दिल्ली अदालत ने अनिल अंबानी के पूर्व सहयोगियों को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 5 दिन की ईडी हिरासत में भेजा
सारांश
Key Takeaways
- अनिल अंबानी के पूर्व सहयोगियों की गिरफ्तारी से रिलायंस ग्रुप की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
- ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत 5 दिन की हिरासत दी है।
- आरोपों के अनुसार, इन अधिकारियों ने बैंक लोन के पैसे का दुरुपयोग किया।
- इस मामले में सीबीआई भी शामिल है।
- रिलायंस ग्रुप ने कहा कि दोनों अधिकारी अब कंपनी के साथ जुड़े नहीं हैं।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को उद्योगपति अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत 5 दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया।
राउज एवेन्यू कोर्ट में पीएमएलए के विशेष जज ने ईडी की कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता को स्वीकार किया। जबकि एजेंसी ने 7 दिन की रिमांड की मांग की थी, अदालत ने 5 दिन की हिरासत प्रदान की।
सूत्रों के अनुसार, झुनझुनवाला और बापना, जो अनिल अंबानी के करीबी माने जाते हैं, को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच में गिरफ्तार किया है। यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज मामलों पर आधारित है।
यह मामला रिलायंस ग्रुप की कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) में कथित वित्तीय गड़बड़ियों से संबंधित है, जिसमें दोनों अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होने का शक है।
झुनझुनवाला पहले रिलायंस ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड में उपाध्यक्ष और निदेशक भी थे। सूत्रों के अनुसार, उस दौरान आरएचएफएल और आरसीएफएल के कामकाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
वहीं, बापना रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और आरएचएफएल के निदेशक रह चुके हैं और उन पर भी वित्तीय फैसलों में शामिल होने का आरोप है।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने दोनों को कथित तौर पर बैंक लोन के पैसे के दुरुपयोग और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया।
इससे पहले इसी महीने सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसमें आरोप है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को 3,750 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
सीबीआई के अनुसार, एलआईसी को कंपनी की वित्तीय स्थिति और निवेश सुरक्षा को लेकर गलत जानकारी देकर 4,500 करोड़ रुपए के निवेश के लिए प्रेरित किया गया था।
एजेंसी ने रिलायंस ग्रुप से जुड़े अन्य बैंक फ्रॉड मामलों की भी जांच की है, जिसमें एसबीआई से जुड़े करीब 2,929.05 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का मामला भी शामिल है।
इस मामले में पहले अनिल अंबानी से भी पूछताछ की जा चुकी है।
इस बीच, रिलायंस ग्रुप ने बयान जारी कर कहा कि झुनझुनवाला और बापना अब कंपनी के साथ जुड़े नहीं हैं और फिलहाल समूह की किसी भी कंपनी में कार्यरत नहीं हैं।
कंपनी के अनुसार, झुनझुनवाला ने दिसंबर 2019 में और बापना ने सितंबर 2019 में समूह छोड़ दिया था और अब उनका रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड सहित किसी भी कंपनी से कोई संबंध नहीं है।