जल जीवन मिशन घोटाले में चार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, पूर्व आईएएस भी शामिल
सारांश
Key Takeaways
- जल जीवन मिशन घोटाले में चार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी।
- एसीबी की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में हैं।
- पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल भी आरोपी हैं।
- इस मामले में आगे की जांच जारी है।
- भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
जयपुर, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की अदालत ने शुक्रवार को जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले के संबंध में चार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए।
कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में एसीबी की टीमें विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं ताकि आरोपियों, जिनमें पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल भी शामिल हैं, को पकड़ा जा सके।
एसीबी के अनुसार, यह आदेश शुक्रवार को एसीबी कोर्ट में २०२४ में दर्ज जेजेएम मामले के सिलसिले में जारी किए गए थे। कोर्ट ने पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल, जितेंद्र शर्मा, संजीव गुप्ता और मुकेश गोयल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए एसीबी ने इन चारों आरोपियों को पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए हैं। ये सभी आरोपी इस समय फरार हैं। भ्रष्टाचार-रोधी संस्था की टीमें उन संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं, जहां आरोपियों के छिपे होने की संभावना है।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों का पता लगाने और उन्हें शीघ्र गिरफ्तार करने के लिए ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। एसीबी ने यह भी कहा कि यदि गिरफ्तारी वारंट पर अमल नहीं होता है और आरोपी गिरफ्तारी से बचते हैं, तो ब्यूरो उनके संपत्तियों को जब्त करने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा। ऐसी कार्रवाई अदालत से आवश्यक आदेश मिलने के बाद ही की जाएगी।
यह मामला जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत किए गए कामों में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। यह एक महत्वपूर्ण योजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण घरों तक नल से पानी का कनेक्शन पहुंचाना है। इससे पहले, एसीबी ने जांच के सिलसिले में एक बड़ा ऑपरेशन चलाया था और कई राज्यों में १५ जगहों पर एक साथ छापे मारे थे।
इन स्थानों में राजस्थान के जयपुर, बाड़मेर, जालोर और सीकर के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली की कुछ जगहें भी शामिल थीं।
जांच के दौरान, एसीबी को कथित तौर पर ऐसे सबूत मिले हैं जो दर्शाते हैं कि जेजेएम प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन में फर्जी बिल बनाए गए, वित्तीय अनियमितताएं हुईं और प्रक्रियागत खामियां पाई गईं।
अधिकारियों ने बताया कि आगे की जांच के लिए तलाशी के दौरान संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। एसीबी अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस मामले में जांच अभी भी जारी है। टीमें लगातार सबूत जुटा रही हैं और आरोपियों को पकड़ने के लिए प्रयासरत हैं। इस मामले में आगे की कार्रवाई चल रही जांच के नतीजों के आधार पर की जाएगी।