वेंकट नारायण की नियुक्ति पर मंत्री सेंगोट्टैयन का बचाव, DMK ने उठाए तीखे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन ने रविवार, 28 जून को इरोड में स्पष्ट किया कि फिल्म निर्माता के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में तमिलनाडु सरकार का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त करना एक वैध नीतिगत निर्णय है और इसमें किसी प्रकार की आपत्ति की गुंजाइश नहीं है। यह नियुक्ति मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के तहत एक वर्ष के लिए की गई है।
मंत्री का पक्ष: नीतिगत अधिकार का हवाला
मंत्री सेंगोट्टैयन ने कहा, 'सरकारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति एक नीतिगत निर्णय है। भारत में हर व्यक्ति को इसके लिए समान अधिकार है। इसलिए इस नियुक्ति में कुछ भी गलत नहीं है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री विजय द्वारा नियुक्त सभी प्रतिनिधि केवल तमिलनाडु के हित में कार्य करेंगे और केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेंगे।
वेंकट नारायण कौन हैं
के. वेंकट नारायण मूलतः कर्नाटक के रहने वाले एक व्यवसायी हैं। वे मुख्यमंत्री विजय की बहुचर्चित फिल्म 'जन नायकन' के निर्माता हैं, जिसे विजय की राजनीति में पूर्णकालिक प्रवेश से पहले उनकी अंतिम फिल्म माना जा रहा है। राज्य सरकार ने हाल ही में आधिकारिक आदेश जारी कर उन्हें नई दिल्ली में तमिलनाडु का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है।
DMK का विरोध: कर्नाटक कनेक्शन पर सवाल
विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने इस नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि ऐसे समय में जब तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी जल बँटवारे और मेकेदातु बाँध जैसे संवेदनशील विवाद चल रहे हैं, कर्नाटक मूल के व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपना राज्य के हितों से समझौता हो सकता है।
DMK सांसद तिरुची शिवा ने इस नियुक्ति को 'आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला' करार देते हुए सवाल किया कि क्या यह प्रतिनिधि कावेरी और मेकेदातु जैसे मुद्दों पर तमिलनाडु के हितों की मजबूती से रक्षा कर पाएगा।
वरिष्ठ नेताओं की आलोचना
DMK के वरिष्ठ नेता ए. राजा ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली व्यक्तियों को महत्वपूर्ण पद दिए जा रहे हैं, जबकि अनुभवी नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। राजा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि 'परिवर्तन' का वादा करने वाली सरकार अब अपने ही सिद्धांतों से भटकती नजर आ रही है।
आगे क्या
यह नियुक्ति तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद बन गई है। विपक्ष सरकार से इस फैसले पर स्पष्टीकरण माँग रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे पूरी तरह वैध और राज्य हित में बता रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार आने वाले दिनों में इस नियुक्ति के पीछे के मानदंड सार्वजनिक करती है।