कृषि विभाग में रिश्वतखोरी: शिवराज सिंह चौहान ने दो और मार्केटिंग अधिकारी सस्पेंड किए, तीन दिन में तीसरी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 24 सितंबर 2026 को कृषि विभाग के दो मार्केटिंग अधिकारियों — नीरज वर्मा और संदीप डिडावत — को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने सब्सिडी भुगतान जारी करने के बदले मध्य प्रदेश के वेयरहाउस ऑपरेटरों से रिश्वत मांगी। यह कार्रवाई मंत्री के कार्यालय को शिकायतें मिलने के तत्काल बाद की गई।
किस पर क्या आरोप
मंत्री कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, मार्केटिंग अधिकारी नीरज वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में वेयरहाउस ऑपरेटरों से सब्सिडी राशि जारी करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹50,000 की माँग की थी। वहीं, मार्केटिंग अधिकारी संदीप डिडावत पर आरोप है कि उन्होंने रायसेन जिले में निरीक्षण के दौरान प्रकाश वेयरहाउस के संचालक से ₹60,000 की अवैध माँग की।
ये शिकायतें केंद्रीय मंत्री चौहान के संज्ञान में लाई गईं, जिसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दोनों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
तीन दिन में तीसरा सस्पेंशन
गौरतलब है कि यह ताज़ा निलंबन उस घटनाक्रम के महज दो दिन बाद सामने आया है, जब चौहान ने एक अन्य मार्केटिंग अधिकारी अनुराग को इसी तरह के आरोपों में सस्पेंड किया था। अनुराग पर आरोप है कि उन्होंने सब्सिडी भुगतान के बदले सीहोर की भैरूंदा तहसील स्थित शिवाय वेयरहाउस के संचालक से ₹1 लाख और रेहटी क्षेत्र के बेहराखेड़ी गाँव स्थित श्री कृष्ण वेयरहाउस के संचालक से ₹60,000 माँगे थे।
इस प्रकार, पिछले कुछ दिनों में सब्सिडी भुगतान से जुड़ी रिश्वतखोरी की शिकायतों पर कुल तीन मार्केटिंग अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हो चुकी है — जो दर्शाता है कि विभाग में यह समस्या पृथक घटनाएँ नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा हो सकती है।
मंत्री की चेतावनी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को जारी बयान में कहा, 'सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार या अनियमितताओं से जुड़ी किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि 'किसानों और सरकारी सहायता से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सब्सिडी प्रक्रियाएँ लाभार्थियों और वेयरहाउस संचालकों को परेशान किए बिना तथा किसी भी गैर-कानूनी माँग के बिना पूरी की जाएँ।
आम जनता और किसानों पर असर
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि सब्सिडी योजनाओं से सीधे छोटे किसान और वेयरहाउस संचालक जुड़े होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने की बात करती रही है। मध्यस्थ स्तर पर रिश्वतखोरी सीधे उन्हीं लाभार्थियों को नुकसान पहुँचाती है जिनके लिए सरकारी योजनाएँ बनाई जाती हैं।
चौहान ने विभागीय अधिकारियों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कर्तव्य निभाने के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि निलंबन के बाद विभागीय जाँच और संभावित आपराधिक कार्यवाही कितनी तेज़ी से आगे बढ़ती है।