डीएमके ने वेंकटरमन की तमिलनाडु विशेष प्रतिनिधि नियुक्ति पर उठाए सवाल, कर्नाटक से होने पर जताई आपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार द्वारा कर्नाटक के निवासी वेंकटरमन को नई दिल्ली में राज्य का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने के फैसले पर विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने 27 जून 2026 को कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के वरिष्ठ सांसदों ने इस नियुक्ति की पारदर्शिता और तमिलनाडु के हितों की रक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
नियुक्ति का विवरण
राज्य सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर वेंकटरमन को राष्ट्रीय राजधानी में तमिलनाडु का विशेष प्रतिनिधि नामित किया है। उल्लेखनीय है कि वेंकटरमन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की फिल्म 'जननायकन' के निर्माता भी हैं। सरकारी आदेश के अनुसार, वे पद ग्रहण की तिथि से एक वर्ष तक इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
DMK की आपत्तियाँ और मुख्य सवाल
DMK के राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस नियुक्ति को 'हैरान करने वाला और चौंकाने वाला' करार दिया। उन्होंने विशेष रूप से यह प्रश्न उठाया कि क्या कर्नाटक के रहने वाले वेंकटरमन कावेरी नदी पर कर्नाटक की ओर से प्रस्तावित विवादास्पद मेकेदातु बांध परियोजना के मामले में तमिलनाडु के हितों की प्रभावी ढंग से पैरवी कर सकेंगे।
शिवा ने स्मरण दिलाया कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने स्वयं तमिलनाडु विधानसभा में घोषित किया था कि उनकी सरकार मेकेदातु बांध को कभी स्वीकृति नहीं देगी, क्योंकि इससे कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई और किसानों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह जनता को स्पष्टीकरण दे और आश्वस्त करे कि इस नियुक्ति के बावजूद राज्य के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।
ए. राजा का सुशासन पर हमला
DMK के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद ए. राजा ने इस नियुक्ति को पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों से विचलन बताते हुए सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली व्यक्तियों को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा रहा है, जबकि अनुभवी नीति-निर्माताओं और जन-प्रतिनिधियों को उपेक्षित किया जा रहा है।
राजा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'बदलाव में शायद कोई सुखद खुशबू है। क्या हमसे उम्मीद की जाती है कि हम अपनी नाक बंद कर लें, या हमें उस बदबू को दूर करना चाहिए? लोकतंत्र जिंदाबाद।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल-बँटवारे को लेकर पुरानी तनातनी बनी हुई है। मेकेदातु बांध परियोजना लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा रही है। आलोचकों का कहना है कि कर्नाटक के किसी व्यक्ति को दिल्ली में तमिलनाडु का प्रतिनिधि बनाना इस संदर्भ में विशेष रूप से विवादास्पद है।
गौरतलब है कि विशेष प्रतिनिधि का पद केंद्र सरकार के साथ राज्य के हितों की पैरवी करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अब सरकार पर दबाव है कि वह इस नियुक्ति के औचित्य को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे।
आगे की स्थिति
तमिलनाडु सरकार की ओर से अभी तक DMK के सवालों का कोई औपचारिक जवाब नहीं आया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है, खासकर यदि मेकेदातु बांध मुद्दे पर केंद्र स्तर पर कोई निर्णय होता है।