10 अगस्त 2026
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सीबीआई ने ₹7,623 करोड़ बैंक घोटाले में अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व सीईओ गिरफ्तार किए

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सीबीआई ने ₹7,623 करोड़ बैंक घोटाले में अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व सीईओ गिरफ्तार किए

सारांश

सीबीआई ने ₹7,623 करोड़ के बैंक घोटाले में अनिल अंबानी के रिलायंस एडीए ग्रुप की दो कंपनियों के पूर्व सीईओ को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 23 सरकारी बैंकों का पैसा बिचौलिया कंपनियों के ज़रिए समूह की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। सुप्रीम कोर्ट इस जांच की निगरानी कर रहा है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 22 जून 2026 को देवांग मोदी (पूर्व सीईओ, आरसीएफएल) और रवींद्र सुधालकर (पूर्व सीईओ, आरएचएफएल) को गिरफ्तार किया।
घोटाले से सरकारी बैंकों को कुल ₹7,623 करोड़ का नुकसान — आरसीएफएल मामले में ₹4,097 करोड़ ( 13 बैंक ), आरएचएफएल मामले में ₹3,526 करोड़ ( 10 बैंक )।
आरोप है कि फंड को रिलायंस कैपिटल , रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर में बिचौलिया कंपनियों के ज़रिए ट्रांसफर किया गया।
सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप के मामलों में 7 एफआईआर दर्ज की हैं और अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया है।
29 मई को आरकॉम मामले में पहली चार्जशीट दाखिल, 16 आरोपी — जिनमें 5 वरिष्ठ अधिकारी और 10 बैंक अधिकारी शामिल।
इन मामलों की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जारी है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 22 जून 2026 को रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के पूर्व डायरेक्टर एवं सीईओ देवांग मोदी और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं सीईओ रवींद्र सुधालकर को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी अनिल अंबानी के रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े ₹7,623 करोड़ के बैंक घोटाले की चल रही जांच के तहत की गई है, जिसकी निगरानी स्वयं सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है।

घोटाले का स्वरूप और वित्तीय नुकसान

सीबीआई के अनुसार, आरोपियों ने आरसीएफएल और आरएचएफएल से प्राप्त धनराशि को रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड जैसी समूह की अन्य कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया। इससे सरकारी बैंकों को कुल ₹7,623 करोड़ का नुकसान हुआ और आरोपियों तथा उनसे जुड़ी कंपनियों को उतना ही अवैध लाभ मिला।

आरसीएफएल मामले में 13 सरकारी बैंकों को ₹4,097 करोड़ की चपत लगी, जबकि आरएचएफएल मामले में 10 सरकारी बैंकों को ₹3,526 करोड़ का नुकसान हुआ।

दोनों आरोपियों की भूमिका

देवांग मोदी अप्रैल 2017 से दिसंबर 2018 तक आरसीएफएल के सीईओ पद पर रहे। जांच के अनुसार, उन्होंने बिचौलिया कंपनियों को ऋण स्वीकृत किए, जबकि उन्हें भली-भांति पता था कि यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से ऋण लेने की स्वीकृति शर्तों के विरुद्ध था।

रवींद्र सुधालकर 1 अक्टूबर 2016 से 31 मार्च 2022 तक आरएचएफएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं सीईओ रहे। उन पर आरोप है कि उन्होंने भी बिचौलिया कंपनियों को ऋण मंजूर किए, जो कंपनी की ऋण नीतियों, राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB) और आरबीआई के नियमों तथा सार्वजनिक बैंकों की शर्तों के खिलाफ था।

एफआईआर और चार्जशीट की स्थिति

सीबीआई ने विभिन्न सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (आरकॉम), आरएचएफएल, आरसीएफएल और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की हैं। एजेंसी ने 29 मई को आरकॉम मामले में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कंपनी, 5 वरिष्ठ अधिकारियों और 10 बैंक अधिकारियों सहित 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

अब तक की गिरफ्तारियाँ और आगे की जांच

सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप के मामलों में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें देवांग मोदी और रवींद्र सुधालकर भी शामिल हैं। गौरतलब है कि इन मामलों की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में हो रही है, जो इस घोटाले की संवेदनशीलता और व्यापकता को रेखांकित करता है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों में आगे की जांच जारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने किसे और किस मामले में गिरफ्तार किया है?
सीबीआई ने 22 जून 2026 को आरसीएफएल के पूर्व सीईओ देवांग मोदी और आरएचएफएल के पूर्व सीईओ रवींद्र सुधालकर को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी अनिल अंबानी के रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े ₹7,623 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच के तहत हुई है।
₹7,623 करोड़ का यह घोटाला कैसे अंजाम दिया गया?
जांच के अनुसार, आरोपियों ने आरसीएफएल और आरएचएफएल से प्राप्त बैंक ऋण को बिचौलिया कंपनियों के ज़रिए रिलायंस कैपिटल, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर जैसी समूह की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया। यह आरबीआई के नियमों और बैंक ऋण की शर्तों का उल्लंघन था।
इस मामले में कितने बैंकों को नुकसान हुआ है?
आरसीएफएल मामले में 13 सरकारी बैंकों को ₹4,097 करोड़ और आरएचएफएल मामले में 10 सरकारी बैंकों को ₹3,526 करोड़ का नुकसान हुआ, यानी कुल 23 सरकारी बैंकों को ₹7,623 करोड़ की चपत लगी।
सीबीआई ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के खिलाफ 7 एफआईआर दर्ज की हैं और अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। 29 मई को आरकॉम मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
क्या इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय की कोई भूमिका है?
हाँ, सर्वोच्च न्यायालय इन मामलों की जांच की निगरानी कर रहा है। यह इस घोटाले की गंभीरता और व्यापकता को रेखांकित करता है। जांच एजेंसी ने बताया है कि सभी मामलों में आगे की जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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