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जंतर-मंतर छात्र पिटाई: सलूजा ने की सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग, मोदी-शाह पर उठाए सवाल

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जंतर-मंतर छात्र पिटाई: सलूजा ने की सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग, मोदी-शाह पर उठाए सवाल

सारांश

जंतर-मंतर पर छात्रों और जेन-ज़ी वर्ग के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर ओडिशा कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने मोदी और अमित शाह पर संसद में जवाब न देने का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग का समर्थन किया।

मुख्य बातें

ओडिशा कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने जंतर-मंतर पर छात्रों की पिटाई को 'बेहद शर्मनाक' करार दिया।
राहुल गांधी की सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग का सलूजा ने खुला समर्थन किया।
घटना को लगभग 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
सलूजा ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर संसद में जवाब न देने का आरोप लगाया।
विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार न किए जाने और लोकसभा अध्यक्ष को नियंत्रित किए जाने का भी आरोप लगाया।

ओडिशा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों और जेन-ज़ी वर्ग के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को 'बेहद शर्मनाक' करार दिया है और इस मामले की सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग का पुरजोर समर्थन किया है। यह मांग मूल रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उठाई थी, जिसे अब ओडिशा कांग्रेस का भी खुला समर्थन मिल गया है।

मुख्य घटनाक्रम

सलूजा ने भुवनेश्वर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जंतर-मंतर पर युवा वर्ग और जेन-ज़ी के लोग पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से अपना आंदोलन कर रहे थे। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों की मांगें इतनी जायज थीं कि सरकार को उन्हें मानना पड़ा और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तक लेना पड़ा।

सलूजा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं को लाठियों से पीटा गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और बिहार में युवाओं पर हथियारों के इस्तेमाल जैसी खबरें भी सामने आईं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को गंभीर रूप से घायल किए जाने की इन घटनाओं की जितनी निंदा की जाए, वह कम है।

सरकार पर सवाल

सलूजा ने इस बात पर जोर दिया कि घटना को लगभग 20 दिन बीत चुके हैं, फिर भी सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश की सीमाओं पर सेना की कार्रवाई होती है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसका श्रेय लेने आगे आते हैं, लेकिन इस मामले में वे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर जवाब क्यों नहीं दे रहे।

सलूजा ने स्पष्ट कहा कि अमित शाह को संसद में आकर इस पर उत्तर देना चाहिए। उनका कहना था, 'अगर वे उत्तर नहीं देते, तो देश समझ रहा है कि यह सब जानबूझकर किया गया है।'

संसद में विपक्ष की मांग

सलूजा ने आरोप लगाया कि विपक्ष की ओर से संसद में स्थगन प्रस्ताव और विभिन्न मंचों पर इस विषय पर चर्चा की मांग की जा रही है, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष को भी नियंत्रित किया जा रहा है, जो उनके अनुसार एक लोकतांत्रिक देश के लिए उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग

सलूजा ने राहुल गांधी की सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग को पूरी तरह जायज बताया और कहा कि देश का हर नागरिक इसके पक्ष में है। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य और युवाओं को न्याय दिलाने के लिए यह जांच अनिवार्य है।

यह घटना ऐसे समय में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गई है जब विपक्ष संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस्तीफा सीधे प्रदर्शन के कारण हुआ या अन्य कारणों से। सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग राजनीतिक रूप से प्रभावी है, क्योंकि इसे अस्वीकार करना सरकार के लिए भी कठिन दिखता है — लेकिन इस मांग के पीछे की प्रक्रियागत वैधता और व्यावहारिकता पर स्वतंत्र विशेषज्ञों की राय अभी सामने नहीं आई है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर छात्रों की पिटाई का मामला क्या है?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और जेन-ज़ी वर्ग के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई, जिसमें कथित तौर पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ। विपक्ष के अनुसार इस कार्रवाई में कई युवा गंभीर रूप से घायल हुए।
संतोष सिंह सलूजा ने क्या मांग की है?
ओडिशा कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने इस मामले की सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन किया है। यह मांग मूल रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उठाई थी।
क्या सरकार ने इस मामले पर कोई जवाब दिया है?
सलूजा के अनुसार, घटना को लगभग 20 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इस पर जवाब नहीं दिया है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस मामले से कैसे जुड़ा है?
सलूजा ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की मांगें इतनी जायज थीं कि सरकार को उन्हें मानना पड़ा और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा। हालांकि इस्तीफे और प्रदर्शन के बीच सीधे संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
विपक्ष संसद में इस मुद्दे पर क्या कर रहा है?
विपक्ष ने संसद में स्थगन प्रस्ताव और विभिन्न मंचों पर इस विषय पर चर्चा की मांग की है। सलूजा के अनुसार इन मांगों को अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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