जंतर-मंतर छात्र आंदोलन: विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की अपील
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और उस पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने 24 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नगीना से सांसद चंद्रशेखर, समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जिया उर रहमान और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सांसद मीसा भारती ने एकजुट होकर सरकार से छात्रों की मांगों पर ठोस जवाब देने और पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों की आवाज़ सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जिसे वे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बता रहे हैं। यह प्रदर्शन मुख्यतः पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित था। गौरतलब है कि संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सदन में भी हंगामा देखने को मिला।
चंद्रशेखर की प्रतिक्रिया
नगीना सांसद चंद्रशेखर ने कहा, 'जिस लाठी का इस्तेमाल आतंकवादियों, गुंडों और अपराधियों के खिलाफ होना चाहिए था, वह छात्रों और पत्रकारों पर चलाई गईं। यह कार्रवाई देश के भविष्य पर हमला है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में कामकाज बाधित होने के कारण उन्हें बाहर आकर अपनी बात रखनी पड़ रही है।
चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि जिन पुलिसकर्मियों ने छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट की, उनके विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पुलिस ने किसके निर्देश पर यह कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के आश्वासन वाले वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों से संवाद स्थापित किया होता तो टकराव की नौबत नहीं आती।
चंद्रशेखर ने सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल समाप्त किए जाने का स्वागत करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। साथ ही उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि छात्रों को मुआवजे की घोषणा किस आधार पर की गई और क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी हुआ है।
सपा और आरजेडी की आवाज़
समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान ने भी वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया, लेकिन चेतावनी दी कि छात्र अपनी मूल मांगों से पीछे नहीं हटे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय उन्हें अनदेखा कर रही है, और विपक्ष का दायित्व है कि वह इस आवाज़ को संसद तक पहुँचाए।
आरजेडी सांसद मीसा भारती ने कहा कि लंबे विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद प्रधानमंत्री ने पहली बार इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है, और अब सभी की नजर उनके अगले कदम पर है। उन्होंने सरकार के उस आरोप को खारिज किया कि विपक्ष आंदोलन को हवा दे रहा है। उनके अनुसार किसी राजनीतिक दल ने इस आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया — विपक्ष केवल छात्रों के समर्थन में खड़ा है।
विदेशी फंडिंग के आरोपों पर पलटवार
मीसा भारती ने आंदोलन पर विदेशी फंडिंग के आरोपों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जब भी देश में कोई बड़ा जन आंदोलन उठता है, सरकार उस पर बाहरी ताकतों के प्रभाव का आरोप लगाकर उसे कमज़ोर करने की कोशिश करती है। उनके अनुसार छात्रों की मांगों पर लोकतांत्रिक तरीके से विचार करना ही इस विवाद का सबसे उचित समाधान है।
आगे क्या होगा
विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, दबाव जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब संसद सत्र में व्यवधान और सड़क पर प्रदर्शन दोनों एक साथ चल रहे हैं — जो सरकार के लिए दोहरी चुनौती है।