परिसीमन पर डीएमके अडिग, कनिमोझी ने CM विजय से माँगा मेकेदातु पर ठोस जवाब
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की उप महासचिव कनिमोझी करुणानिधि ने 8 अगस्त 2026 को चेन्नई में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तविशियम वेट्री कषगम (TVK) सरकार द्वारा परिसीमन पर बुलाई गई सांसदों की परामर्श बैठक के बहिष्कार के अपने फैसले पर कायम है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु बांध के खिलाफ तत्काल और ठोस कदम उठाने की खुली चुनौती दी।
बहिष्कार का कारण: 'चर्चा के लिए कुछ है ही नहीं'
कनिमोझी ने तर्क दिया कि TVK सरकार के पास परिसीमन पर यह बैठक बुलाने का कोई तात्कालिक आधार नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार ने न तो मौजूदा संसद सत्र में परिसीमन विधेयक पेश करने की कोई घोषणा की है और न ही मौजूदा कानून में संशोधन का कोई प्रस्ताव सामने रखा है। उन्होंने कहा, "जब हमारे सामने कुछ है ही नहीं, तो चर्चा करने के लिए क्या बचा है?" उनके अनुसार यह बैठक बुलाना समयपूर्व और उद्देश्यहीन है।
DMK का पूर्व रिकॉर्ड और पार्टियों की एकता पर सवाल
कनिमोझी ने याद दिलाया कि DMK के नेतृत्व वाली पिछली सरकार परिसीमन पर पहले ही एक सर्वदलीय बैठक बुला चुकी है और तमिलनाडु की चिंताओं को दर्ज करते हुए एक प्रस्ताव पारित कर चुकी है। उस बैठक में कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई(एम), वीसीके और आईयूएमएल सहित कई दलों ने भाग लिया था और तमिलनाडु के लिए नुकसानदेह किसी भी परिसीमन फॉर्मूले का विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये दल अब केवल इसलिए अपना रुख बदल लेंगे, क्योंकि बैठक TVK सरकार ने बुलाई है।
मेकेदातु मुद्दे पर CM विजय को चुनौती
DMK नेता ने TVK सरकार पर आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों की बार-बार माँग के बावजूद उसने मेकेदातु बांध मुद्दे पर कोई सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई। उनका कहना था कि परिसीमन पर बातचीत का यह आयोजन मेकेदातु विवाद और कावेरी डेल्टा के किसानों की वास्तविक चिंताओं से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है। कनिमोझी ने सीधे पूछा कि क्या मुख्यमंत्री विजय राज्य के सांसदों और सरकारी प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के पास भेजने और मेकेदातु प्रोजेक्ट का विरोध करने वाला विधानसभा का प्रस्ताव व्यक्तिगत रूप से सौंपने को तैयार हैं।
कावेरी अधिकारों पर DMK का स्पष्ट रुख
कनिमोझी ने स्पष्ट किया कि DMK किसी भी ऐसी परिसीमन प्रक्रिया का पुरज़ोर विरोध करती है, जिससे संसद में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व घटे या राज्य के अधिकार प्रभावित हों। उन्होंने कहा कि TVK सरकार अगर कावेरी डेल्टा के किसानों के हितों के प्रति सचमुच प्रतिबद्ध है, तो उसे केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करके अपनी मंशा साबित करनी होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि TVK सरकार की परिसीमन बैठक का DMK के बहिष्कार के बाद राजनीतिक महत्व कम हो गया है, क्योंकि DMK तमिलनाडु में एक प्रमुख विपक्षी ताकत है। अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री विजय मेकेदातु पर DMK की चुनौती का जवाब देते हैं या नहीं। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की अगली बैठक और केंद्र सरकार की परिसीमन योजना पर कोई भी स्पष्टता इस विवाद की दिशा तय करेगी।