राजस्थान: जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी

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राजस्थान: जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी

सारांश

राजस्थान के जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी ने गिरफ्तार किया। जानिए इस मामले के पीछे की पूरी कहानी और क्या है घोटाले की प्रकृति।

Key Takeaways

  • जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।
  • सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी से घोटाले में शामिल अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
  • एसीबी ने गंभीर अनियमितताओं की पहचान की है।
  • फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर ठेके प्राप्त किए गए थे।
  • 900 करोड़ रुपए के ठेके कुछ चुनिंदा कंपनियों को दिए गए थे।

जयपुर, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले के संदर्भ में फरार चल रहे पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार किया है।

एसीबी की टीम ने सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से जयपुर लाया, जहां एसीबी मुख्यालय में डीआईजी ओम प्रकाश मीणा ने उनसे पूछताछ की।

इससे पहले जल जीवन मिशन घोटाले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।

इसी मामले में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के नौ अधिकारियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

एसीबी के महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि 2024 में शुरू हुई जांच में अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, जबकि तीन अन्य अभी भी फरार हैं।

एसीबी के अनुसार, इस घोटाले में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल जैसी कंपनियों ने कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर ठेके प्राप्त किए।

अधिकारियों को इन गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 900 करोड़ रुपए के टेंडर कुछ चुनिंदा कंपनियों को आवंटित किए गए।

इसके अलावा, 50 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स के लिए अनिवार्य साइट निरीक्षण भी नहीं किया गया, जो पद के दुरुपयोग को दर्शाता है।

17 फरवरी को एसीबी ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान के जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर समेत बिहार, झारखंड और दिल्ली में 15 स्थानों पर छापेमारी की थी।

जांच में फर्जी बिलिंग, वित्तीय गड़बड़ियां और टेंडर प्रक्रिया में गंभीर नियमों का उल्लंघन सामने आया।

उसी दिन अग्रवाल के ठिकाने पर भी छापा मारा गया, जिसमें पीएचईडी के नौ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।

उनके खिलाफ 18 फरवरी को लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था, जिसके बाद वे कई हफ्तों तक फरार रहे और अब जाकर गिरफ्तार हुए हैं।

बताया गया है कि सुबोध अग्रवाल उस समय पीएचईडी में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे, जब यह कथित घोटाला हुआ।

एसीबी के अनुसार, अग्रवाल और अन्य आरोपियों ने लगभग 960 करोड़ रुपए के फर्जी कंप्लीशन सर्टिफिकेट जमा कर ठेके हासिल किए, जिससे करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है।

फरवरी 2026 में एसीबी ने इस मामले में वरिष्ठ इंजीनियरों और सेवानिवृत्त अधिकारियों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया था।

ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार ने 2019 में जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत की थी, जिसका लक्ष्य हर ग्रामीण घर तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।

Point of View

ताकि भविष्य में ऐसे घोटाले न हों।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

जल जीवन मिशन घोटाला क्या है?
यह घोटाला जल जीवन मिशन के तहत ठेके प्राप्त करने में अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है।
सुबोध अग्रवाल को कब गिरफ्तार किया गया?
सुबोध अग्रवाल को 9 अप्रैल को एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार किया।
इस घोटाले में और कौन-कौन आरोपी हैं?
इस घोटाले में कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें कई अधिकारी शामिल हैं।
घोटाले का मुख्य कारण क्या है?
घोटाले का मुख्य कारण फर्जी प्रमाणपत्रों के माध्यम से ठेके प्राप्त करना है।
जल जीवन मिशन का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।
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