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सीबीआई ने अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल पर दर्ज की FIR, ईपीएफओ के ₹1,816 करोड़ के निवेश घोटाले का मामला

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सीबीआई ने अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल पर दर्ज की FIR, ईपीएफओ के ₹1,816 करोड़ के निवेश घोटाले का मामला

सारांश

सीबीआई ने अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल पर ₹1,816.22 करोड़ के ईपीएफओ निवेश घोटाले में एफआईआर दर्ज की है — करोड़ों कामगारों की भविष्य निधि से जुड़ा यह मामला रिलायंस एडीए समूह के खिलाफ सीबीआई की आठवीं प्राथमिकी है, जो सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 1 अगस्त 2026 को अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के खिलाफ ₹1,816.22 करोड़ के ईपीएफओ निवेश घोटाले में एफआईआर दर्ज की।
ईपीएफओ ने 2013-2014 में रिलायंस कैपिटल के एनसीडी में ₹2,500 करोड़ का निवेश किया था, जिसका कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
कुल नुकसान में ₹1,007.55 करोड़ मूलधन और ₹808.67 करोड़ ब्याज देनदारी शामिल है।
रिलायंस एडीए समूह के खिलाफ यह सीबीआई की आठवीं एफआईआर है; इससे पहले चार चार्जशीट दाखिल और सात गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
सभी मामले सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रहे हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1 अगस्त 2026 को रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, उसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ ₹1,816.22 करोड़ के कथित ईपीएफओ निवेश घोटाले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। यह मामला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की लिखित शिकायत पर आधारित है, जो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

घोटाले की पूरी कहानी

शिकायत के अनुसार, 2013 और 2014 के दौरान रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) जारी किए थे। ईपीएफओ ने चार पोर्टफोलियो प्रबंधकों — जिनमें रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड भी शामिल थी — के माध्यम से इन एनसीडी में ₹2,500 करोड़ का निवेश किया था।

इन एनसीडी की परिपक्वता (मेच्योरिटी) 2023 और 2024 में होनी थी। हालांकि, शिकायत में आरोप है कि आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी लेनदेन किए और निवेश की गई राशि का दुरुपयोग एवं अन्यत्र डायवर्जन किया, जिसके चलते रिलायंस कैपिटल एनसीडी का भुगतान (रिडेम्शन) करने में विफल रही।

कितना हुआ नुकसान

सीबीआई के अनुसार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार के जरिए ईपीएफओ को ₹1,007.55 करोड़ का प्रत्यक्ष नुकसान पहुंचाया गया। इस मूल राशि पर ₹808.67 करोड़ की ब्याज देनदारी जुड़ने से कुल कथित नुकसान ₹1,816.22 करोड़ हो गया। यह रकम करोड़ों कामगारों की भविष्य निधि से जुड़ी है, जो इस घोटाले को विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।

रिलायंस एडीए समूह पर पहले भी दर्ज हैं मामले

सीबीआई ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है जब रिलायंस एडीए समूह की कंपनियाँ उसकी जांच के दायरे में आई हैं। इससे पहले एजेंसी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की शिकायतों पर सात एफआईआर दर्ज कर चुकी है। इन मामलों में अब तक चार चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

जांच की दिशा और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि नई एफआईआर के बाद जांच में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की पहचान की जाएगी — चाहे वे सरकारी अधिकारी हों या निजी व्यक्ति। साथ ही, निवेश की गई राशि के अंतिम उपयोग की भी पड़ताल होगी। गौरतलब है कि रिलायंस एडीए समूह से जुड़े सभी मामले अभी सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रहे हैं। एजेंसी ने इन सभी मामलों में तेज, निष्पक्ष और व्यापक जांच की प्रतिबद्धता जताई है।

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब रिलायंस कैपिटल दिवाला समाधान प्रक्रिया से गुजर रही है। आलोचकों का कहना है कि ईपीएफओ जैसे संस्थागत निवेशकों की सुरक्षा के लिए नियामकीय ढाँचे को और मजबूत करने की जरूरत है। सीबीआई की जांच के नतीजे न केवल रिलायंस एडीए समूह के भविष्य को प्रभावित करेंगे, बल्कि कॉर्पोरेट प्रशासन और सार्वजनिक निधि प्रबंधन पर भी व्यापक असर डाल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ का निवेश कैसे किया, और इसके लिए जवाबदेह कौन है — केवल निजी कंपनी नहीं, बल्कि वे सरकारी अधिकारी भी जिन्हें एफआईआर में 'अज्ञात' रखा गया है। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी जांच की विश्वसनीयता बढ़ाती है, लेकिन जब तक उन अज्ञात अधिकारियों के नाम सामने नहीं आते, जवाबदेही की तस्वीर अधूरी रहेगी।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने रिलायंस कैपिटल पर किस मामले में एफआईआर दर्ज की है?
सीबीआई ने ₹1,816.22 करोड़ के कथित ईपीएफओ निवेश घोटाले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और उसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि 2013-2014 में जारी एनसीडी में ईपीएफओ के ₹2,500 करोड़ के निवेश का कथित तौर पर दुरुपयोग और डायवर्जन किया गया।
ईपीएफओ को कितना नुकसान हुआ और कैसे?
ईपीएफओ को कुल ₹1,816.22 करोड़ का कथित नुकसान हुआ — इसमें ₹1,007.55 करोड़ मूलधन की हानि और ₹808.67 करोड़ की ब्याज देनदारी शामिल है। रिलायंस कैपिटल के एनसीडी 2023-2024 में परिपक्व होने थे, लेकिन कथित फर्जी लेनदेन के कारण कंपनी भुगतान नहीं कर सकी।
क्या अनिल अंबानी पर पहले भी सीबीआई के मामले हैं?
हाँ, रिलायंस एडीए समूह की विभिन्न कंपनियों के खिलाफ सीबीआई पहले से सात एफआईआर दर्ज कर चुकी है, जिनमें आरकॉम, आरएचएफएल, आरसीएफएल और आरटीएल शामिल हैं। इन मामलों में चार चार्जशीट दाखिल और सात गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं, और सभी मामले सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में हैं।
इस मामले की जांच कहाँ तक पहुँची है?
सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में सभी संदिग्धों — सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों दोनों — की भूमिका की पहचान की जाएगी और निवेश राशि के अंतिम उपयोग का पता लगाया जाएगा। यह मामला भी सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में रहेगा।
ईपीएफओ के निवेश घोटाले का आम कामगारों पर क्या असर पड़ेगा?
ईपीएफओ करोड़ों संगठित क्षेत्र के कामगारों की भविष्य निधि का प्रबंधन करता है। कथित घोटाले से ₹1,816.22 करोड़ की राशि फँसी है, जो सीधे इस कोष को प्रभावित करती है। हालांकि सरकार ने अभी तक कामगारों की राशि की सुरक्षा पर कोई अलग बयान नहीं दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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