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भारत में महिलाओं के राजनीतिक आरक्षण को मिल रहा व्यापक समर्थन

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भारत में महिलाओं के राजनीतिक आरक्षण को मिल रहा व्यापक समर्थन

सारांश

महिलाओं को राजनीतिक आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संसद में चर्चा आरंभ हो गई है। विभिन्न दलों और संगठनों ने इस विधेयक का स्वागत किया है। यह महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है।
इस अधिनियम का समर्थन विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा किया जा रहा है।
महिलाओं के अधिकारों की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस प्रक्रिया में सभी को आगे आकर समर्थन देना आवश्यक है।
यह कानून महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर प्रदान करेगा।

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में महिलाओं को राजनीतिक आरक्षण देने के लिए एक नई ऊर्जा और समर्थन की लहर देखी जा रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) के कार्यान्वयन को तेज करने के उद्देश्य से संसद के विशेष सत्र में आज से चर्चा आरंभ हुई है। विभिन्न राजनीतिक दलों, महिला संगठनों और प्रमुख व्यक्तियों ने इस विधेयक का स्वागत किया है, यह कहते हुए कि यह महिलाओं को उनका लंबे समय से लंबित हक दिलाएगा।

शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण देश की जिम्मेदारी है। संसद का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि देश की महिलाएं सशक्त हों और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों। जब 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' सर्वसम्मति से पारित हुआ, तो यह पूरे देश की महिलाओं के प्रति एक सामूहिक प्रतिबद्धता थी। उस समय मैं संसद में उपस्थित थी और हमने वादा किया था कि 2029 तक हम महिलाओं के लिए स्थान और अवसर बनाएंगे। आदर्श रूप से, यह कार्य 1947 में ही हो जाना चाहिए था, लेकिन यदि अब भी यह हो रहा है, तो सभी को इसके समर्थन में आगे आना चाहिए।

दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर भाजपा महिला विंग द्वारा महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में आयोजित रैली में भाजपा महिला मोर्चा की सदस्य सुमैरा मीर ने कहा कि पहले सत्ता में रहीं सभी राजनीतिक पार्टियों के पास कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कभी कोई दृष्टिकोण नहीं पेश किया। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी हमेशा एक स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ कार्य करते हैं, जिसे उन्होंने आज साबित किया है। हमारी बहनें इस आरक्षण से बहुत खुश हैं और प्रधानमंत्री मोदी का दिल से धन्यवाद करती हैं।

लोक गायिका उर्मिला श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महिलाओं के प्रति अत्यधिक सम्मान के साथ बोलते हुए सुना। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं को अधिकार देना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका वैध हक है।

लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने इसे एक ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि मेरा मानना है कि यह भारत के लिए वास्तव में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी दिन है। प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के प्रति गहरे सम्मान के साथ बात की और जोर दिया कि महिलाओं को अधिकार देना कोई दान नहीं, बल्कि उनका वैधानिक हक है। यदि उनके अधिकार सुनिश्चित नहीं किए गए, तो यह ‘मातृ शक्ति’ हमें कभी माफ नहीं करेगी।

पद्म श्री से सम्मानित सोमा घोष ने कहा कि पिछले 30 सालों से इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 2010 में यह बिल पास होने ही वाला था, लेकिन अटक गया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाथ जोड़कर विनम्र अपील कर रहे हैं—कृपया इसे राजनीतिक मुद्दा न मानें। यह महिलाओं के अधिकारों का मामला है।

भाजपा नेता नेहा शालिनी दुआ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बिल 40 साल पहले ही पास हो जाना चाहिए था। अब जब यह पास होने वाला है, तो कई विपक्षी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं ताकि प्रधानमंत्री को श्रेय न मिले।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहटकर ने कहा कि आज का दिन बहुत ही ऐतिहासिक है। हमारे देश की महिलाएं हमेशा से नेतृत्व करती आई हैं।

हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने कहा कि इतिहास में यह याद रखा जाएगा कि ठीक इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसे आधिकारिक मंजूरी दी और बेटियों के लिए रेड कार्पेट की तरह रास्ता खुल गया।

उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने मुस्लिम महिलाओं के अलग आरक्षण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह मुस्लिम महिलाओं को ही क्यों दिया जाना चाहिए? महिलाओं का कोई धर्म नहीं होता, कोई जाति नहीं होती। आधी आबादी की ओर से मैं प्रधानमंत्री का गहरा आभार व्यक्त करती हूं।

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बार-बार धन्यवाद करना चाहती हूं, जिन्होंने अपने दृढ़ प्रयासों से नारी शक्ति अधिनियम को चर्चा का विषय बनाया और इसे पारित करवाने के लिए भरसक प्रयास किए। हर महिला, चाहे भाजपा की विचारधारा से जुड़ी हो या नहीं, उनका आभार व्यक्त करती है। यह विधेयक महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं का यह सामूहिक स्वर स्पष्ट दर्शाता है कि अब समय आ गया है कि राजनीति के दरवाजे महिलाओं के लिए पूरी तरह खोल दिए जाएं। यह न केवल लोकतंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि देश के समग्र विकास में ‘नारी शक्ति’ की भागीदारी को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

आरती बसारिया ने कहा कि यह बहुत जरूरी है। हमें यह बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। हमारे समाज में 50 प्रतिशत महिलाएं हैं, लेकिन हम केवल 33 प्रतिशत तक ही पहुंच पा रही हैं।

शिल्पी अरोड़ा ने कहा कि हम आधी आबादी हैं। जब तक हमारी आवाज सबसे ऊंचे स्तर तक नहीं पहुंचेगी, चाहे विधानसभा हो, लोकसभा हो या राज्यसभा, महिलाओं के खिलाफ अपराध कम नहीं होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह राजनीतिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी को भी सुनिश्चित करता है। यह एक ऐसा समय है जब सभी को इस पहल का समर्थन करना चाहिए।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
यह अधिनियम महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है।
इस अधिनियम का समर्थन कौन कर रहा है?
विभिन्न राजनीतिक दल, महिला संगठन और समाज के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं।
क्या यह कानून महिलाओं के लिए अवसर प्रदान करेगा?
हां, यह कानून महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर प्रदान करेगा और उनके सशक्तिकरण में मदद करेगा।
इस विधेयक का पारित होना कब हुआ?
यह विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुआ।
महिलाओं के लिए आरक्षण क्यों जरूरी है?
महिलाओं का राजनीतिक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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