23 जुलाई 2026
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जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने पढ़ी संविधान की प्रस्तावना, पुलिस कार्रवाई की निंदा

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जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने पढ़ी संविधान की प्रस्तावना, पुलिस कार्रवाई की निंदा

सारांश

जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को 23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का समर्थन मिला। वकीलों ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी, राष्ट्रगान गाया और पुलिस की कथित बर्बरता की निंदा की — बिना किसी नारेबाजी के। यह कानूनी बिरादरी का दुर्लभ सार्वजनिक हस्तक्षेप है।

मुख्य बातें

23 जुलाई को जंतर-मंतर पर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने छात्र प्रदर्शन के समर्थन में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया और राष्ट्रगान गाया।
वकील महालक्ष्मी पावनी ने छात्रों पर पुलिस की कथित बर्बरता की निंदा की और इसे 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
वकील ननिता शर्मा ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और इलेक्ट्रिक करंट का कथित इस्तेमाल हुआ।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि छात्रों के लिए न्याय की माँग करना वकीलों का संवैधानिक कर्तव्य है।
एडवोकेट अरविंद शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से सभी ज़रूरी कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

नई दिल्ली में 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर जारी छात्र विरोध-प्रदर्शन को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का खुला समर्थन मिला। वकीलों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया और राष्ट्रगान गाया — यह एकजुटता का वह प्रतीकात्मक प्रदर्शन था जिसमें कोई नारेबाजी नहीं हुई, केवल संवैधानिक मूल्यों की पुनः स्थापना की माँग थी। छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता के विरोध में यह कदम तब उठाया गया जब देशभर में इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो रही है।

वकीलों की एकजुटता का स्वरूप

सुप्रीम कोर्ट की वकील महालक्ष्मी पावनी ने कहा, 'हम शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त कर रहे हैं। हम छात्रों पर पुलिस की कथित बर्बरता और हिंसा की निंदा करते हैं। छात्र इस देश का भविष्य हैं और वे केवल अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे।' उन्होंने यह भी कहा कि 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाज के रक्षक ही कथित तौर पर हिंसक हमलावर बन गए और महिलाओं तथा छात्रों पर बल प्रयोग किया।'

छात्रों पर कथित ज़्यादतियों का ब्यौरा

सुप्रीम कोर्ट की वकील ननिता शर्मा ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, 'बच्चे सिर्फ अन्याय और उस शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे थे। उन छात्रों पर डंडे मारे गए। लाठीचार्ज हुआ। इलेक्ट्रिक करंट लगाया गया।' उन्होंने सरकार से छात्रों के साथ संवाद की अपील करते हुए कहा कि 'बातचीत से सब हल हो सकता है — यह बहुत शर्मनाक है।'

वरिष्ठ अधिवक्ताओं की आवाज़

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट न्याय का मंदिर है और एक वकील होने के नाते हमारा धर्म है कि हम हिंदुस्तान के नागरिकों तक न्याय पहुँचाएँ।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वकील यहाँ अपने लिए नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों के सवाल पर खड़े हैं।

एडवोकेट अरविंद शुक्ला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य छात्रों के साथ खड़े हैं और उनके साथ हुई 'गैर-कानूनी क्रूरता' की निंदा करते हुए सभी ज़रूरी कानूनी कार्रवाई करेंगे। सीनियर एडवोकेट डॉ. एस. मुरलीधर ने भी कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए विरोध कर रहे सभी छात्रों के साथ हैं और उनके लिए न्याय चाहते हैं।

संवैधानिक संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलन और पुलिस के रवैये को लेकर देश में व्यापक बहस छिड़ी हुई है। गौरतलब है कि वकीलों ने जानबूझकर नारेबाजी से परहेज किया और संविधान की प्रस्तावना के पाठ को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया — यह संकेत देते हुए कि उनका विरोध संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के दायरे में है।

आगे की राह

वकीलों ने संकेत दिया है कि यदि छात्रों के साथ हुई कथित ज़्यादतियों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कानूनी मोर्चे पर आगे बढ़ेंगे। सरकार और छात्रों के बीच संवाद की माँग अब न्यायिक हलकों तक पहुँच चुकी है, जो इस आंदोलन को नई गंभीरता देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह राज्य को उसी दस्तावेज़ की कसौटी पर कसने की कोशिश है जिसकी वह रक्षा का दावा करता है। यह ध्यान देने योग्य है कि वकीलों ने नारेबाजी से परहेज किया — यह सोचा-समझा कदम है जो आंदोलन को राजनीतिक रंग से दूर रखता है। असली सवाल यह है कि सरकार इस कानूनी दबाव का जवाब संवाद से देती है या चुप्पी से।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने क्या किया?
23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के समर्थन में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया और राष्ट्रगान गाया। इस दौरान उन्होंने कोई नारेबाजी नहीं की।
वकीलों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा क्यों की?
वकीलों का कहना है कि छात्रों पर कथित तौर पर लाठीचार्ज, डंडे और इलेक्ट्रिक करंट का इस्तेमाल किया गया, जो उनके अनुसार गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। वकील ननिता शर्मा ने इसे 'बहुत शर्मनाक' बताया।
इस प्रदर्शन में कौन-से वरिष्ठ वकील शामिल थे?
इस प्रदर्शन में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, सीनियर एडवोकेट डॉ. एस. मुरलीधर, एडवोकेट अरविंद शुक्ला, महालक्ष्मी पावनी और ननिता शर्मा सहित सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अनेक सदस्य शामिल हुए।
क्या वकीलों ने कोई कानूनी कार्रवाई करने की बात कही?
हाँ, एडवोकेट अरविंद शुक्ला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य छात्रों के साथ हुई कथित गैर-कानूनी क्रूरता के लिए सभी ज़रूरी कानूनी कार्रवाई करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि न्याय हो।
छात्र किस मुद्दे पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे?
वकीलों के बयानों के अनुसार, छात्र शिक्षा व्यवस्था में कथित अन्याय के खिलाफ और अपने अधिकारों की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार से छात्रों के साथ बातचीत की माँग भी उठाई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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