आंध्र प्रदेश में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़: डीआरआई ने श्रीकाकुलम से 21 दुर्लभ जानवर बचाए
सारांश
मुख्य बातें
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की नागपुर रीजनल यूनिट ने 24 और 25 जून 2026 को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में एक संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 21 दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीवों को सकुशल बचाया। इस दो-दिवसीय विशेष अभियान में बरामद सभी प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त हैं।
अभियान का घटनाक्रम
डीआरआई अधिकारियों ने सबसे पहले श्रीकाकुलम शहर में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया। उसके कब्जे से पिंजरों में बंद चार मालाबार जायंट स्क्विरल (विशाल भारतीय गिलहरी), एक इंडियन स्टार टॉरटॉइज (भारतीय स्टार कछुआ) और 14 जंगली मुर्गे (जंगल फाउल) बरामद किए गए।
पूछताछ में मिली सूचना के आधार पर टीम श्रीकाकुलम से करीब 60 किलोमीटर दूर रायाकुर्दी गाँव के एक सुदूर और दुर्गम इलाके में पहुँची, जहाँ बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी अनुपलब्ध थीं। देर रात तक जारी रहे इस अभियान में अधिकारियों ने स्मॉल इंडियन सिवेट (छोटी भारतीय कस्तूरी बिल्ली) के दो बच्चों को भी सुरक्षित बचाया।
बरामद प्रजातियाँ और कानूनी स्थिति
मालाबार जायंट स्क्विरल, स्मॉल इंडियन सिवेट और इंडियन स्टार टॉरटॉइज — तीनों प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध हैं। इन प्रजातियों के शिकार, कब्जे, परिवहन और व्यापार पर कानून के तहत पूर्ण प्रतिबंध है और उल्लंघन पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है।
गौरतलब है कि ये प्रजातियाँ विदेशी पालतू पशु बाज़ार और वन्यजीव संग्रहकर्ताओं के बीच अत्यधिक माँग में रहती हैं, जिससे तस्करों को इन्हें निशाना बनाने का प्रोत्साहन मिलता है। डीआरआई के अनुसार, यह माँग जैव विविधता और इन संरक्षित प्रजातियों के प्राकृतिक अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है।
कानूनी कार्रवाई
बरामद सभी वन्यजीवों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत विधिवत जब्त किया गया। जब्ती की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद आरोपी और सभी बचाए गए जानवरों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए श्रीकाकुलम वन विभाग को सौंप दिया गया।
आम जनता पर असर और अपील
डीआरआई ने स्पष्ट किया कि वह राज्य वन विभाग और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए खुफिया सूचनाओं के आधार पर वन्यजीव तस्करी के विरुद्ध निरंतर अभियान चला रहा है। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीवों की अवैध तस्करी की जानकारी मिलने पर तत्काल कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित करें।
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देश में वन्यजीव तस्करी के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय दुर्लभ प्रजातियों की माँग लगातार बढ़ रही है। डीआरआई का यह ऑपरेशन संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।