ है और आने वाले हफ्तों में इस मामले की कानूनी दिशा महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सीबीआई और एनसीएलटी की एक साथ कार्रवाई महज संयोग नहीं लगती — यह बहु-एजेंसी समन्वय भारतीय कॉर्पोरेट जगत को एक स्पष्ट संकेत है। लेकिन जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि गिरफ्तार किए गए दोनों अधिकारी क्रमशः 2020 और 2025 में समूह छोड़ चुके थे — यानी जांच की समयरेखा और उनकी जिम्मेदारी का दायरा अदालत में निर्णायक प्रश्न बनेगा। अनिल अंबानी के विरुद्ध व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया शुरू होना भारतीय दिवाला कानून के तहत एक दुर्लभ कदम है और यह संकेत देता है कि लेनदार बैंक अब सीधे प्रमोटर की निजी संपत्तियों तक पहुंचने की कोशिश में हैं। असली परीक्षण यह होगी कि क्या अभियोजन पक्ष व्यक्तिगत आपराधिक मंशा साबित कर पाता है, या यह मामला कॉर्पोरेट विफलता और आपराधिक धोखाधड़ी के बीच की उस धुंधली रेखा पर टिका रहेगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
ईडी ने 13 जून 2026 को एडीएजी के पूर्व अधिकारियों सतीश सेठ और गौतम दोशी को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एसबीआई से जुड़े ₹114.98 करोड़ के कथित लोन धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की शिकायत के आधार पर की गई है।
सतीश सेठ और गौतम दोशी का रिलायंस समूह से क्या संबंध था?
सतीश सेठ रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के उपाध्यक्ष और समूह प्रबंध निदेशक रहे थे, उन्होंने 2025 में समूह छोड़ा। गौतम दोशी भी समूह प्रबंध निदेशक रहे और 2020 में समूह से अलग हुए। रिलायंस समूह ने स्पष्ट किया है कि दोनों का अब समूह से कोई संबंध नहीं है।
एनसीएलटी ने अनिल अंबानी के खिलाफ क्या आदेश दिया?
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने एसबीआई की याचिका पर अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई आरकॉम और आरआईटीएल को दिए गए ऋणों के लिए उनकी व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर की गई है।
रिलायंस टेलीकॉम को कितने बैंकों ने और कितना लोन दिया था?
सीबीआई के अनुसार, एसबीआई सहित 11 बैंकों के एक समूह ने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल ₹735 करोड़ की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी। इसी लोन से जुड़ी धोखाधड़ी की जांच ईडी और सीबीआई दोनों कर रही हैं।
अमिताभ झुनझुनवाला की गिरफ्तारी इस मामले से कैसे जुड़ी है?
जून 2026 में ही सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला को एक अलग लेकिन संबंधित कथित लोन धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था। अधिकारियों के अनुसार, उस मामले में एसबीआई को ₹2,929.05 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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