राष्ट्रपति मुर्मु का सेवाग्राम आश्रम दौरा: सादगी और जिज्ञासा से प्रभावित हुए लोग
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रपति मुर्मु ने सेवाग्राम आश्रम का दौरा किया।
- महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
- परिसर में गहरी रुचि दिखाई।
- स्थानीय लोगों ने उनकी सादगी की प्रशंसा की।
- अहिंसा के सिद्धांत का पालन किया गया।
वर्धा, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित प्रसिद्ध सेवाग्राम आश्रम का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के निवास 'बापू कुटी, बा कुटी और आदि निवास' का अवलोकन किया।
उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की, आश्रम का भ्रमण किया और हर स्थान के ऐतिहासिक महत्व के प्रति गहरी रुचि दिखाई।
राष्ट्रपति ने प्रार्थना सभा में भाग लिया, पर्यावरण संरक्षण के लिए एक पौधा रोपा और पारंपरिक तरीके से सूत कातने में भी भागीदारी की।
उनके साथ राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, संरक्षक मंत्री डॉ. पंकज भोयर और कलेक्टर वनमाथी सी. जैसे अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
राष्ट्रपति के इस दौरे से आश्रम के निवासी अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने राष्ट्रपति की सादगी और हर चीज को ध्यानपूर्वक समझने की आदत की प्रशंसा की। महात्मा गांधी के दैनिक जीवन से जुड़े संरक्षित सामान को देखते समय राष्ट्रपति मुर्मु की नजर एक कोने में रखे बड़े चिमटे पर गई, जिस पर जिज्ञासा के चलते उन्होंने प्रश्न किया।
आश्रम के अधिकारियों ने बताया कि गांधीजी के समय में इस क्षेत्र में अक्सर सांप दिखाई देते थे, लेकिन गांधीजी ने निर्देश दिए थे कि किसी भी सांप को मारा नहीं जाएगा। इसके बजाय, स्वयंसेवक इन चिमटों की सहायता से सांपों को सुरक्षित पकड़कर टोकरी में रखते थे और पास के जंगल में छोड़ देते थे। यह अहिंसा के सिद्धांत का एक उदाहरण था।
राष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक जानकारी की सराहना की। आमतौर पर बड़े पदों पर बैठे लोग जल्दी-जल्दी दौरा कर निकल जाते हैं, लेकिन राष्ट्रपति मुर्मु ने आश्रम में लगे हर बोर्ड और जानकारी को ध्यान से पढ़ा।
आश्रम के सदस्य विजय तांबे ने बताया, ''आमतौर पर बड़े मेहमानों के पास समय कम होता है, लेकिन राष्ट्रपति ने हर जानकारी को पढ़ा।''
सम्मान के तौर पर राष्ट्रपति ने हर कुटिया में प्रवेश करने से पहले अपने जूते उतारे और आश्रम द्वारा दिए गए बांस के चप्पल पहने।
उन्होंने ‘हॉटलाइन फोन’ में भी खास दिलचस्पी दिखाई, जिसका प्रयोग कभी बापू किया करते थे।
आश्रम की परंपरा के अनुसार वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। पौधा पहले से तैयार था, लेकिन राष्ट्रपति ने आते ही उसे पहचान लिया और कहा, ''यह बेल का पेड़ है, है न? यह बहुत उपयोगी होता है।'' उनकी इस पहचान से वहां मौजूद लोग प्रभावित हुए।
राष्ट्रपति मुर्मु ने आश्रम के शांत और स्वच्छ वातावरण की सराहना की और चरखे पर सूत कातने का प्रयास किया।
जाने से पहले उन्होंने परिसर की देखभाल के लिए स्टाफ की तारीफ की और कहा, ''आपने इस जगह को बहुत अच्छी तरह संभाल कर रखा है, इसे ऐसे ही बनाए रखें।''
उन्होंने कुटियों पर लगे पुराने मिट्टी के खपरैल (कवेलू) को देखकर भी आश्चर्य व्यक्त किया, जो आज भी सुरक्षित हैं।