ईडी का बड़ा खुलासा: विदेशी डेबिट कार्डों से नक्सल इलाकों में निकाले 6.5 करोड़, TTI नेटवर्क पर शिकंजा
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 18-19 अप्रैल 2026 को कई राज्यों में 6 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।
- अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक के विदेशी डेबिट कार्डों से छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी में 6.5 करोड़ रुपए की संदिग्ध नकद निकासी हुई।
- माइक मार्क को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 24 विदेशी डेबिट कार्ड के साथ पकड़ा गया।
- नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच विदेशी कार्डों से भारत में 95 करोड़ रुपए के फंड ट्रांसफर की आशंका।
- जब्त सामग्री में 25 विदेशी डेबिट कार्ड, 40 लाख रुपए नकद और कई डिजिटल डिवाइस शामिल।
- TTI (The Timothy Initiative) भारत में FCRA के तहत पंजीकृत नहीं है, जांच FEMA के तहत जारी।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 और 19 अप्रैल 2026 को देशभर में छह स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाते हुए अमेरिकी बैंक के विदेशी डेबिट कार्डों से भारत में 6.5 करोड़ रुपए की संदिग्ध नकद निकासी का बड़ा खुलासा किया है। यह पूरा मामला 'द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI)' नामक विदेशी संगठन से जुड़ा है, जो भारत में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत जांच कर रही ईडी को पता चला कि अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक (Truist Bank) से जारी डेबिट कार्ड भारत लाए गए और इनसे विभिन्न राज्यों के एटीएम से बार-बार नकद निकाली गई। यह राशि कथित तौर पर TTI से जुड़ी गतिविधियों में खर्च की गई।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इन कार्डों का सबसे अधिक उपयोग वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों — विशेषकर छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर जिलों में — किया गया। यह तथ्य इस मामले को सामान्य वित्तीय अनियमितता से कहीं अधिक गंभीर बनाता है।
बेंगलुरु हवाई अड्डे पर पकड़ाया विदेशी नागरिक
जांच के दौरान माइक मार्क नामक व्यक्ति को बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय रोका गया जब वह 24 विदेशी डेबिट कार्ड लेकर भारत में प्रवेश कर रहा था। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने ईडी द्वारा जारी लुकआउट सर्कुलर (LOC) के आधार पर यह कार्रवाई की।
माइक मार्क की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि ईडी पहले से ही इस नेटवर्क पर नजर रखे हुए थी और यह ऑपरेशन पूर्व-नियोजित खुफिया जानकारी पर आधारित था।
95 करोड़ के फंड ट्रांसफर की आशंका
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच विदेशी बैंकों द्वारा जारी कार्डों के माध्यम से भारत में लगभग 95 करोड़ रुपए के फंड ट्रांसफर के संकेत मिले हैं। यह आंकड़ा बताता है कि यह कोई एकाकी घटना नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक और सुनियोजित वित्तीय नेटवर्क है।
निकाले गए कैश के हिसाब-किताब के लिए एक ऑनलाइन बिलिंग और अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया, जिसे कथित तौर पर भारत के बाहर से संचालित किया जा रहा था। यह तकनीकी परत इस नेटवर्क की परिष्कृत प्रकृति को दर्शाती है।
छापेमारी में क्या मिला?
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने निम्नलिखित वस्तुएं जब्त कीं:
25 विदेशी बैंक डेबिट कार्ड, लगभग 40 लाख रुपए नकद, और कई डिजिटल उपकरण व आपत्तिजनक दस्तावेज। ये साक्ष्य आगे की जांच में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
ईडी का मानना है कि यह पूरी गतिविधि एक संगठित समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह की नकद आपूर्ति देश की आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
गौरतलब है कि FCRA-अपंजीकृत विदेशी संगठनों द्वारा भारत में फंडिंग का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में कई बार उठ चुका है। सरकार ने 2020 में FCRA संशोधन के जरिए इस पर शिकंजा कसने की कोशिश की थी, लेकिन यह मामला बताता है कि अवैध चैनल अभी भी सक्रिय हैं।
आगे की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि TTI के भारत में और कितने सहयोगी हैं, और क्या इस नेटवर्क के तार किसी राजनीतिक या उग्रवादी संगठन से जुड़े हैं। ईडी के आगामी बयान और संभावित गिरफ्तारियां इस मामले की दिशा तय करेंगी।