जंतर-मंतर हिंसा: घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने कहा — '20 जुलाई का पूरा सच आना चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिजनों ने 31 जुलाई को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी पीड़ा सार्वजनिक की। परिवारों ने एक स्वर में माँग की कि उस दिन की हिंसा का पूरा सच सामने लाया जाए।
बेटी की आँखों से देखी वो रात
घायल एएसआई की बेटी और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा कुंतल ने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस में एएसआई के पद पर हैं और इससे पहले 15 वर्षों तक नौसेना में सेवा दे चुके हैं। 20 जुलाई को वे मुख्य प्रदर्शन स्थल पर बैरिकेड्स के सबसे आगे तैनात थे।
कुंतल के अनुसार, उनके पिता पहले से कह रहे थे कि प्रदर्शन में असामाजिक तत्व शामिल हो गए हैं। उस दिन एक हिंसक भीड़ ने उन्हें घसीटकर जंतर-मंतर मंच के पास पीटा, जिससे उनके सिर में 4 टांके लगे। वे आरएमएल अस्पताल में करीब चार घंटे तक बेहोश रहे और उनकी वर्दी खून से भीगी हुई थी।
कुंतल ने कहा, 'वह रात हमारे लिए बेहद मुश्किल थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर मेरे पापा को अपराधी बताया जा रहा था। जिन्होंने मेरे पापा को मारा, वे अपराध खत्म कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय गए — इसलिए हम भी सर्वोच्च न्यायालय गए हैं।'
एसीपी के बेटे की गवाही
लक्ष्य सिंह बिष्ट के पिता एसीपी हैं, जिन्हें 4 गैलेंट्री अवार्ड मिल चुके हैं। लक्ष्य ने बताया कि उनके दादा बीएसएफ में थे और उन्होंने 1971 के युद्ध में हिस्सा लिया था।
लक्ष्य के अनुसार, उनके पिता फ्रंटलाइन पर तैनात थे। एक मित्र के ज़रिए पता चला कि सिर में चोट लगी है। जब तस्वीर देखी तो सिर मुंडा हुआ था और चार टांके लगे थे। उन्होंने बताया, 'पिता ने घर आकर बताया कि भीड़ में उपद्रवी तत्व शामिल थे, जिन्होंने बिना किसी उकसावे के पत्थरबाजी शुरू कर दी। जब वे वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे, तभी एक पत्थर उनके सिर पर लगा।'
लक्ष्य ने यह भी कहा कि जब वे सोशल मीडिया पर दोस्तों को पुलिस के खिलाफ बोलते देखते हैं, तो गुस्सा आता है — हालाँकि पिता उन्हें इस पर ध्यान न देने की सलाह देते हैं।
33 साल की सेवा, एक दिन का दर्द
घायल एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि उनके पति 33 वर्षों से दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं — कॉन्स्टेबल से शुरुआत कर अब एएसआई के पद पर हैं। 20 जुलाई को वे सामान्य ड्यूटी पर गए थे।
सीमा ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे पति ने फोन पर बताया कि भारी भीड़ है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे हैं। शाम को पता चला कि उन्हें एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उन्होंने बताया कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर गमले, पत्थर, चप्पल और जूते फेंके तथा संसद की सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए। सीमा ने माँग की, 'सरकार दिल्ली पुलिस के मुद्दे भी उठाए। सोशल मीडिया पर उस दिन का सिर्फ एक पक्ष दिखाया गया है।'
नुकसान के आँकड़े
हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई की घटना में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके अलावा 110 से अधिक बैरिकेड, 300 से अधिक बॉडी प्रोटेक्टर, 350 से अधिक हेलमेट, 50 से अधिक शील्ड और 20 से अधिक लाउडस्पीकर क्षतिग्रस्त हुए।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 10 हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर, एक एक्स-रे बैगेज स्कैनर और 25 से अधिक सरकारी वाहन तोड़फोड़ में क्षतिग्रस्त हुए। सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुँचने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
आगे क्या होगा
घायल पुलिसकर्मियों के परिवार अब सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर हिंसा को लेकर सोशल मीडिया पर आख्यान की लड़ाई जारी है। परिवारों की माँग है कि न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए उस दिन की घटनाओं की निष्पक्ष जाँच हो और सच्चाई सामने आए।