26 जून 2026
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आंध्र प्रदेश में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़: डीआरआई ने श्रीकाकुलम से 21 दुर्लभ जानवर बचाए

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आंध्र प्रदेश में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़: डीआरआई ने श्रीकाकुलम से 21 दुर्लभ जानवर बचाए

सारांश

डीआरआई की नागपुर टीम ने आंध्र प्रदेश के दुर्गम इलाकों में दो दिन के अभियान में वन्यजीव तस्करी गिरोह को पकड़ा और अनुसूची-1 की 21 दुर्लभ प्रजातियाँ बचाईं — जिनमें मालाबार गिलहरी, स्टार कछुआ और सिवेट के बच्चे शामिल हैं। यह ऑपरेशन बढ़ते विदेशी पालतू पशु बाज़ार की माँग से जुड़ी तस्करी की गंभीर चुनौती को उजागर करता है।

मुख्य बातें

डीआरआई की नागपुर रीजनल यूनिट ने 24-25 जून 2026 को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया।
बचाए गए जानवरों में 4 मालाबार जायंट स्क्विरल , 1 इंडियन स्टार टॉरटॉइज , 14 जंगली मुर्गे और 2 स्मॉल इंडियन सिवेट के बच्चे शामिल हैं।
तीनों मुख्य प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त हैं।
दूसरा छापा श्रीकाकुलम से 60 किलोमीटर दूर रायाकुर्दी गाँव के बिजली-नेटवर्क विहीन दुर्गम इलाके में मारा गया।
आरोपी और सभी बचाए गए जानवर श्रीकाकुलम वन विभाग को सौंपे गए।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की नागपुर रीजनल यूनिट ने 24 और 25 जून 2026 को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में एक संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 21 दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीवों को सकुशल बचाया। इस दो-दिवसीय विशेष अभियान में बरामद सभी प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त हैं।

अभियान का घटनाक्रम

डीआरआई अधिकारियों ने सबसे पहले श्रीकाकुलम शहर में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया। उसके कब्जे से पिंजरों में बंद चार मालाबार जायंट स्क्विरल (विशाल भारतीय गिलहरी), एक इंडियन स्टार टॉरटॉइज (भारतीय स्टार कछुआ) और 14 जंगली मुर्गे (जंगल फाउल) बरामद किए गए।

पूछताछ में मिली सूचना के आधार पर टीम श्रीकाकुलम से करीब 60 किलोमीटर दूर रायाकुर्दी गाँव के एक सुदूर और दुर्गम इलाके में पहुँची, जहाँ बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी अनुपलब्ध थीं। देर रात तक जारी रहे इस अभियान में अधिकारियों ने स्मॉल इंडियन सिवेट (छोटी भारतीय कस्तूरी बिल्ली) के दो बच्चों को भी सुरक्षित बचाया।

बरामद प्रजातियाँ और कानूनी स्थिति

मालाबार जायंट स्क्विरल, स्मॉल इंडियन सिवेट और इंडियन स्टार टॉरटॉइज — तीनों प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध हैं। इन प्रजातियों के शिकार, कब्जे, परिवहन और व्यापार पर कानून के तहत पूर्ण प्रतिबंध है और उल्लंघन पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है।

गौरतलब है कि ये प्रजातियाँ विदेशी पालतू पशु बाज़ार और वन्यजीव संग्रहकर्ताओं के बीच अत्यधिक माँग में रहती हैं, जिससे तस्करों को इन्हें निशाना बनाने का प्रोत्साहन मिलता है। डीआरआई के अनुसार, यह माँग जैव विविधता और इन संरक्षित प्रजातियों के प्राकृतिक अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है।

कानूनी कार्रवाई

बरामद सभी वन्यजीवों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत विधिवत जब्त किया गया। जब्ती की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद आरोपी और सभी बचाए गए जानवरों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए श्रीकाकुलम वन विभाग को सौंप दिया गया।

आम जनता पर असर और अपील

डीआरआई ने स्पष्ट किया कि वह राज्य वन विभाग और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए खुफिया सूचनाओं के आधार पर वन्यजीव तस्करी के विरुद्ध निरंतर अभियान चला रहा है। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीवों की अवैध तस्करी की जानकारी मिलने पर तत्काल कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित करें।

यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देश में वन्यजीव तस्करी के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय दुर्लभ प्रजातियों की माँग लगातार बढ़ रही है। डीआरआई का यह ऑपरेशन संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़ी समस्या की महज एक झलक है — विदेशी पालतू पशु बाज़ार की बेलगाम माँग, जो अनुसूची-1 प्रजातियों को भी निशाना बनाने से नहीं चूकती। असली सवाल यह है कि तस्करी की यह आपूर्ति श्रृंखला कहाँ से शुरू होती है और अंतिम खरीदार तक कैसे पहुँचती है — जिसकी जाँच अकेले जब्ती से नहीं होती। डीआरआई और वन विभाग का समन्वय सराहनीय है, पर बिना दीर्घकालिक निगरानी तंत्र और कड़े न्यायिक परिणामों के, ऐसे छापे तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के बजाय केवल बाधित करते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई ने श्रीकाकुलम में किन जानवरों को बचाया?
डीआरआई ने श्रीकाकुलम में 4 मालाबार जायंट स्क्विरल, 1 इंडियन स्टार टॉरटॉइज, 14 जंगली मुर्गे और 2 स्मॉल इंडियन सिवेट के बच्चे बचाए — कुल 21 दुर्लभ जानवर। ये सभी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 क्या है?
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में उन प्रजातियों को शामिल किया जाता है जिन्हें सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इन प्रजातियों के शिकार, कब्जे, परिवहन या व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध है और उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान है।
इस वन्यजीव तस्करी अभियान में आरोपी का क्या हुआ?
श्रीकाकुलम शहर में पकड़े गए संदिग्ध आरोपी को जब्ती की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद बचाए गए सभी जानवरों सहित श्रीकाकुलम वन विभाग को सौंप दिया गया। आगे की कानूनी कार्रवाई वन विभाग द्वारा की जाएगी।
इन दुर्लभ जानवरों की तस्करी क्यों होती है?
डीआरआई के अनुसार, मालाबार जायंट स्क्विरल, इंडियन स्टार टॉरटॉइज और स्मॉल इंडियन सिवेट जैसी प्रजातियों की विदेशी पालतू पशु बाज़ार और वन्यजीव संग्रहकर्ताओं के बीच अत्यधिक माँग है। यही माँग तस्करों को इन संरक्षित प्रजातियों को निशाना बनाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे जैव विविधता को गंभीर खतरा पैदा होता है।
वन्यजीव तस्करी की सूचना कहाँ दें?
डीआरआई ने नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीवों की अवैध तस्करी की जानकारी मिलने पर तत्काल नज़दीकी वन विभाग या कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित करें। विभाग का कहना है कि भारत के वन्यजीवों की सुरक्षा में आम जनता की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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