महेश जोशी 11 मई तक एसीबी हिरासत में, जल जीवन मिशन में ₹20,000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप

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महेश जोशी 11 मई तक एसीबी हिरासत में, जल जीवन मिशन में ₹20,000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप

सारांश

राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन में ₹20,000 करोड़ के कथित टेंडर घोटाले में एसीबी ने गिरफ्तार किया। जाली प्रमाण पत्रों से ₹960 करोड़ की निविदाएं हासिल करने का आरोप है। मामले में 11 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं और तीन आरोपी अभी भी फरार हैं।

मुख्य बातें

राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को 7 मई 2026 को जयपुर से गिरफ्तार कर 11 मई 2026 तक एसीबी हिरासत में भेजा गया।
मामला जल जीवन मिशन में कथित रूप से लगभग ₹20,000 करोड़ के टेंडरों में भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
दो फर्मों ने इरकॉन इंटरनेशनल के जाली प्रमाण पत्रों से कथित तौर पर ₹960 करोड़ की निविदाएं हासिल कीं।
इस मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार; मुकेश गोयल, जितेंद्र शर्मा और संजीव गुप्ता अभी फरार।
विशेष जांच दल की निगरानी ADG स्मिता श्रीवास्तव और DIG रामेश्वर सिंह कर रहे हैं।
पाँच अन्य आरोपियों को उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है।

राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को 7 मई 2026 को जयपुर स्थित उनके आवास से भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) की विशेष जांच टीम ने गिरफ्तार किया। अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें 11 मई 2026 तक एसीबी की हिरासत में भेज दिया गया। यह गिरफ्तारी 'जल जीवन मिशन' में कथित तौर पर लगभग ₹20,000 करोड़ के टेंडरों में हुए भ्रष्टाचार की जांच के सिलसिले में की गई है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी (मालिक: महेश मित्तल) और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी (मालिक: पद्मचंद जैन) नामक फर्मों ने कथित तौर पर राजस्थान में सरकारी निविदाएं हासिल करने के लिए इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के जाली कार्य पूर्णता प्रमाण पत्रों का उपयोग किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस धोखाधड़ी के ज़रिए इन फर्मों ने कथित तौर पर लगभग ₹960 करोड़ की निविदाएं हासिल कीं।

गौरतलब है कि जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इन फर्मों ने महेश जोशी, पूर्व लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, ठेकेदारों और निजी व्यक्ति संजय बडाया के साथ मिलकर यह साजिश रची।

टेंडर में हेरफेर का तरीका

विशेष जांच दल का दावा है कि ₹50 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के लिए निविदा शर्तों में 'साइट विजिट सर्टिफिकेट' जानबूझकर शामिल किए गए थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह कदम कथित तौर पर बोलीदाताओं की पहचान उजागर करने और 'टेंडर पूलिंग' को सुविधाजनक बनाने के लिए उठाया गया था। इसके परिणामस्वरूप लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा 30 से 40 प्रतिशत तक के असामान्य रूप से उच्च प्रीमियम स्वीकृत किए गए।

अब तक की गिरफ्तारियाँ और फरार आरोपी

इस मामले में अब तक ग्यारह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी सुबोध अग्रवाल, वरिष्ठ इंजीनियर, वित्तीय सलाहकार और लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से जुड़े निजी व्यक्ति शामिल हैं। अदालत ने तीन फरार आरोपियों — मुकेश गोयल, जितेंद्र शर्मा और संजीव गुप्ता — के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं और उन्हें भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, पाँच अन्य आरोपियों को उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिल चुकी है।

जांच की निगरानी

विशेष जांच दल का संचालन अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस उप महानिरीक्षक रामेश्वर सिंह की देखरेख में किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि विस्तृत पूछताछ, साक्ष्य संग्रह और तकनीकी विश्लेषण का काम जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में सरकारी अनुबंधों में अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसियाँ पहले से सक्रिय हैं।

आगे क्या होगा

11 मई 2026 को एसीबी हिरासत की अवधि समाप्त होने पर जोशी को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ जांच की प्रगति के आधार पर आगे की कार्यवाही तय होगी। फरार आरोपियों की तलाश और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ के टेंडरों में 30-40% असामान्य प्रीमियम की स्वीकृति यह दर्शाती है कि अनियमितता किसी एक स्तर पर नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक श्रृंखला में फैली थी। यह भी उल्लेखनीय है कि पाँच आरोपियों को उच्च न्यायालय से सुरक्षा मिल चुकी है, जो मामले की कानूनी जटिलता को रेखांकित करता है। बिना त्वरित न्यायिक निष्कर्ष के, ऐसे हाई-प्रोफाइल मामले अक्सर वर्षों तक अदालतों में उलझे रहते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महेश जोशी को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार के मामले में 7 मई 2026 को जयपुर से गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ मिलकर लगभग ₹20,000 करोड़ के टेंडरों में धाँधली की।
एसीबी हिरासत में महेश जोशी को कब तक रखा जाएगा?
अदालत ने महेश जोशी को 11 मई 2026 तक एसीबी की हिरासत में भेजा है। इस दौरान विशेष जांच दल उनसे विस्तृत पूछताछ करेगी और साक्ष्य संग्रह जारी रहेगा।
जल जीवन मिशन घोटाले में कितनी रकम का आरोप है?
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस मामले में लगभग ₹20,000 करोड़ के टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार हुआ। इसके अलावा, दो फर्मों ने जाली प्रमाण पत्रों के ज़रिए कथित तौर पर ₹960 करोड़ की निविदाएं हासिल कीं।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हो चुके हैं?
इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सेवानिवृत्त IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल भी शामिल हैं। तीन आरोपी — मुकेश गोयल, जितेंद्र शर्मा और संजीव गुप्ता — अभी भी फरार हैं और उनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी है।
इरकॉन इंटरनेशनल का इस मामले में क्या संबंध है?
जांच के अनुसार, दो ठेकेदार फर्मों ने सरकारी निविदाएं हासिल करने के लिए इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के जाली कार्य पूर्णता प्रमाण पत्रों का उपयोग किया। इरकॉन स्वयं इस साजिश में शामिल नहीं बताई गई है, बल्कि उसके दस्तावेज़ों की जालसाजी का आरोप है।
राष्ट्र प्रेस
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