21 जुलाई 2026
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जंतर मंतर हिंसा: सीजेपी प्रदर्शन में पथराव से ASI दत्ता भरणे और HC नवीन ओला घायल, सुनाई आपबीती

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जंतर मंतर हिंसा: सीजेपी प्रदर्शन में पथराव से ASI दत्ता भरणे और HC नवीन ओला घायल, सुनाई आपबीती

सारांश

जंतर मंतर पर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पथराव में दिल्ली पुलिस के ASI दत्ता भरणे और HC नवीन ओला सिर पर चोट लगने से घायल हो गए। दोनों को RML अस्पताल में टांके लगाकर डिस्चार्ज किया गया। पुलिस आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुँचे।

मुख्य बातें

21 जुलाई 2026 को जंतर मंतर, नई दिल्ली पर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पथराव में दिल्ली पुलिस के कई जवान घायल हुए।
एएसआई दत्ता भरणे के सिर पर पत्थर लगा; आरएमएल अस्पताल में दो टांके लगाकर शाम को छुट्टी दी गई।
हेड कांस्टेबल नवीन ओला के सिर पर भी गंभीर चोट; तीन टांके लगे, रात 10-11 बजे के बीच छुट्टी मिली।
प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर तीन बैरिकेड तोड़े — पुलिस की बार-बार चेतावनी के बावजूद।
दिल्ली पुलिस आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुँचकर घायल जवानों से मिले।
एएसआई भरणे ने आरोप लगाया कि भीड़ में असामाजिक तत्व शामिल थे जिन्होंने आयोजकों की अपील भी नहीं मानी।

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर 21 जुलाई 2026 (सोमवार) को सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पथराव और बैरिकेड तोड़े जाने की घटनाओं में दिल्ली पुलिस के कई जवान घायल हो गए। घायलों में एएसआई दत्ता भरणे और हेड कांस्टेबल नवीन ओला शामिल हैं, जिन्होंने अपनी आपबीती सुनाई। दोनों पुलिसकर्मियों का इलाज डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

एएसआई दत्ता भरणे के अनुसार, सोमवार सुबह उनकी ड्यूटी जंतर मंतर के निकट रेड लाइट पर बैरिकेडिंग पर लगाई गई थी। धीरे-धीरे वहाँ आठ से दस हज़ार लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को बार-बार समझाया कि आगे बढ़ने की अनुमति नहीं है और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई, लेकिन भीड़ ने पहले सुरक्षा घेरे की बैरिकेडिंग जबरन तोड़ दी।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिसकर्मी दूसरे सुरक्षा घेरे पर पहुँचे, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने वह बैरिकेड भी तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने संसद मार्ग थाने के सामने तीसरे बैरिकेड पर मोर्चा संभाला। भरणे ने बताया कि इसी दौरान भीड़ के भीतर से किसी ने उनके सिर पर पत्थर फेंका, जिससे उन्हें गंभीर चोट लगी। साथी पुलिसकर्मी उन्हें पीसीआर वाहन से तत्काल आरएमएल अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उनके सिर पर दो टांके लगाए और शाम को अस्पताल से छुट्टी दे दी।

हेड कांस्टेबल नवीन ओला की आपबीती

हेड कांस्टेबल नवीन ओला ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ अचानक उग्र हो गई और पुलिस की स्थिति नियंत्रित करने की कोशिशें विफल हो गईं। पुलिसकर्मी विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित रखते हुए भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। पत्थर लगने से उनके सिर में गंभीर चोट आई।

ओला को भी पीसीआर वाहन से आरएमएल अस्पताल भेजा गया, जहाँ उनके सिर पर तीन टांके लगाए गए। उन्हें रात करीब 10 से 11 बजे के बीच अस्पताल से छुट्टी मिली। इलाज के दौरान दिल्ली पुलिस आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुँचे और घायल जवानों का हालचाल जाना। ओला ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें हौसला दिया और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

असामाजिक तत्वों की भूमिका पर आरोप

एएसआई भरणे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्व भी भीड़ में शामिल थे, जिन्होंने न तो पुलिस की बात सुनी और न ही कथित रूप से प्रदर्शन के आयोजकों की अपील मानी। उन्होंने कहा कि कई जगह पुलिसकर्मियों पर सामूहिक रूप से हमला किया गया और घटना के वीडियो उपलब्ध हैं जिनमें पूरी घटना देखी जा सकती है।

आगे की स्थिति

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जाँच का विषय है; वीडियो साक्ष्य की उपलब्धता इस दावे की पुष्टि या खंडन कर सकती है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में अनुमति-आधारित प्रदर्शनों के दौरान बैरिकेड तोड़े जाने की घटनाएँ पहले भी हुई हैं, लेकिन पुलिसकर्मियों को सिर पर टांके लगने की स्थिति तक पहुँचना बताता है कि भीड़ नियंत्रण की रणनीति में कहीं चूक हुई — जिसकी जवाबदेही दोनों पक्षों से माँगी जानी चाहिए।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर मंतर पर 21 जुलाई को क्या हुआ?
21 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पथराव और बैरिकेड तोड़े जाने की घटनाएँ हुईं, जिसमें दिल्ली पुलिस के कई जवान घायल हो गए। एएसआई दत्ता भरणे और हेड कांस्टेबल नवीन ओला को सिर पर गंभीर चोट लगी और दोनों को आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
घायल पुलिसकर्मियों का इलाज कहाँ हुआ?
दोनों घायल पुलिसकर्मियों — एएसआई दत्ता भरणे और हेड कांस्टेबल नवीन ओला — को पीसीआर वाहन से डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ले जाया गया। भरणे के सिर पर दो टांके लगाकर शाम को और ओला के सिर पर तीन टांके लगाकर रात 10-11 बजे के बीच छुट्टी दी गई।
प्रदर्शनकारियों ने कितने बैरिकेड तोड़े?
एएसआई दत्ता भरणे के बयान के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर तीन सुरक्षा घेरों के बैरिकेड तोड़े — पहला जंतर मंतर के पास, दूसरा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस के पीछे हटने के बाद, और तीसरा संसद मार्ग थाने के सामने। प्रत्येक बार पुलिस ने समझाने और चेतावनी देने का प्रयास किया।
सीजेपी क्या है और यह प्रदर्शन किस लिए था?
सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) एक नागरिक अधिकार संगठन है। 21 जुलाई 2026 को जंतर मंतर पर इसके बैनर तले विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया था। स्रोत में प्रदर्शन के विशिष्ट मुद्दे का उल्लेख नहीं है।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्या किया?
इलाज के दौरान दिल्ली पुलिस आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारी आरएमएल अस्पताल पहुँचे और घायल पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना। हेड कांस्टेबल नवीन ओला के अनुसार, अधिकारियों ने उन्हें हौसला दिया और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
राष्ट्र प्रेस
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