14 जुलाई 2026
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मैसूरु में हाथीदांत तस्करी गिरोह ध्वस्त: DRI ने 4.058 किलो आइवरी जब्त कर 3 गिरफ्तार

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मैसूरु में हाथीदांत तस्करी गिरोह ध्वस्त: DRI ने 4.058 किलो आइवरी जब्त कर 3 गिरफ्तार

सारांश

DRI नागपुर की टीम ने 26 मई 2026 को मैसूरु में छापेमारी कर 4.058 किलो हाथीदांत जब्त किया और तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। बरामद आइवरी और आरोपियों को मैसूरु वन विभाग को सौंपा गया; जांच में बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की तलाश जारी है।

मुख्य बातें

DRI नागपुर ने 26 मई 2026 को मैसूरु, कर्नाटक में हाथीदांत तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया।
4.058 किलोग्राम भारतीय हाथी के दांत जब्त; 3 आरोपी गिरफ्तार।
बरामद आइवरी और आरोपियों को मैसूरु टेरिटोरियल रेंज के वन क्षेत्राधिकारी को सौंपा गया।
भारतीय हाथी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित; व्यापार पूर्णतः प्रतिबंधित।
जांच जारी; एजेंसियां अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की नागपुर क्षेत्रीय इकाई ने 26 मई 2026 को मैसूरु, कर्नाटक में एक बड़े अवैध हाथीदांत तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया और 4.058 किलोग्राम भारतीय हाथी के दांत जब्त किए। मुंबई जोनल यूनिट के समन्वय में की गई इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो संरक्षित वन्यजीव उत्पादों की अवैध खरीद-फरोख्त में संलिप्त थे।

कार्रवाई का विवरण

DRI को मिली विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर टीम ने मैसूरु में छापेमारी की और आरोपियों को मौके पर दबोचा। सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद तीनों गिरफ्तार आरोपियों और 4.058 किलोग्राम बरामद हाथीदांत को मैसूरु टेरिटोरियल रेंज के वन क्षेत्राधिकारी को सौंप दिया गया। अब वन विभाग वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।

कानूनी पृष्ठभूमि

भारतीय हाथी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है, जो उसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्रदान करती है। इस श्रेणी में आने वाले जानवरों के शिकार, व्यापार या उनके अंगों को रखने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद, एशियाई हाथीदांत की अंतरराष्ट्रीय काले बाज़ार में भारी मांग बनी रहती है — इसकी अपेक्षाकृत मुलायम बनावट के कारण कारीगर इसे बारीक नक्काशी और सजावटी वस्तुओं के लिए पसंद करते हैं, जो अवैध बाज़ारों में ऊंची कीमतों पर बेची जाती हैं।

तस्करी नेटवर्क की चुनौती

अधिकारियों के अनुसार, संगठित तस्करी गिरोहों की संलिप्तता इन मामलों की जांच को जटिल बना देती है। फिलहाल एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों में सक्रिय बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं। DRI ने हाल के वर्षों में कई ऐसे तस्करी नेटवर्क ध्वस्त किए हैं, और अधिकारियों का कहना है कि खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियान इस लड़ाई में अनिवार्य हैं।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे समय पर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका मानना है कि आवासीय क्षेत्रों के सिकुड़ने और शिकार जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हाथियों की सुरक्षा के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई ज़रूरी है, और इससे अन्य संभावित तस्करों को भी कड़ा संदेश जाएगा।

आगे की जांच

मामले की जांच जारी है। DRI और राज्य वन विभाग मिलकर यह निर्धारित करने का प्रयास कर रहे हैं कि यह गिरोह किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है। इस मामले का परिणाम भविष्य में वन्यजीव अपराध के विरुद्ध प्रवर्तन रणनीति को और धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह गिरोह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की एक कड़ी मात्र है। एशियाई हाथीदांत की काले बाज़ार में ऊंची मांग तब तक बनी रहेगी जब तक मांग-पक्ष पर — यानी खरीदारों और अंतिम उपभोक्ताओं पर — समान रूप से कार्रवाई नहीं होती। वन्यजीव अपराध में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय की खाई अक्सर अभियोजन को कमज़ोर करती है; इस मामले में DRI द्वारा वन विभाग को त्वरित हस्तांतरण एक सकारात्मक संकेत है, पर दीर्घकालिक निरोध के लिए दोष-सिद्धि दर बढ़ाना उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसूरु में DRI ने कितना हाथीदांत जब्त किया और कितने लोग गिरफ्तार हुए?
DRI नागपुर ने 26 मई 2026 को मैसूरु में की गई कार्रवाई में 4.058 किलोग्राम भारतीय हाथी के दांत जब्त किए और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। बरामद आइवरी और गिरफ्तार आरोपियों को मैसूरु टेरिटोरियल रेंज के वन क्षेत्राधिकारी को सौंपा गया।
भारत में हाथीदांत का व्यापार क्यों प्रतिबंधित है?
भारतीय हाथी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है, जो उसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण देती है। इस श्रेणी में आने वाले जानवरों के शिकार, व्यापार या उनके अंगों को रखने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
एशियाई हाथीदांत की काले बाज़ार में इतनी मांग क्यों है?
एशियाई हाथीदांत की अपेक्षाकृत मुलायम बनावट के कारण कारीगर इसे बारीक नक्काशी और सजावटी वस्तुएं बनाने के लिए पसंद करते हैं। ऐसे उत्पाद अवैध अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में ऊंची कीमतों पर बेचे जाते हैं और विलासिता व प्रतिष्ठा का प्रतीक माने जाते हैं।
इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कौन करेगा?
DRI द्वारा प्रारंभिक गिरफ्तारी और जब्ती के बाद मैसूरु वन विभाग वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा। एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि इस गिरोह के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं।
DRI ने हाल के वर्षों में वन्यजीव तस्करी पर कितनी कार्रवाई की है?
DRI ने हाल के वर्षों में कई तस्करी नेटवर्क ध्वस्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियान और DRI तथा राज्य वन विभागों के बीच समन्वित प्रयास इस लड़ाई में अनिवार्य हैं।
राष्ट्र प्रेस
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