बड़ा फैसला: आई-पैक सह-संस्थापक विनेश चंदेल को 7 मई तक न्यायिक हिरासत, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट का आदेश
सारांश
Key Takeaways
- पटियाला हाउस कोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 को विनेश कुमार चंदेल को 7 मई 2025 तक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
- ईडी ने चंदेल को 28 मार्च 2025 को कथित कोयला चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था।
- कंपनी के खातों में ₹13.50 करोड़ बिना किसी ठोस अनुबंध के 'बिना ब्याज के कर्ज' के रूप में दर्ज किए गए।
- ईडी ने फर्जी बिल, हवाला लेनदेन और डिजिटल साक्ष्य नष्ट करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
- जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2025 को पटियाला हाउस कोर्ट में होगी।
- बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित बताते हुए पीएमएलए के तहत अपराध न बनने का तर्क दिया।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2025: कथित कोयला चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार को इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के सह-संस्थापक विनेश कुमार चंदेल को 7 मई 2025 तक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत समाप्त होने के तुरंत बाद यह आदेश जारी किया गया।
कोर्ट का आदेश और जमानत याचिका
पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने 23 अप्रैल को यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने चंदेल की जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस जारी करते हुए एजेंसी से जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2025 को निर्धारित की गई है।
इससे पहले 14 अप्रैल को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बर्नाला टंडन ने चंदेल को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेजा था। उन्हें देर रात अदालत में पेश किया गया था और सुनवाई मध्यरात्रि तक चली थी।
गिरफ्तारी और मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने विनेश कुमार चंदेल को 28 मार्च 2025 को दर्ज ईसीआईआर के तहत गिरफ्तार किया था। यह मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें एम/एस इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, खातों में हेरफेर और गैर-हिसाबी धन के उपयोग के गंभीर आरोप हैं।
ईडी की रिमांड अर्जी के अनुसार, चंदेल कथित अपराध से जुड़े धन के लेनदेन में सक्रिय भागीदार थे और अवैध धन को उत्पन्न करने, छिपाने और वैध बनाने की प्रक्रिया में उनकी केंद्रीय भूमिका थी।
ईडी के प्रमुख आरोप
एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने भुगतान के लिए बैंकिंग और नकद दोनों माध्यमों का उपयोग किया। कुछ भुगतान '50 प्रतिशत चेक' के रूप में किए गए, जो यह दर्शाता है कि रकम को विभिन्न हिस्सों में विभाजित कर लिया गया। ईडी का दावा है कि इन राशियों का उपयोग चुनावी खर्च और जनमत प्रभावित करने जैसे कार्यों में किया गया।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के खातों में ₹13.50 करोड़ बिना किसी ठोस अनुबंध के 'बिना ब्याज के कर्ज' के रूप में दर्शाए गए, जो कथित तौर पर एम/एस रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त किए गए थे।
इसके अलावा, ईडी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने फर्जी बिलों के माध्यम से लेनदेन को वैध दिखाने की कोशिश की, जबकि वास्तव में कोई सेवा प्रदान नहीं की गई। साथ ही हवाला चैनलों के जरिए भी गैर-हिसाबी धन का प्रवाह हुआ।
सबूत मिटाने का आरोप और बचाव पक्ष का तर्क
ईडी का गंभीर आरोप है कि चंदेल ने जांच के दौरान भ्रामक बयान दिए और अन्य निदेशकों के साथ मिलकर छापेमारी के बाद ईमेल और वित्तीय डेटा नष्ट करने के निर्देश दिए, जिससे साक्ष्य मिटाए जा सकें।
वहीं, चंदेल के अधिवक्ता ने ईडी की हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि यह गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की गई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस मामले में पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के अंतर्गत कोई ठोस अपराध नहीं बनता।
व्यापक संदर्भ और राजनीतिक निहितार्थ
गौरतलब है कि आई-पैक एक प्रमुख राजनीतिक परामर्श संस्था रही है जिसने कई राज्यों के चुनावों में विभिन्न दलों को रणनीतिक सेवाएं दी हैं। ऐसे में इस मामले की आंच केवल व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित नहीं है — यह राजनीतिक फंडिंग की अपारदर्शिता और चुनावी प्रबंधन कंपनियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठाती है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ईडी पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक संगठनों से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच में सक्रियता बढ़ा रही है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाइयों का समय अक्सर चुनावी कैलेंडर से मेल खाता है, जो जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2025 को होगी, जिसमें ईडी का जवाब आने के बाद जमानत याचिका पर निर्णय की दिशा स्पष्ट होगी।