डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: ₹120 करोड़ की 3 लाख ई-सिगरेट जब्त, चीन से हो रही थी तस्करी

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डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: ₹120 करोड़ की 3 लाख ई-सिगरेट जब्त, चीन से हो रही थी तस्करी

सारांश

DRI ने एक साथ चार राज्यों में छापेमारी कर ₹120 करोड़ की 3 लाख ई-सिगरेट जब्त कीं, जो चीन से 'फर्नीचर' के नाम पर छिपाकर लाई जा रही थीं। 2019 से प्रतिबंधित इन उत्पादों की तस्करी का यह नेटवर्क कितना गहरा है, यह जाँच का विषय है।

मुख्य बातें

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने 21 मई 2025 को ई-सिगरेट तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया।
कुल 3 लाख ई-सिगरेट/वेप्स जब्त, बाज़ार मूल्य ₹120 करोड़ से अधिक।
तस्करी चीन से होती थी — माल को 'फर्नीचर' और 'धातु के पुर्जों' के रूप में छिपाया गया था।
छापे महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और आईसीडी पर पड़े।
भारत में ई-सिगरेट इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
पिछले माह DRI ने 'ऑपरेशन गोल्डन ड्रॉप' में ₹4.8 करोड़ का 3 किलोग्राम सोना भी जब्त किया था।

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने 21 मई 2025 को देशभर में सक्रिय ई-सिगरेट तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए ₹120 करोड़ से अधिक मूल्य की लगभग 3 लाख इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (वेप्स) जब्त कीं। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में बताया कि यह कार्रवाई महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के कई बंदरगाहों, हवाई अड्डों और आईसीडी (इनलैंड कंटेनर डिपो) पर एक साथ चलाए गए अभियानों के तहत की गई।

तस्करी का तरीका

जाँच में सामने आया कि इन प्रतिबंधित ई-सिगरेटों को चीन से मँगाया गया था और सीमा शुल्क जाँच से बचने के लिए इन्हें 'फर्नीचर' और 'धातु की कुर्सी के पुर्जों' जैसी वस्तुओं के रूप में गलत तरीके से घोषित किया गया था। विशिष्ट खुफिया सूचनाओं के आधार पर DRI अधिकारियों ने संदिग्ध खेपों की पहचान की, उन पर नज़र रखी और अंततः उन्हें जब्त किया।

जब्त माल का विवरण

विस्तृत जाँच के दौरान विभिन्न ब्रांडों, स्वादों और विशिष्टताओं की कुल लगभग 3,00,000 ई-सिगरेट/वेप्स बरामद की गईं, जिनकी बाज़ार कीमत ₹120 करोड़ से अधिक आँकी गई है। यह अब तक की ई-सिगरेट तस्करी के विरुद्ध देश की सबसे बड़ी एकल कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

कानूनी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन वितरण प्रणालियाँ (ENDS) पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) अधिनियम, 2019 के तहत इनका उत्पादन, आयात, बिक्री और विज्ञापन सभी दंडनीय अपराध हैं। यह कानून सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के उद्देश्य से लागू किया गया था।

डीआरआई की पिछली बड़ी कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब पिछले महीने ही DRI ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय (CSMI) हवाई अड्डे पर 'ऑपरेशन गोल्डन ड्रॉप' के तहत एक संगठित सोने की तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस अभियान में ₹4.8 करोड़ मूल्य का 3 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया गया था और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।

आगे की जाँच

वित्त मंत्रालय के अनुसार, DRI इस तस्करी नेटवर्क के अन्य सूत्रों और संभावित खरीदारों की पहचान के लिए जाँच जारी रखे हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन से गलत लेबलिंग के ज़रिए होने वाली ऐसी तस्करी युवाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और इस पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 2019 में पूर्ण प्रतिबंध के छह साल बाद भी इतने बड़े पैमाने पर तस्करी कैसे जारी है। 'फर्नीचर' और 'धातु के पुर्जों' जैसी सरल आड़ में माल पार होना सीमा शुल्क निगरानी की कमज़ोरियों को उजागर करता है। चार राज्यों में एक साथ नेटवर्क का फैला होना यह भी बताता है कि माँग बनी हुई है — खासकर युवाओं में — और केवल जब्ती से माँग नहीं रुकती। दीर्घकालिक समाधान के लिए आपूर्ति शृंखला और वितरण नेटवर्क दोनों पर एक साथ प्रहार ज़रूरी है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई ने ई-सिगरेट तस्करी में क्या कार्रवाई की?
DRI ने 21 मई 2025 को महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापेमारी कर ₹120 करोड़ से अधिक मूल्य की लगभग 3 लाख ई-सिगरेट/वेप्स जब्त कीं। यह माल चीन से गलत घोषणा के साथ आयात किया जा रहा था।
ई-सिगरेट को भारत में किस कानून के तहत प्रतिबंधित किया गया है?
भारत में ई-सिगरेट और सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन वितरण प्रणालियाँ (ENDS) इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। इस कानून के अंतर्गत इनका उत्पादन, आयात, बिक्री, भंडारण और विज्ञापन सभी दंडनीय हैं।
तस्कर ई-सिगरेट को कैसे छिपाकर लाते थे?
तस्करी का माल चीन से मँगाया जाता था और इसे 'फर्नीचर' तथा 'धातु की कुर्सी के पुर्जों' जैसी वस्तुओं के रूप में गलत तरीके से घोषित किया जाता था ताकि सीमा शुल्क जाँच से बचा जा सके। DRI ने विशिष्ट खुफिया सूचनाओं के आधार पर इन खेपों की पहचान की।
इस कार्रवाई से पहले DRI ने हाल में और कौन-सा बड़ा ऑपरेशन चलाया था?
पिछले महीने DRI ने मुंबई के CSMI हवाई अड्डे पर 'ऑपरेशन गोल्डन ड्रॉप' के तहत एक संगठित सोने की तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस अभियान में ₹4.8 करोड़ मूल्य का 3 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया गया और एक आरोपी गिरफ्तार हुआ था।
इस तस्करी नेटवर्क की आगे की जाँच कहाँ तक पहुँची है?
वित्त मंत्रालय के अनुसार DRI इस नेटवर्क के अन्य सूत्रों और संभावित खरीदारों की पहचान के लिए जाँच जारी रखे हुए है। अभी तक गिरफ्तारी या आरोपियों की संख्या के बारे में आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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