एसटीपी घोटाला: सत्येंद्र जैन को राऊज एवेन्यू कोर्ट से जमानत, ₹2 लाख के मुचलके पर रिहाई
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में 3 सितंबर को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिग्विनय सिंह ने ₹2 लाख के मुचलके और इतनी ही राशि की दो ज़मानतें जमा करने की शर्त पर यह राहत दी।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने 18 अगस्त को सत्येंद्र जैन को इस मामले में गिरफ्तार किया था। उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज है। यह मामला मई 2024 में दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें DJB की STP परियोजनाओं के उन्नयन से जुड़े ठेकों में कथित तौर पर टेंडर शर्तों में हेरफेर, आपराधिक साजिश और संदिग्ध रिश्वत भुगतान के आरोप हैं।
बचाव पक्ष की दलीलें
जमानत सुनवाई के दौरान जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि एफआईआर दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद उनके मुवक्किल को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि इस पूरी अवधि में जैन को पूछताछ के लिए केवल एक बार बुलाया गया था और दूसरी बार बुलाए जाने पर सीधे गिरफ्तार कर लिया गया।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मामले से जुड़ी सभी सामग्री दस्तावेजी प्रकृति की है और जाँच एजेंसियाँ पहले ही सभी प्रासंगिक दस्तावेज अपने कब्जे में ले चुकी हैं, इसलिए आरोपी को हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
ACB का विरोध
वहीं, ACB ने जमानत का पुरज़ोर विरोध करते हुए अदालत में दावा किया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं। जाँच एजेंसी ने अनुरोध किया कि जमानत पर निर्णय लेते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाए।
पिछली सुनवाई और अदालत का रुख
गौरतलब है कि 19 अगस्त को अदालत ने जैन की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की माँग ठुकरा दी थी। यह ऐसे समय में आया है जब जैन पहले से ही एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 3 सितंबर के आदेश के बाद अब उन्हें STP घोटाले से जुड़े इस मामले में जमानत मिल गई है।
आगे क्या होगा
जमानत की शर्तों के अनुसार जैन को ₹2 लाख का मुचलका और दो समान राशि की ज़मानतें जमा करनी होंगी। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी और अदालत में आरोपों पर विचार होगा। यह मामला दिल्ली की राजनीति और DJB की कार्यप्रणाली पर जाँच के व्यापक दायरे का हिस्सा बना हुआ है।