तमिलनाडु परिसीमन बैठक: एआईएडीएमके, डीएमके और डीएमडीके ने किया बहिष्कार का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की संसदीय परिसीमन पर साझा मोर्चा बनाने की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। 8 अगस्त को चेन्नई के कलाईवनार अरंगम में दोपहर 3 बजे होने वाली सांसदों की परामर्श बैठक से अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके), द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) तीनों प्रमुख दलों ने किनारा कर लिया है। इस बहिष्कार ने मुख्यमंत्री विजय की उस पहल को कमज़ोर कर दिया है, जिसका उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया के संभावित प्रभावों पर राज्य के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों के बीच एकजुट रुख तैयार करना था।
बैठक का उद्देश्य और आयोजन
तमिलनाडु सरकार ने नई दिल्ली स्थित तमिलनाडु हाउस के माध्यम से राज्य के सभी सांसदों को आमंत्रण भेजा था। बैठक की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री विजय करने वाले थे। एजेंडा था — प्रस्तावित संसदीय परिसीमन से तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन और उस पर सामूहिक रणनीति तैयार करना।
किस दल ने क्या कहा
एआईएडीएमके के सांसदों के बैठक से अनुपस्थित रहने की उम्मीद है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद थंबीदुरई और इनबादुरई फिलहाल नई दिल्ली में हैं, लेकिन वे इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।
डीएमके ने इस बैठक को मुख्यमंत्री विजय सरकार की एक राजनीतिक कवायद करार देते हुए बहिष्कार की घोषणा की। वरिष्ठ डीएमके नेता आर.एस. भारती ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि पार्टी परिसीमन विधेयक के प्रावधानों की जाँच संसद में औपचारिक रूप से पेश होने के बाद ही करेगी और तभी अपना रुख तय करेगी।
डीएमडीके के सांसद सुधीश के भी बैठक में न आने की उम्मीद है। इसके अलावा, मक्कल निधि मय्यम का भी प्रतिनिधित्व होने की संभावना नहीं है — पार्टी के राज्यसभा सांसद कमल हासन इस समय अमेरिका में हैं।
परिसीमन विवाद की पृष्ठभूमि
प्रस्तावित परिसीमन ढाँचा दक्षिणी राज्यों में गहरी चिंता का विषय बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि यदि संसदीय सीटों का पुनर्वितरण मुख्यतः जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो उन राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है — और तमिलनाडु इस श्रेणी में अग्रणी है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारतीय राज्य पहले से ही राजकोषीय हस्तांतरण और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर केंद्र सरकार से असहमति जता रहे हैं।
आगे की राह
बहुदलीय बहिष्कार के बावजूद तमिलनाडु सरकार की बैठक निर्धारित समय पर होने की उम्मीद है। हालाँकि, प्रमुख विपक्षी दलों की अनुपस्थिति में किसी साझा प्रस्ताव या संयुक्त बयान की संभावना सीमित हो गई है। परिसीमन विधेयक के संसद में पेश होने के बाद ही इन दलों के आधिकारिक रुख स्पष्ट होने की संभावना है।