जंतर मंतर हिंसा: सीजेपी प्रदर्शन में पथराव से ASI दत्ता भरणे और HC नवीन ओला घायल, सुनाई आपबीती
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के जंतर मंतर पर 21 जुलाई 2026 (सोमवार) को सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पथराव और बैरिकेड तोड़े जाने की घटनाओं में दिल्ली पुलिस के कई जवान घायल हो गए। घायलों में एएसआई दत्ता भरणे और हेड कांस्टेबल नवीन ओला शामिल हैं, जिन्होंने अपनी आपबीती सुनाई। दोनों पुलिसकर्मियों का इलाज डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
एएसआई दत्ता भरणे के अनुसार, सोमवार सुबह उनकी ड्यूटी जंतर मंतर के निकट रेड लाइट पर बैरिकेडिंग पर लगाई गई थी। धीरे-धीरे वहाँ आठ से दस हज़ार लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को बार-बार समझाया कि आगे बढ़ने की अनुमति नहीं है और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई, लेकिन भीड़ ने पहले सुरक्षा घेरे की बैरिकेडिंग जबरन तोड़ दी।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिसकर्मी दूसरे सुरक्षा घेरे पर पहुँचे, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने वह बैरिकेड भी तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने संसद मार्ग थाने के सामने तीसरे बैरिकेड पर मोर्चा संभाला। भरणे ने बताया कि इसी दौरान भीड़ के भीतर से किसी ने उनके सिर पर पत्थर फेंका, जिससे उन्हें गंभीर चोट लगी। साथी पुलिसकर्मी उन्हें पीसीआर वाहन से तत्काल आरएमएल अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उनके सिर पर दो टांके लगाए और शाम को अस्पताल से छुट्टी दे दी।
हेड कांस्टेबल नवीन ओला की आपबीती
हेड कांस्टेबल नवीन ओला ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ अचानक उग्र हो गई और पुलिस की स्थिति नियंत्रित करने की कोशिशें विफल हो गईं। पुलिसकर्मी विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित रखते हुए भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। पत्थर लगने से उनके सिर में गंभीर चोट आई।
ओला को भी पीसीआर वाहन से आरएमएल अस्पताल भेजा गया, जहाँ उनके सिर पर तीन टांके लगाए गए। उन्हें रात करीब 10 से 11 बजे के बीच अस्पताल से छुट्टी मिली। इलाज के दौरान दिल्ली पुलिस आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुँचे और घायल जवानों का हालचाल जाना। ओला ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें हौसला दिया और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
असामाजिक तत्वों की भूमिका पर आरोप
एएसआई भरणे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्व भी भीड़ में शामिल थे, जिन्होंने न तो पुलिस की बात सुनी और न ही कथित रूप से प्रदर्शन के आयोजकों की अपील मानी। उन्होंने कहा कि कई जगह पुलिसकर्मियों पर सामूहिक रूप से हमला किया गया और घटना के वीडियो उपलब्ध हैं जिनमें पूरी घटना देखी जा सकती है।
आगे की स्थिति
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।