राजस्थान: पूर्व मंत्री महेश जोशी ₹960 करोड़ जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार, एसीबी ने सुबह 5 बजे दबोचा

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राजस्थान: पूर्व मंत्री महेश जोशी ₹960 करोड़ जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार, एसीबी ने सुबह 5 बजे दबोचा

सारांश

राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को एसीबी ने ₹960 करोड़ के जल जीवन मिशन टेंडर घोटाले में गिरफ्तार किया। यह उनकी दूसरी गिरफ्तारी है — ईडी ने अप्रैल 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग में पकड़ा था। 22 अधिकारियों पर एफआईआर, 10 गिरफ्तार, और जाँच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

एसीबी ने 7 मई को सुबह 5 बजे जयपुर की सैन कॉलोनी से पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया।
मामला ₹960 करोड़ के कथित जल जीवन मिशन टेंडर घोटाले से जुड़ा है — श्री गणपति ट्यूबवेल को ₹859.20 करोड़ और श्री श्याम ट्यूबवेल को ₹120.25 करोड़ के ठेके मिले।
ईडी ने अप्रैल 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जोशी को गिरफ्तार किया था; दिसंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली थी।
पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल सहित 22 अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज; 10 आरोपी गिरफ्तार , 3 फरार ।
जाँचकर्ताओं को ईमेल ट्रेल में डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे ठेकेदारों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत उजागर हुई है।

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार, 7 मई की सुबह जयपुर में राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को ₹960 करोड़ के कथित जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार कर लिया। एसीबी डीआईजी रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में एसआईटी की टीम सुबह करीब 5 बजे जयपुर की सैन कॉलोनी स्थित जोशी के आवास पर पहुँची और भ्रष्टाचार तथा पद के दुरुपयोग के आरोपों के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया। इस कार्रवाई को एसीबी की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच एजेंसियों के अनुसार, श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल नाम की दो कंपनियों ने कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर जल जीवन मिशन के टेंडर हासिल किए। ये प्रमाण पत्र कथित रूप से इरकॉन इंटरनेशनल के नाम पर जारी किए गए थे। जाँच के अनुसार, श्री गणपति ट्यूबवेल को ₹859.20 करोड़ के ठेके मिले, जबकि श्री श्याम ट्यूबवेल ने ₹120.25 करोड़ के टेंडर कथित फर्जी तरीके से हासिल किए।

एसीबी को संदेह है कि महेश जोशी ने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए ठेके दिलाने के बदले रिश्वत ली। जाँचकर्ताओं को ईमेल ट्रेल की जाँच में अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत का खुलासा हुआ है।

पूर्व गिरफ्तारी और कानूनी पृष्ठभूमि

यह पहली बार नहीं है जब महेश जोशी कानूनी शिकंजे में आए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अप्रैल 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था। वह करीब सात महीने जेल में रहे और दिसंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद रिहा हुए थे। ताज़ा गिरफ्तारी एसीबी द्वारा दर्ज एक अलग भ्रष्टाचार मामले में हुई है।

गौरतलब है कि यह मामला पहली बार जून 2023 में राजनीतिक सुर्खियों में आया था, जब वरिष्ठ नेता किरोड़ी लाल मीणा ने अशोक नगर थाने के बाहर धरना देकर एफआईआर दर्ज करने की माँग की थी। इसके बाद यह मुद्दा राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया।

जाँच का दायरा और आरोपी

इस जाँच के दायरे में कई वरिष्ठ अधिकारी भी आ चुके हैं। पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। वित्तीय सलाहकारों, मुख्य अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं समेत 22 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 2024 से शुरू हुई जाँच में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।

जल जीवन मिशन क्या है

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य देश के हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुँचाना है। इस मिशन के तहत जारी टेंडरों में कथित गड़बड़ी ने इस योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार, महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद एसीबी जाँच और तेज कर सकती है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ तथा मुख्य आरोपियों के साथ आमने-सामने पूछताछ होने की संभावना है। यह मामला राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही की दृष्टि से एक निर्णायक मोड़ पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और केंद्र की निगरानी तंत्र कहाँ चूका। डिजिटल साक्ष्य और ईमेल ट्रेल की मौजूदगी जाँच को मजबूत बनाती है, पर तीन आरोपियों का फरार रहना प्रक्रियागत कमज़ोरी की ओर इशारा करता है। यदि यह मामला अदालत में टिकता है, तो यह भविष्य के सरकारी टेंडर आवंटन में पारदर्शिता की माँग को और बल देगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महेश जोशी को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को एसीबी ने ₹960 करोड़ के कथित जल जीवन मिशन टेंडर घोटाले में 7 मई को गिरफ्तार किया। उन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप हैं।
जल जीवन मिशन घोटाले में कितनी राशि का कथित फर्जीवाड़ा हुआ?
जाँच एजेंसियों के अनुसार कुल ₹960 करोड़ से अधिक के टेंडर कथित फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर हासिल किए गए — जिनमें श्री गणपति ट्यूबवेल को ₹859.20 करोड़ और श्री श्याम ट्यूबवेल को ₹120.25 करोड़ के ठेके मिले।
क्या महेश जोशी पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं?
हाँ, ईडी ने अप्रैल 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महेश जोशी को गिरफ्तार किया था। वह करीब सात महीने जेल में रहे और दिसंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली थी। ताज़ा गिरफ्तारी एसीबी का एक अलग भ्रष्टाचार मामला है।
इस घोटाले में कितने अधिकारी आरोपी हैं?
अब तक 22 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें वित्तीय सलाहकार, मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता शामिल हैं। पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
आगे इस मामले में क्या होने की संभावना है?
अधिकारियों के अनुसार एसीबी जाँच और तेज होगी तथा आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। तीन आरोपी अभी फरार हैं और मुख्य आरोपियों के साथ आमने-सामने पूछताछ की भी संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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