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सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप मामले में आरसीएफएल और आरएचएफएल के पूर्व सीईओ गिरफ्तार, ₹7,623 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

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सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप मामले में आरसीएफएल और आरएचएफएल के पूर्व सीईओ गिरफ्तार, ₹7,623 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

सारांश

सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों को गिरफ्तार किया — आरोप है कि उन्होंने बिचौलिया कंपनियों को अवैध ऋण देकर सार्वजनिक बैंकों को ₹7,623 करोड़ का चूना लगाया और यह रकम समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट की। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही जांच में यह पाँचवीं गिरफ्तारी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 22 जून 2026 को देवांग मोदी (पूर्व सीईओ, आरसीएफएल) और रवींद्र सुधालकर (पूर्व सीईओ, आरएचएफएल) को गिरफ्तार किया।
आरसीएफएल मामले में 13 सार्वजनिक बैंकों को ₹4,097 करोड़ और आरएचएफएल मामले में 10 बैंकों को ₹3,526 करोड़ का नुकसान।
ऋण राशि रिलायंस कैपिटल , रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर में डायवर्ट की गई — कुल नुकसान ₹7,623 करोड़ ।
सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप के मामलों में 7 एफआईआर दर्ज की हैं; जांच की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है।
29 मई को आरकॉम मामले में 16 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल; अब तक कुल 5 गिरफ्तारियाँ ।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच के तहत 22 जून 2026 को दो बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार किया — रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के पूर्व डायरेक्टर एवं सीईओ देवांग मोदी और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं सीईओ रवींद्र सुधालकर। जांच एजेंसी के अनुसार, इन दोनों मामलों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कुल मिलाकर ₹7,623 करोड़ का नुकसान पहुँचाया गया।

मुख्य घटनाक्रम

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि आरसीएफएल मामले में 13 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को ₹4,097 करोड़ का नुकसान हुआ, जबकि आरएचएफएल मामले में 10 बैंकों को ₹3,526 करोड़ की चपत लगी। जांच में यह भी उजागर हुआ कि आरोपियों ने इन कंपनियों द्वारा लिए गए ऋण की राशि को रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड जैसी समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया।

आरोपियों की भूमिका

देवांग मोदी ने अप्रैल 2017 से दिसंबर 2018 तक आरसीएफएल के सीईओ के रूप में कार्य किया। जांच के अनुसार, वे कंपनी के मुख्य निर्णयकर्ता अधिकारी थे और उन्होंने बिचौलिया व माध्यम कंपनियों को ऋण स्वीकृत किए — यह जानते हुए भी कि यह भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की गाइडलाइंस और सार्वजनिक बैंकों से ऋण लेने की मंजूरी शर्तों के विरुद्ध था।

रवींद्र सुधालकर ने 1 अक्टूबर 2016 से 31 मार्च 2022 तक आरएचएफएल के ईडी और सीईओ का पदभार संभाला। जांच के अनुसार, उन्होंने भी बिचौलिया कंपनियों को ऋण दिए, जो कंपनी की ऋण नीतियों, राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) एवं आरबीआई की गाइडलाइंस और सार्वजनिक बैंकों की ऋण शर्तों के खिलाफ था।

सीबीआई की व्यापक जांच

गौरतलब है कि सीबीआई ने विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), आरएचएफएल, आरसीएफएल और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ कुल सात एफआईआर दर्ज की हैं। इन सभी मामलों की जांच की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े वित्तीय विवाद वर्षों से न्यायिक और नियामकीय जाँच के दायरे में हैं। सीबीआई ने आरकॉम मामले में 29 मई को 16 आरोपियों के विरुद्ध अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें कंपनी के पाँच वरिष्ठ अधिकारी और दस बैंक अधिकारी शामिल थे।

अब तक की गिरफ्तारियाँ

सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े मामलों में अब तक कुल 5 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें देवांग मोदी और रवींद्र सुधालकर शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को बैंकों को हुए नुकसान के बराबर ही अनुचित लाभ पहुँचाया गया।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही यह जांच आगे और गिरफ्तारियों और चार्जशीट की संभावना को खुला रखती है। बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का परिणाम एनबीएफसी क्षेत्र में ऋण प्रशासन और नियामकीय अनुपालन के मानकों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या ₹7,623 करोड़ की वसूली संभव हो पाती है — जो अब तक के एनबीएफसी घोटालों में दुर्लभ रही है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने रिलायंस एडीए ग्रुप मामले में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने आरसीएफएल के पूर्व सीईओ देवांग मोदी और आरएचएफएल के पूर्व सीईओ रवींद्र सुधालकर को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन्होंने बिचौलिया कंपनियों को नियमों के विरुद्ध ऋण देकर सार्वजनिक बैंकों को ₹7,623 करोड़ का नुकसान पहुँचाया और यह राशि रिलायंस एडीए समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट की।
आरसीएफएल और आरएचएफएल मामलों में बैंकों को कितना नुकसान हुआ?
आरसीएफएल मामले में 13 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ₹4,097 करोड़ और आरएचएफएल मामले में 10 बैंकों को ₹3,526 करोड़ का नुकसान हुआ। दोनों मामलों में कुल नुकसान ₹7,623 करोड़ बताया गया है।
रिलायंस एडीए ग्रुप के खिलाफ सीबीआई की जांच की निगरानी कौन कर रहा है?
इन मामलों की जांच की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है। सीबीआई ने विभिन्न सार्वजनिक बैंकों और एलआईसी की शिकायतों के आधार पर रिलायंस एडीए समूह की चार कंपनियों के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की हैं।
रिलायंस एडीए ग्रुप मामले में अब तक कितनी गिरफ्तारियाँ हुई हैं और चार्जशीट की स्थिति क्या है?
सीबीआई ने अब तक इन मामलों में कुल 5 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। आरकॉम मामले में 29 मई को 16 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें कंपनी के पाँच वरिष्ठ अधिकारी और दस बैंक अधिकारी शामिल हैं।
देवांग मोदी और रवींद्र सुधालकर ने किन पदों पर और कब तक काम किया?
देवांग मोदी ने अप्रैल 2017 से दिसंबर 2018 तक आरसीएफएल के सीईओ के रूप में कार्य किया, जबकि रवींद्र सुधालकर ने 1 अक्टूबर 2016 से 31 मार्च 2022 तक आरएचएफएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ का पद संभाला। जांच के अनुसार दोनों अपनी-अपनी कंपनियों में मुख्य निर्णयकर्ता अधिकारी थे।
राष्ट्र प्रेस
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