ईडी ने ADAG के दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया, ₹114.98 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 13 जून 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को मुंबई में गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व निदेशक सतीश सेठ (70 वर्ष) और गौतम दोशी (73 वर्ष) के रूप में हुई है, जिन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मार्च 2026 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से जुड़े ₹114.98 करोड़ के कथित लोन धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत दोनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी और उनके परिसरों पर छापेमारी भी की थी। माना जा रहा है कि ईडी ने सीबीआई की इसी शिकायत का संज्ञान लेकर बैंक लोन धोखाधड़ी में इन दोनों की भूमिका की जांच शुरू की है।
सीबीआई के अनुसार, एसबीआई उन 11 बैंकों के समूह का हिस्सा था जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल ₹735 करोड़ की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी।
कौन हैं सतीश सेठ और गौतम दोशी
सतीश सेठ पहले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और उन्होंने समूह प्रबंध निदेशक तथा कई कंपनियों के निदेशक के रूप में कार्य किया था। उन्होंने वर्ष 2025 में समूह छोड़ा था। गौतम दोशी ने भी समूह प्रबंध निदेशक और समूह के भीतर व बाहर कई कंपनियों के निदेशक के रूप में काम किया था और वर्ष 2020 में, अर्थात् लगभग छह वर्ष पहले, समूह से अलग हो गए थे। सतीश सेठ को आगे की हिरासत के लिए दिल्ली की अदालत में पेश किया जाएगा।
रिलायंस समूह की प्रतिक्रिया
रिलायंस समूह के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि "सतीश सेठ (70 वर्ष) और गौतम दोशी (73 वर्ष) का अब समूह से कोई संबंध नहीं है।" प्रवक्ता ने दोनों की समूह में पूर्व भूमिकाओं का उल्लेख करते हुए यह भी बताया कि उन्होंने क्रमशः 2025 और 2020 में समूह छोड़ा था।
अमिताभ झुनझुनवाला की गिरफ्तारी और व्यापक जांच
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब जून 2026 में ही सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला को कथित लोन धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था। अधिकारियों के अनुसार, उस मामले में कंपनी द्वारा एसबीआई को ₹2,929.05 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया था। इस प्रकार एडीएजी से जुड़ी जांच का दायरा तेज़ी से बढ़ता दिख रहा है।
अनिल अंबानी के विरुद्ध एनसीएलटी का आदेश
इस बीच, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने एसबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) को दिए गए ऋणों के लिए उनकी व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर की गई है।
एनसीएलटी के इस फैसले पर अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद उनकी कानूनी टीम उसका अध्ययन करेगी और कानूनी सलाह के अनुसार उपयुक्त मंचों पर उसे चुनौती देगी। प्रवक्ता के अनुसार, "अंबानी को पूरा विश्वास है कि वह उचित कानूनी मंचों पर अपना पक्ष सफलतापूर्वक साबित करेंगे।"
गौरतलब है कि एडीएजी समूह के विरुद्ध यह बहु-एजेंसी कार्रवाई — ईडी, सीबीआई और एनसीएलटी तीनों मोर्चों पर एक साथ — भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में दुर्लभ है और आने वाले हफ्तों में इस मामले की कानूनी दिशा महत्वपूर्ण होगी।