रेड-क्राउंड रूफ कछुआ तस्करी: सागर अपीलीय न्यायालय ने दोनों दोषियों की अपील खारिज, 3 साल की सजा बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
सागर अपर सत्र न्यायालय ने मध्य प्रदेश में अत्यंत दुर्लभ रेड-क्राउंड रूफ कछुओं की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के दोषी शेखर दास और मोहम्मद सुल्तान की अपील खारिज करते हुए उनकी 3 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10,000-10,000 के अर्थदंड की सजा को बरकरार रखा है। अपीलीय न्यायालय ने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को तथ्यपरक मानते हुए विशेष न्यायालय के निर्णय में कोई वैधानिक त्रुटि नहीं पाई। दोनों दोषियों को सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग की संयुक्त टीम ने वर्ष 2017 में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य एवं उसके पारिस्थितिकी क्षेत्र से दुर्लभ रेड-क्राउंड रूफ कछुओं तथा पैंगोलिन शल्क की तस्करी का भंडाफोड़ किया था। जाँच में सामने आया कि आरोपी एक सुसंगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा थे।
गौरतलब है कि यह गिरोह चंबल नदी से इन दुर्लभ कछुओं को एकत्र कर कोलकाता और भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते विदेशों में अवैध रूप से भेजता था। वन्यजीव तस्करी के साथ-साथ गिरोह द्वारा हवाला के ज़रिये अवैध वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क भी संचालित किया जा रहा था।
विशेष न्यायालय का मूल निर्णय
विशेष न्यायालय सागर ने 29 मार्च 2022 को STSF द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, बयानों और जाँच रिपोर्ट के आधार पर दोनों आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधन 2022) के उल्लंघन का दोषी करार दिया था। न्यायालय ने उन्हें 3 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक पर ₹10,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
अपीलीय न्यायालय की टिप्पणी
अपीलीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि STSF द्वारा की गई विवेचना और प्रस्तुत साक्ष्य पूरी तरह तथ्यपरक हैं तथा विशेष न्यायालय के निर्णय में कोई वैधानिक त्रुटि नहीं है। इसी आधार पर दोनों दोषियों की अपीलें निरस्त की गईं और उन्हें केंद्रीय जेल सागर भेजने का आदेश दिया गया।
रेड-क्राउंड रूफ कछुए का महत्व
रेड-क्राउंड रूफ कछुआ (Batagur kachuga) अत्यंत दुर्लभ जलीय प्रजाति है, जो मुख्यतः चंबल नदी में पाई जाती है और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब वन्यजीव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भारत की नदी-प्रजातियों को निशाना बना रहे हैं।
आगे क्या होगा
दोनों दोषी अब केंद्रीय जेल सागर में शेष सजा काटेंगे। यह निर्णय वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मज़बूत न्यायिक संदेश माना जा रहा है। STSF की यह सफलता भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध अभियोजन के लिए एक मिसाल बन सकती है।