क्या सीबीआई कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में एक निजी कंपनी और उसके निदेशक को दोषी ठहराया?
सारांश
Key Takeaways
- कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में चार लोगों को दोषी ठहराया गया।
- दीपक गुप्ता को कठोर कारावास की सजा मिली।
- सीबीआई की जांच में कई जटिलताएँ सामने आईं।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नई दिल्ली में स्थित सीबीआई कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में एक निजी कंपनी और उसके निदेशक सहित चार व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। इस फैसले के बाद अब तक इस मामले में कुल 20 लोगों को सजा सुनाई गई है। इस बारे में सीबीआई ने मंगलवार को जानकारी दी।
सीबीआई के अनुसार, कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में प्राइवेट कंपनी एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड, उसके निदेशक दीपक गुप्ता, आधिकारिक हस्ताक्षरकर्ता सत्य नारायण द्विवेदी और अमृत सिंह को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है। निदेशक दीपक गुप्ता को 3 साल की कठोर कारावास और 10 लाख रुपए के जुर्माने की सजा दी गई है।
इसके अलावा, कंपनी के आधिकारिक हस्ताक्षरकर्ता सत्य नारायण द्विवेदी को 2 साल की कठोर कारावास और 20 हजार रुपए का जुर्माना, जबकि अमृत सिंह को 1 साल की कठोर कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। वहीं, कोर्ट ने प्राइवेट कंपनी पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।
सीबीआई ने 4 सितंबर 2014 को आरोपियों के खिलाफ यह मामला दर्ज किया था। आरोप था कि आरोपी कंपनी और उसके निदेशक ने रावनवारा नॉर्थ कोयला ब्लॉक का गलत आवंटन प्राप्त करने के लिए वित्तीय नेट वर्थ, उत्पादन क्षमता, कंपनी के कब्जे वाली जमीन और पर्यावरण मंजूरी के बारे में आवेदन और फीडबैक फॉर्म में झूठे और गुमराह करने वाले दावे किए थे।
जांच के बाद, सीबीआई ने 31 सितंबर 2016 को कंपनी के निदेशक दीपक गुप्ता, सत्य नारायण द्विवेदी और अमृत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दायर की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया और उसी के अनुसार सजा सुनाई।