8 अगस्त 2026
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झारखंड अलकतरा घोटाला: CBI कोर्ट ने ठेकेदार झमन प्रसाद को 3 साल की सजा, 6 इंजीनियर बरी

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झारखंड अलकतरा घोटाला: CBI कोर्ट ने ठेकेदार झमन प्रसाद को 3 साल की सजा, 6 इंजीनियर बरी

सारांश

दो दशक पुराने अलकतरा घोटाले में रांची की सीबीआई अदालत ने आखिरकार फैसला सुनाया — ठेकेदार को 3 साल की जेल, लेकिन 6 इंजीनियर सबूतों के अभाव में बचे। ₹20.23 लाख के इस घोटाले में न्याय तक पहुँचने में 17 साल लगे।

मुख्य बातें

रांची की सीबीआई विशेष अदालत ने 22 जून 2026 को ठेकेदार झमन प्रसाद को 3 साल सश्रम कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई।
जुर्माना न चुकाने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान।
मामला 2005-06 में भुरकुंडा-पतरातू मार्ग के नवीकरण में ₹20.23 लाख की कथित अनियमितता से जुड़ा है।
चार कनीय अभियंता (जेई) और दो सहायक अभियंता (एई) समेत 6 इंजीनियर साक्ष्य के अभाव में बरी।
बरी अभियुक्तों में भुनेश्वर महतो शामिल, जो गोड्डा पथ प्रमंडल में वर्तमान में कार्यरत हैं।
मामला 2009 में दर्ज हुआ था; फैसले तक पहुँचने में लगभग 17 वर्ष लगे।

झारखंड के बहुचर्चित अलकतरा (तारकोल) घोटाले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार, 22 जून 2026 को अहम फैसला सुनाते हुए ठेकेदार झमन प्रसाद को दोषी करार दिया और तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना न चुकाने की स्थिति में दोषी को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, मामले में नामजद छह अभियियुक्त इंजीनियरों — चार कनीय अभियंता (जेई) और दो सहायक अभियंता (एई) — को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।

घोटाले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2009 में दर्ज किया गया था। सीबीआई जांच के अनुसार 2005-06 में भुरकुंडा-पतरातू मार्ग के लगभग 6 किलोमीटर हिस्से के नवीकरण का कार्य किया गया था। नियमों के तहत सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले अलकतरे की खरीद सरकारी एजेंसी से अनिवार्य थी, किंतु आरोप है कि इसे निजी एजेंसी से खरीदा गया। इस अनियमितता का खुलासा होने के बाद सीबीआई ने जांच शुरू की और कुल ₹20.23 लाख के घोटाले का पर्दाफाश हुआ।

अदालत में सुनवाई का क्रम

मामले में कुल सात आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया था और सभी ने अदालत में ट्रायल का सामना किया। सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने 14 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने ठेकेदार झमन प्रसाद को दोषी माना।

इंजीनियरों को क्यों मिली बरी?

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि छह अभियुक्त इंजीनियरों के विरुद्ध आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके, इसलिए उन्हें साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया जाता है। बरी किए गए अभियुक्तों में भुनेश्वर महतो भी शामिल हैं, जो वर्तमान में गोड्डा पथ प्रमंडल में कनीय अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। शेष पाँच अभियुक्त सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

मामले का महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी निर्माण कार्यों में अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की माँग लगातार उठती रही है। गौरतलब है कि यह मामला दो दशक पुरानी कथित गड़बड़ी से जुड़ा है और इसका फैसला आने में लगभग 17 वर्ष का समय लगा। सीबीआई की विशेष अदालत का यह निर्णय भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति पर भी सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें न्याय तक पहुँचने में 17 साल लगना — यह झारखंड ही नहीं, पूरे देश की भ्रष्टाचार-विरोधी न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार पर गंभीर सवाल उठाता है। छह इंजीनियरों का बरी होना साक्ष्य-संग्रह की कमज़ोरी उजागर करता है — जो सीबीआई जांच की एक पुरानी और बार-बार दोहराई जाने वाली खामी है। जब तक सरकारी ठेकों में अलकतरे जैसी बुनियादी सामग्री की खरीद में पारदर्शिता नहीं आती, ऐसे मामले सिस्टम की दरारों में दशकों तक दबे रहेंगे।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड अलकतरा घोटाला क्या है?
यह 2005-06 में भुरकुंडा-पतरातू मार्ग के नवीकरण के दौरान हुई कथित अनियमितता से जुड़ा मामला है, जिसमें सड़क निर्माण के लिए अलकतरा (तारकोल) की खरीद नियमों के विपरीत निजी एजेंसी से की गई। सीबीआई जांच में ₹20.23 लाख के घोटाले का खुलासा हुआ और 2009 में मामला दर्ज किया गया।
ठेकेदार झमन प्रसाद को क्या सजा मिली?
रांची की सीबीआई विशेष अदालत ने 22 जून 2026 को झमन प्रसाद को 3 साल के सश्रम कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न चुकाने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया है।
छह इंजीनियरों को क्यों बरी किया गया?
अदालत ने कहा कि चार कनीय अभियंताओं और दो सहायक अभियंताओं के विरुद्ध आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। साक्ष्य के अभाव में इन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।
बरी किए गए अभियुक्तों में कौन शामिल हैं?
बरी किए गए छह अभियुक्तों में भुनेश्वर महतो शामिल हैं, जो वर्तमान में गोड्डा पथ प्रमंडल में कनीय अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। शेष पाँच अभियुक्त सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
इस मामले में फैसला आने में इतना समय क्यों लगा?
मामला 2009 में दर्ज हुआ था और घटना 2005-06 की है; फैसले तक पहुँचने में लगभग 17 साल लगे। सीबीआई की विशेष अदालत में 14 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों की लंबी सुनवाई प्रक्रिया इस देरी का कारण रही।
राष्ट्र प्रेस
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