त्रिपुरा चिटफंड घोटाला: सीबीआई अदालत ने तीन दोषियों को 6 साल की सजा, निवेशकों को राशि लौटाने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
अगरतला में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने 31 मई 2026 को त्रिपुरा चिटफंड घोटाले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निजी कंपनी प्रगति शील इंफ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड के तीन शीर्ष अधिकारियों को दोषी करार दिया और प्रत्येक को छह वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला उन सैकड़ों निवेशकों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी मेहनत की कमाई वर्षों से फंसी हुई थी।
किसे मिली सजा और कितना जुर्माना
पश्चिम त्रिपुरा जिला, अगरतला की विशेष CBI अदालत ने शनिवार को कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) अरिंदम दास, निदेशक परितोष दास और प्रशासनिक निदेशक दीपशिखा चक्रवर्ती को आम जनता के साथ धोखाधड़ी और करोड़ों रुपये के गबन का दोषी पाया।
तीनों दोषियों को छह-छह वर्ष के कठोर कारावास (RI) की सजा के साथ-साथ प्रत्येक पर ₹3 लाख का अर्थदंड भी लगाया गया है। आरोपी कंपनी प्रगति शील इंफ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड पर अलग से ₹7 लाख का आर्थिक दंड लगाया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला उन निवेशकों से जुड़ा है जिन्होंने कंपनी की विभिन्न जमा योजनाओं में अपनी पूंजी लगाई थी, परंतु परिपक्वता अवधि बीत जाने के बाद भी उन्हें धनराशि वापस नहीं मिली। मूल शिकायत कैलाशहर पुलिस स्टेशन में 30 अप्रैल 2012 को दर्ज हुई थी।
त्रिपुरा सरकार और केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की अधिसूचनाओं के अनुपालन में 8 अक्टूबर 2013 को CBI ने यह मामला पुनः दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली। जांच में यह आरोप सामने आया कि कंपनी के अधिकारियों ने बड़ी संख्या में निवेशकों से जमा राशि एकत्र की और बाद में भुगतान करने में विफल रहे। आरोपियों पर आम जनता से जुटाए गए लगभग ₹5 से ₹6 करोड़ के गबन का आरोप लगाया गया था।
गौरतलब है कि CBI ने विस्तृत जांच के बाद 28 मई 2018 को तीनों आरोपियों और कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद अदालत में लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण की प्रक्रिया चली, जो अंततः इस दोषसिद्धि पर समाप्त हुई।
निवेशकों को राशि लौटाने के अदालती निर्देश
विशेष न्यायाधीश (CBI), पश्चिम त्रिपुरा जिला ने अपने फैसले में पीड़ित जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों से वसूले गए जुर्माने की राशि सक्षम अधिकारियों को भेजी जाए, ताकि जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर, उनाकोटी जिला, कैलाशहर के माध्यम से पीड़ित जमाकर्ताओं के बीच उसका आनुपातिक वितरण किया जा सके।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन विभिन्न उप-मंडलों की आवश्यकताओं के अनुसार इस राशि का निष्पक्ष और आनुपातिक वितरण सुनिश्चित करे।
संपत्ति कुर्की से भी वसूली का निर्देश
अदालत ने सक्षम अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों का उपयोग करते हुए आरोपियों की कुर्क की गई संपत्तियों से भी धोखाधड़ी की राशि की यथासंभव वसूली करें। वसूल की गई समस्त राशि उन सभी पहचाने गए जमाकर्ताओं और निवेशकों के बीच आनुपातिक रूप से वितरित की जाएगी, जिन्हें अब तक उनकी पूंजी वापस नहीं मिली है। यह फैसला त्रिपुरा में चिटफंड पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।