दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर भाजपा बोली — यमुना सफाई के नाम पर जनता से छल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 19 अगस्त को राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित घोटाले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस कार्रवाई को यमुना सफाई के नाम पर जनता के साथ हुए कथित विश्वासघात का प्रमाण बताया, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने भी AAP सरकार पर अनियमितताओं के आरोप लगाए।
भाजपा का आरोप: टेंडर में हेरफेर कर खास कंपनी को फायदा
दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस मामले को सीधे अरविंद केजरीवाल से जोड़ते हुए कहा कि यह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) घोटाला बेहद गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 में निकाले गए टेंडर में जानबूझकर ऐसी शर्तें जोड़ी गईं ताकि एक खास कंपनी — यूरोटेक — को लाभ पहुँचाया जा सके। सचदेवा के अनुसार, 'टेंडर की शर्तों में हेरफेर की गई और वह टेंडर उस कंपनी को दे दिया गया।'
सचदेवा ने यह भी कहा कि पिछले 10 वर्षों में केजरीवाल ने दिल्लीवासियों के साथ जो छल किया है, यह गिरफ्तारी उसी की एक कड़ी है। उन्होंने दावा किया कि जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ेगी, केजरीवाल का नाम भी सामने आएगा।
कांग्रेस का रुख: पहले से थी अनियमितताओं की जानकारी
रचनात्मक कांग्रेस के चेयरपर्सन संदीप दीक्षित ने कहा कि इन टेंडरों में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी उन्हें काफी पहले से थी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के कार्यकाल में यमुना में गिरने वाले नालों पर इंटरसेप्टर लगाने की योजना बनाई गई थी, जिसके तहत दो या तीन बड़े इंटरसेप्टर स्थापित होने थे — जो सीवेज व नालों के गंदे पानी को ट्रीटमेंट के बाद ही यमुना में छोड़ते।
दीक्षित ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने सत्ता में आते ही उन परियोजनाओं को रिटेंडर में डाल दिया। उन्होंने कहा, 'जब सरकार 5 रुपये की चीज को 10 रुपये की करके रिटेंडर करने लगे, तो समझ जाइए कि कुछ न कुछ गड़बड़ है।' उनके अनुसार तकनीकी रूप से उन परियोजनाओं को जारी रहना चाहिए था, लेकिन AAP सरकार ने ऐसा नहीं किया।
कांग्रेस की दूसरी आवाज़: एजेंसियों के दुरुपयोग पर सवाल
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने हालाँकि एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2014 से कई जाँच एजेंसियाँ भाजपा के इशारे पर काम करती दिख रही हैं, जहाँ लोगों को छह-छह महीने जेल में रखा जाता है और बाद में वे अदालत से बरी हो जाते हैं। राजपूत ने स्पष्ट किया कि यदि भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत हैं तो गिरफ्तारी उचित है, लेकिन राजनीतिक प्रतिशोध के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल गलत है।
समाजवादी पार्टी का पलटवार
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने लखनऊ में कहा कि भाजपा प्रतिशोधात्मक राजनीति करती है और सत्ता में आते ही पुरानी सरकारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर देती है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास जनता को देने के लिए खुद कुछ नहीं है।
आगे क्या होगा
यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में है और गिरफ्तार छह लोगों के खिलाफ जाँच जारी है। राजनीतिक दलों के परस्पर विरोधी बयानों के बीच यह देखना अहम होगा कि ACB की जाँच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या अदालत में आरोप टिक पाते हैं। यमुना सफाई — जो दशकों से दिल्ली की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती रही है — एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई है।