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तमिलनाडु के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं: उच्च शिक्षा मंत्री विश्वनाथन का स्पष्टीकरण

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तमिलनाडु के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं: उच्च शिक्षा मंत्री विश्वनाथन का स्पष्टीकरण

सारांश

तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री विश्वनाथन के मदुरै वाले बयान ने DMK, वीसीके और CPI समेत कई दलों को नाराज़ कर दिया। एक दिन बाद उन्होंने सफाई दी — लेकिन कुलपति नियुक्ति पर अंतिम फैसला अभी मुख्यमंत्री विजय के हाथ में है।

मुख्य बातें

उच्च शिक्षा मंत्री पी.
विश्वनाथन ने 29 मई 2025 को कहा कि टीवीके सरकार तमिलनाडु के अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगी।
विवाद की जड़ मदुरै में बुधवार को दिया गया वह बयान है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर पिछली सरकार की नीतियों को जारी रखने की बाध्यता से इनकार किया था।
DMK , वीसीके , CPI और PMK ने बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जताई थी।
पिछली DMK सरकार ने कुलपति नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल से मुख्यमंत्री को हस्तांतरित किया था।
अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री विजय मंत्रिमंडल और विभागीय अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद लेंगे।

तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने गुरुवार, 29 मई 2025 को स्पष्ट किया कि नवगठित टीवीके नेतृत्व वाली सरकार राज्य के संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों से किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेगी। यह बयान राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति (वाइस चांसलर) नियुक्ति के अधिकार को लेकर उपजे राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

बुधवार को मदुरै में एक संवाद के दौरान विश्वनाथन ने कथित तौर पर कहा था कि नई सरकार पिछली सरकार की हर नीति को जारी रखने के लिए बाध्य नहीं है — विशेष रूप से विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (चांसलर) के रूप में मुख्यमंत्री की भूमिका से जुड़ी नीतियों के संदर्भ में। इस बयान पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), वीसीके, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और पीएमके समेत कई दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

गौरतलब है कि पिछली DMK सरकार के कार्यकाल में तमिलनाडु विधानसभा ने विभिन्न विश्वविद्यालय अधिनियमों में संशोधन कर कुलपति नियुक्त करने का अधिकार राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा था। इसे राज्य के संघीय अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया गया था।

मंत्री का स्पष्टीकरण

चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विश्वनाथन ने कहा कि उनकी पिछली टिप्पणियों को गलत संदर्भ में लिया गया। उन्होंने कहा, "हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। राज्य के अधिकार हमारे लिए सर्वोपरि हैं। एक विधायक, मंत्री और तमिलनाडु के नागरिक के रूप में मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे।"

उन्होंने यह भी जोड़ा, "मेरी टिप्पणी केवल एक सामान्य टिप्पणी थी, किसी विशेष संदर्भ में दिया गया जवाब नहीं।"

अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री का

मंत्री ने स्पष्ट किया कि कुलपति नियुक्ति के अधिकार से जुड़ा अंतिम फैसला मुख्यमंत्री विजय उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों और मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा राज्य के किसी भी संवैधानिक या प्रशासनिक अधिकार को छोड़ने का नहीं है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों और सहयोगी नेताओं ने बुधवार के बयान पर आरोप लगाया था कि सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की स्वायत्तता को कमज़ोर करने की दिशा में जा रही है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब टीवीके सरकार अभी अपने शुरुआती दौर में है और राज्य-केंद्र संबंधों को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता चरम पर है।

विश्वनाथन ने कहा, "न तो कांग्रेस और न ही टीवीके तमिलनाडु के लोगों के अधिकारों से कभी समझौता करेगी।" आगे की कार्रवाई मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली चर्चाओं पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह सत्ता में आई नई सरकार की नीतिगत दिशा को लेकर असमंजस का संकेत देता है। कुलपति नियुक्ति का अधिकार तमिलनाडु में राज्य-केंद्र तनाव का प्रतीक बन चुका है; इसे पलटना या उस पर अनिश्चितता बनाए रखना DMK की विरासत और राज्य स्वायत्तता की राजनीति दोनों के लिए संवेदनशील है। यह ऐसे समय में आया है जब टीवीके सरकार अभी अपनी पहचान बना रही है और सहयोगी दलों की निगाहें उस पर टिकी हैं। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री पर छोड़ना स्थिति को टालने की रणनीति भी हो सकती है — जब तक राजनीतिक दबाव स्पष्ट दिशा न दे।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में कुलपति नियुक्ति विवाद क्या है?
यह विवाद इस बात पर है कि राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्त करने का अधिकार किसके पास हो — राज्यपाल के पास या मुख्यमंत्री के पास। पिछली DMK सरकार ने विधानसभा में संशोधन कर यह अधिकार मुख्यमंत्री को सौंपा था, जिसे राज्य की स्वायत्तता की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया था।
मंत्री विश्वनाथन के किस बयान पर विवाद हुआ?
बुधवार को मदुरै में एक संवाद के दौरान विश्वनाथन ने कथित तौर पर कहा कि नई टीवीके सरकार पिछली सरकार की हर नीति को जारी रखने के लिए बाध्य नहीं है। इसे कुलपति नियुक्ति नीति पर सवाल के रूप में देखा गया, जिससे DMK, वीसीके, CPI और PMK ने आपत्ति जताई।
विश्वनाथन ने गुरुवार को क्या सफाई दी?
उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियों को गलत संदर्भ में लिया गया और राज्य के अधिकारों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री विजय मंत्रिमंडल और विभागीय अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद लेंगे।
इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय कब और कैसे होगा?
मंत्री के अनुसार मुख्यमंत्री विजय उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों और मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लेंगे। कोई समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
टीवीके सरकार और DMK का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
विश्वनाथन ने कहा कि न तो कांग्रेस और न ही टीवीके तमिलनाडु के लोगों के अधिकारों से समझौता करेगी। DMK ने पिछली सरकार में कुलपति नियुक्ति का अधिकार मुख्यमंत्री को दिलाया था और अब इस नीति को बनाए रखने की माँग कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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