क्या झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का और उनकी पत्नी को 7-7 साल की जेल हुई?

सारांश
Key Takeaways
- एनोस एक्का और उनकी पत्नी को 7 साल की सजा मिली।
- सीबीआई ने इस मामले में ठोस सबूत प्रस्तुत किए।
- आदिवासी जमीनों की अवैध खरीद का मामला है।
- सजा का फैसला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनाया गया।
- जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
रांची, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन खरीदने के 15 साल पुराने मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसएन तिवारी की अदालत ने शनिवार को सजा सुनाई। दोषी ठहराए गए राज्य के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का समेत 9 अभियुक्तों को चार से सात साल तक की कैद की सजा सुनाई गई। अदालत ने इसके साथ ही अभियुक्तों पर दो लाख रुपए से अधिक का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने शुक्रवार को सभी आरोपियों को भादवि की धारा 120बी सह पठित 193 एवं पीसी एक्ट की धारा के तहत दोषी ठहराया था.
अदालत ने एनोस एक्का को सात साल की कैद की सजा सुनाई और 2.10 लाख का जुर्माना लगाया। यदि जुर्माना नहीं भरा गया तो एक साल दो माह की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी। वहीं, एनोस की पत्नी मेनन एक्का को भी सात साल की सजा और कुल 2.60 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। यदि राशि जमा नहीं की गई, तो एक साल पांच माह अतिरिक्त जेल में रहना पड़ेगा.
इस मामले में दोषी तत्कालीन एलआरडीसी रांची कार्तिक कुमार प्रभात, राजस्व कर्मचारी मणिलाल महतो और ब्रजेश्वर महतो को पांच-पांच साल की कैद और 2.10 लाख का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर एक साल दो माह की अतिरिक्त जेल में रहना होगा। सीआई अनिल कुमार, राज किशोर सिंह, फिरोज अख्तर एवं राजस्व कर्मचारी ब्रजेश मिश्रा को चार-चार साल की कैद के अलावा 2.10 लाख का जुर्माना लगाया गया. जुर्माना न भरने पर इन चारों को एक साल दो माह अतिरिक्त जेल में रहना पड़ेगा.
सजा के फैसले के दौरान जेल में बंद नौ अभियुक्तों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। इससे पहले, सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक दविंद्र पाल सूद ने कोर्ट से दोषियों को अधिकतम सजा की मांग की। उन्होंने कहा कि मंत्री बनने के तुरंत बाद करोड़ों रुपए की जमीन कहां से खरीदी गई? ठोस साक्ष्य हैं, इसलिए अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष ने सजा में नरमी की अपील की.
इस मामले में एनोस एकkka समेत अन्य पर पांच नवंबर 2019 को आरोप तय किया गया था। इसके बाद सीबीआई ने सबूत प्रस्तुत किए। बीते 22 अगस्त को मामले में दोनों पक्ष की बहस पूरी हुई थी। सीबीआई की ओर से वरीय लोक अभियोजक प्रिंयाशु सिंह के साथ पीपी खुशबू जायसवाल ने अदालत के समक्ष 18 गवाहों को प्रस्तुत किया था.
पूर्व मंत्री एनोस एक्का ने पत्नी मेनन एकkka के नाम से हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़ से अधिक, रांची के नेवरी में 4 एकड़ से अधिक, चुटिया के सिरम टोली मौजा स्टेशन रोड में 9 डिसमिल जमीन खरीदी थी। सभी जमीन की खरीदारी मार्च 2006 से मई 2008 के बीच की गई थी.
आरोप है कि पूर्व मंत्री एनोस एकkka ने 15 साल पहले मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए 1.18 करोड़ रुपए से अधिक की आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री के लिए फर्जी पते का उपयोग किया था, जिसमें तत्कालीन एलआरडीसी रांची, कार्तिक प्रभात समेत तत्कालीन तीन सीआई राज किशोर सिंह, फिरोज अख्तर, अनिल कुमार, राजस्व कर्मचारी ब्रजेश मिश्रा, मणिलाल महतो और ब्रजेश्वर महतो की भी मिलीभगत थी। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 4 अगस्त 2010 को इस मामले में एनोस एकkka समेत उक्त लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की थी। सीबीआई ने जांच पूरी करते हुए दिसंबर 2012 में चार्जशीट दाखिल की थी.
मामले में एक आरोपी राजस्वकर्मी गोवर्धन बैठा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। एक आरोपी पशुराम केरकेट्टा आईसीयू में हैं, जिससे उनका रिकॉर्ड अलग कर दिया गया। इस मामले में 11 आरोपी ट्रायल फेस कर रहे थे.
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसएन तिवारी ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह सिद्ध किया है कि एनोस एकkka ने पद और शक्ति का दुरुपयोग कर दोषियों के साथ मिलकर झूठे दस्तावेज तैयार किए, ताकि उनकी पत्नी मेनन एकkka सीएनटी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन कर जमीन खरीद सकें। ऐसे मामलों में नरमी बरतने पर शरारती लोग बार-बार सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर गलत काम करेंगे, इसलिए सख्त रुख अपनाना जरूरी है.