सीबीआई-डीआरआई का बड़ा ऑपरेशन: 53 संरक्षित वन्यजीव बरामद, वन्यजीव तस्करी रैकेट के 6 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), मुंबई ने एक संयुक्त ऑपरेशन में वन्यजीव तस्करी के एक अंतर-राज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 53 संरक्षित जानवरों और पक्षियों को बचाया और 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में कई स्थानों पर 7 और 8 जुलाई 2025 को एक साथ अंजाम दी गई।
ऑपरेशन में क्या बरामद हुआ
सीबीआई ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी), मुंबई और कोलकाता की सहायता से इस संयुक्त अभियान में 15 स्लो लोरिस, 2 बिंटुरोंग, 28 स्टार कछुए, 6 इजिप्टियन गिद्ध और 2 शिकरा पक्षी बरामद किए। ये सभी प्रजातियाँ वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत आती हैं, जिन्हें भारत में सर्वोच्च संरक्षण का दर्जा प्राप्त है।
गौरतलब है कि स्लो लोरिस और बिंटुरोंग जैसी विदेशी प्रजातियाँ अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव बाज़ार में भी अत्यधिक मूल्यवान मानी जाती हैं, जो इस रैकेट के संभावित अंतर-राष्ट्रीय आयाम की ओर इशारा करती है।
मामला कैसे सामने आया
यह कार्रवाई डीआरआई मुंबई द्वारा जुटाई गई विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर की गई, जिसमें एक सक्रिय अंतर-राज्यीय अपराध गिरोह की संलिप्तता का पता चला था। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने व्यापार के उद्देश्य से भारत के विभिन्न हिस्सों से ये संरक्षित जानवर और पक्षी हासिल किए थे।
सीबीआई ने इस मामले में 7 और 8 जुलाई को दो अलग-अलग प्राथमिकियाँ दर्ज कीं। मामला वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आपराधिक षड्यंत्र (क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी) के प्रावधानों के अंतर्गत दर्ज किया गया है।
गिरफ्तारियाँ और बचाव अभियान
इस संयुक्त ऑपरेशन में मुंबई से 3 आरोपी और कोलकाता से 3 आरोपी — कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद बरामद वन्यजीव प्रजातियों की सुरक्षित देखभाल के लिए उन्हें महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के वन विभागों को सौंप दिया गया है।
एजेंसियों के बीच सहयोग का संदेश
यह ऑपरेशन वन्यजीव तस्करी नेटवर्क को तोड़ने में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। सीबीआई, डीआरआई और डब्ल्यूसीसीबी की इस त्रिस्तरीय साझेदारी ने दिखाया कि अनुसूची-I प्रजातियों की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए बहु-एजेंसी दृष्टिकोण कितना प्रभावी हो सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में वन्यजीव तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय संगठन CITES भी भारत से संरक्षण प्रवर्तन को और सख्त करने की अपेक्षा रखते हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और अधिकारियों के अनुसार और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।