कोलकाता एयरपोर्ट पर बैंकॉक से आए यात्री के बैग से 707 रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुए बरामद, वन्यजीव तस्करी का मामला
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 23 जुलाई 2026 की रात भारतीय कस्टम विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) ने बैंकॉक से आए एक यात्री के बैग से 707 रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुए बरामद किए। यह प्रजाति दुनिया की 100 सबसे आक्रामक आक्रामक प्रजातियों की सूची में शामिल है और भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा मानी जाती है। यात्री को वन्यजीव तस्करी के आरोप में तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया है।
कैसे हुई बरामदगी
बुधवार रात बैंकॉक से आई एक उड़ान के यात्री जब ग्रीन चैनल से गुजर रहे थे, तभी AIU अधिकारियों को एक बैग के भीतर असामान्य हलचल का अहसास हुआ। अधिकारियों ने तत्काल संबंधित यात्री को रोककर उसके सामान की विस्तृत जाँच शुरू की। तलाशी के दौरान उस बैग से 707 जीवित कछुए निकले, जिनकी पहचान बाद में 'रेड-ईयर्ड स्लाइडर' प्रजाति के रूप में हुई।
भारत में इस प्रजाति की माँग क्यों
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुओं की भारतीय पालतू पशु बाज़ार में काफी माँग है। इसके दो प्रमुख कारण हैं — पहला, भारत में पाई जाने वाली कछुआ प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं, जिससे उनकी खरीद-फरोख्त कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। दूसरा, इस विदेशी प्रजाति के शरीर पर मौजूद आकर्षक लाल निशान और इसे पालतू जानवर के रूप में रखने की सहजता लोगों को इसकी ओर आकर्षित करती है।
पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जब लोग इन कछुओं को पाल नहीं पाते और जल स्रोतों में छोड़ देते हैं, तो ये भारत की मीठे पानी की 29 देशी कछुआ प्रजातियों के लिए सीधा खतरा बन जाते हैं। ये भोजन, धूप सेंकने की जगह और अंडे देने के स्थानों के लिए देशी प्रजातियों से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसके अलावा, यह प्रजाति साल्मोनेला बैक्टीरिया की वाहक होती है, जो विशेष रूप से बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।
कस्टम विभाग की कार्यवाही
अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की जाँच जारी है — यह पता लगाया जा रहा है कि कछुए कहाँ से लाए गए और इन्हें किस गंतव्य तक पहुँचाने की योजना थी। कस्टम विभाग की स्थापित प्रक्रिया के तहत ऐसी जीवित आक्रामक विदेशी प्रजातियों को उचित देखभाल के साथ रखा जाता है और मूल देश वापस भेज दिया जाता है, ताकि वे भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश न कर सकें। आगे की जाँच में तस्करी नेटवर्क की पहचान करने पर ज़ोर दिया जाएगा।