14 सितंबर 2026
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कनिमोझी की क्षेत्रीय पार्टियों से मुलाकात: डीएमके की BJP-कांग्रेस से परे तीसरे मोर्चे की कवायद

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कनिमोझी की क्षेत्रीय पार्टियों से मुलाकात: डीएमके की BJP-कांग्रेस से परे तीसरे मोर्चे की कवायद

सारांश

परिसीमन विधेयक गिरने के बाद DMK की कनिमोझी ने उद्धव ठाकरे, शरद पवार और सुप्रिया सुले से मुलाकात की — BJP और कांग्रेस दोनों से परे एक नए क्षेत्रीय मोर्चे की संभावना पर चर्चा के साथ। भगवंत मान और अखिलेश यादव से बैठक अगले कदम के रूप में प्रस्तावित है।

मुख्य बातें

DMK नेता कनिमोझी ने 14 सितंबर 2026 को मुंबई और नई दिल्ली में क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकात की।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मातोश्री पर करीब एक घंटे की बैठक; सांसद अनिल देसाई और मिलिंद नार्वेकर भी उपस्थित रहे।
दिल्ली में शरद पवार और सुप्रिया सुले (NCP-SP) से अलग-अलग मुलाकात।
परिसीमन-विरोधी चेन्नई बैठक से DMK की अनुपस्थिति ने विपक्षी रणनीति में मतभेद उजागर किए।
कनिमोझी के भगवंत मान (AAP) और अखिलेश यादव (सपा) से मिलने की भी संभावना।
इस अभियान को BJP और कांग्रेस दोनों से स्वतंत्र तीसरे क्षेत्रीय गठबंधन की नींव रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने परिसीमन और लोकसभा सीट-वृद्धि से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं के साथ गहन संपर्क अभियान शुरू किया है। 14 सितंबर 2026 को मुंबई और दिल्ली में की गई इन बैठकों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों से स्वतंत्र एक वृहत्तर क्षेत्रीय राजनीतिक मंच बनाने की डीएमके की सुनियोजित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

मातोश्री में ठाकरे से मुलाकात

कनिमोझी ने मुंबई के बांद्रा स्थित शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' पर उनसे मुलाकात की। ठाकरे ने स्वयं डीएमके सांसद का स्वागत किया और उन्हें सम्मान-स्वरूप सुनहरी शॉल भेंट की। करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल देसाई और मिलिंद नार्वेकर भी उपस्थित रहे।

खबरों के अनुसार, इस बैठक में परिसीमन विधेयक के संसद में न पारित होने, भाजपा के प्रति कांग्रेस के मौजूदा रुख और इंडिया ब्लॉक की आगामी रणनीति पर चर्चा हुई। विशेष जोर क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों की भूमिका तथा दक्षिणी राज्यों पर परिसीमन के संभावित असर पर समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर रहा।

पवार और सुले से दिल्ली में अलग-अलग बातचीत

मुंबई के बाद कनिमोझी नई दिल्ली पहुँचीं, जहाँ उन्होंने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार और उनकी सुपुत्री तथा लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले से अलग-अलग बैठकें कीं। इन मुलाकातों ने इस अटकल को और बल दिया कि डीएमके उन क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की संभावना परख रही है जिनके कांग्रेस के साथ मतभेद हैं।

परिसीमन विवाद की पृष्ठभूमि और मतभेद

गौरतलब है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में चेन्नई में आयोजित परिसीमन-विरोधी बैठक से डीएमके अनुपस्थित रही, जबकि कांग्रेस ने उसमें भाग लिया। इस घटनाक्रम ने मुद्दे पर अपनाई जाने वाली रणनीति को लेकर विपक्षी खेमे के भीतर विद्यमान दरारों को उजागर किया। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ ठाकरे के कथित मतभेद भी सतह पर हैं, जिसने कनिमोझी की इस यात्रा को और अधिक राजनीतिक वज़न दे दिया।

आगे का संपर्क अभियान

सूत्रों के अनुसार, कनिमोझी अपना संपर्क दौरा जारी रखते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री तथा आम आदमी पार्टी (AAP) नेता भगवंत मान और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मिल सकती हैं। इन प्रस्तावित मुलाकातों को एक समन्वित क्षेत्रीय राजनीतिक मंच के लिए समर्थन का आकलन करने की डीएमके की व्यापक रणनीति के तहत देखा जा रहा है।

तीसरे मोर्चे की संभावना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह पहल आकार लेती है, तो राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे तीसरे गठबंधन का उभरना संभव हो सकता है जो BJP और कांग्रेस दोनों से स्वतंत्र हो। हालाँकि, विशेषज्ञ यह भी संकेत देते हैं कि भारत में ऐसे मोर्चों का ऐतिहासिक अनुभव मिला-जुला रहा है और क्षेत्रीय दलों के बीच दीर्घकालिक एकजुटता बनाए रखना एक जटिल राजनीतिक चुनौती है। आने वाले हफ्तों में इस पहल की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कनिमोझी ने किन नेताओं से मुलाकात की और क्यों?
कनिमोझी ने 14 सितंबर 2026 को मुंबई में उद्धव ठाकरे और दिल्ली में शरद पवार व सुप्रिया सुले से मुलाकात की। परिसीमन विधेयक गिरने के बाद BJP और कांग्रेस दोनों से परे एक व्यापक क्षेत्रीय गठबंधन बनाने की संभावना तलाशने के लिए यह संपर्क अभियान शुरू किया गया है।
DMK किस तरह के राजनीतिक मोर्चे की तलाश कर रही है?
रिपोर्टों के अनुसार, DMK एक ऐसे क्षेत्रीय गठबंधन की संभावना परख रही है जो भाजपा और कांग्रेस दोनों से स्वतंत्र हो। इस पहल में परिसीमन-विरोधी मुद्दे पर एकमत क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों को एक साझा मंच पर लाना शामिल है।
परिसीमन विधेयक का इस राजनीतिक हलचल से क्या संबंध है?
लोकसभा सीट-वृद्धि और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हुई है। दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि नए परिसीमन में उनकी संसदीय प्रतिनिधित्व कम हो सकती है, जिसे लेकर क्षेत्रीय दलों में व्यापक असंतोष है।
DMK का चेन्नई परिसीमन-विरोधी बैठक से दूर रहना क्या बताता है?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा बुलाई गई चेन्नई बैठक में कांग्रेस ने भाग लिया, लेकिन DMK अनुपस्थित रही। इससे स्पष्ट होता है कि DMK इस मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व में नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र रणनीतिक पंक्ति पर चलना चाहती है।
कनिमोझी आगे किन नेताओं से मिल सकती हैं?
सूत्रों के अनुसार, कनिमोझी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (AAP) और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मुलाकात कर सकती हैं। ये बैठकें क्षेत्रीय दलों के बीच एक समन्वित राजनीतिक मंच के लिए समर्थन आकलन की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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