सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार: दिल्ली एसीबी की एसटीपी टेंडर घोटाले में बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने 18 अगस्त 2026 को दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) टेंडर में कथित अनियमितताओं के मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली के पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन भी शामिल हैं, जो इससे पहले भी कानूनी विवादों में रह चुके हैं।
कौन-कौन हुए गिरफ्तार
एसीबी ने मंगलवार को जिन 6 आरोपियों को हिरासत में लिया, उनमें शामिल हैं: जीएनसीटीडी के पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन; डीजेबी के पूर्व सीईओ (आईएएस) उदित प्रकाश राय; डीजेबी के पूर्व कॉन्ट्रैक्टुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव; मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव; मेसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा; तथा मेसर्स सृजनहार के मालिक पंकज वर्मा।
यह कार्रवाई एफआईआर नंबर 10/2024 के तहत की गई है। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7/7ए/9/13 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420/409/418/120-बी के अंतर्गत दर्ज है।
टेंडर में कैसे हुई कथित धाँधली
जाँच में सामने आया है कि डीजेबी के एसटीपी प्लांट्स को अपग्रेड करने के टेंडर की तकनीकी शर्तें कथित तौर पर इस प्रकार तैयार की गईं कि वे मेसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में जाएं। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित पायलट स्टडी नहीं कराई गई, ट्रीटेड पानी के ज़रूरी पैरामीटर हटा दिए गए और तकनीक व मीडिया से जुड़ी सीमित करने वाली शर्तें जोड़ी गईं।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से पता चला है कि टेंडर की शर्तें, शुद्धिपत्र और अन्य दस्तावेज निजी व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के बीच पहले से साझा किए गए थे, जिन्हें बाद में डीजेबी के आधिकारिक टेंडर नोटिस में शामिल किया गया। एसीबी का आरोप है कि इन बदलावों से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा और प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई।
मनी ट्रेल: कैसे हुआ पैसे का लेन-देन
एसीबी की वित्तीय जाँच में एक कथित मनी ट्रेल उजागर हुई है। जाँच के अनुसार, मेसर्स यूरोटेक से धनराशि पहले मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज में भेजी गई। इसके बाद आरोपी नागेंद्र यादव की प्रोपराइटरशिप फर्म के ज़रिये डीजेबी के तत्कालीन सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में ₹1.52 करोड़ ट्रांसफर किए गए। जाँच एजेंसी का दावा है कि इस रकम का उपयोग अचल संपत्ति खरीदने में किया गया।
गौरतलब है कि मेसर्स सृजनहार और मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज को कथित तौर पर मध्यस्थ कंपनियों के रूप में इस्तेमाल कर कमीशन और रिश्वत का लेन-देन किया गया। जाँच में यह भी सामने आया कि राजा कुमार कुर्रा, नागेंद्र यादव और अंकित श्रीवास्तव के बीच एसटीपी टेंडर की शर्तों को लेकर लगातार संपर्क था।
शिकायत का स्रोत और कानूनी आधार
यह शिकायत जीएनसीटीडी के सतर्कता निदेशालय की ओर से एसीबी को मिली थी। यह मामला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में सार्वजनिक उपक्रमों में पारदर्शिता को लेकर बहस पहले से तेज़ है। एसटीपी अपग्रेड प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपए का सरकारी निवेश प्रस्तावित था, जिसे कथित तौर पर एक खास कंपनी के पक्ष में मोड़ा गया।
आगे क्या होगा
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, सभी 6 आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है और अपराध से अर्जित संपत्ति की गहन जाँच की जा रही है। आगे की कानूनी कार्रवाई पूछताछ के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। यह मामला दिल्ली की राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज़ से एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।