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कंटेनर निर्माण सहायता योजना (CMAS): ₹10,000 करोड़ के परिव्यय से 53,000 से अधिक रोजगार, आयात निर्भरता होगी कम

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कंटेनर निर्माण सहायता योजना (CMAS): ₹10,000 करोड़ के परिव्यय से 53,000 से अधिक रोजगार, आयात निर्भरता होगी कम

सारांश

भारत हर साल 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है — CMAS इसी निर्भरता को तोड़ने की कोशिश है। ₹10,000 करोड़ के परिव्यय, ₹99,149 करोड़ के संभावित निवेश और 53,000 से अधिक रोजगार के वादे के साथ यह योजना 'मेक इन इंडिया' को समुद्री क्षेत्र तक विस्तार देने का सबसे बड़ा दांव है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार की प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS) का परिव्यय ₹10,000 करोड़ है।
योजना से 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार — कुल 53,000 से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान।
51 कंटेनर जहाजों के बेड़े और घरेलू कंटेनर खरीद के लिए लगभग ₹99,149 करोड़ के निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है।
भारत अभी हर वर्ष करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है; CMAS इस निर्भरता को कम करने पर केंद्रित है।
योजना 'मेक इन इंडिया' , 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' और पहले घोषित ₹70,000 करोड़ के शिपबिल्डिंग पैकेज के अनुरूप है।
UNCTAD के अनुसार वैश्विक माल व्यापार का 80% समुद्री मार्ग से होता है, जिससे कंटेनर आत्मनिर्भरता की रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

केंद्र सरकार की प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS) भारत में कंटेनर निर्माण को नई गति देने, हर साल आयात होने वाले लगभग 20 लाख खाली कंटेनरों पर निर्भरता घटाने और 53,000 से अधिक रोजगार अवसर सृजित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताई जा रही है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ₹10,000 करोड़ के परिव्यय वाली यह योजना भारत के समुद्री और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

योजना की मुख्य संरचना

सरकारी बयान के अनुसार, CMAS के अंतर्गत 51 कंटेनर जहाजों के बेड़े के विकास और घरेलू स्तर पर कंटेनरों की खरीद के लिए लगभग ₹99,149 करोड़ के निवेश को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। यह निवेश भारत में समुद्री परिवहन और निर्यात-आयात गतिविधियों को व्यापक बल देगा।

रोजगार के मोर्चे पर, योजना से करीब 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इन अवसरों का लाभ कंटेनर निर्माण, सहायक उद्योगों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है।

सहायक उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का कहना है कि CMAS केवल कंटेनर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी — इससे कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पाद बनाने वाले सहायक उद्योगों को भी नई संजीवनी मिलेगी। इस तरह एक व्यापक कंटेनर इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना है जो घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की रिपोर्टों के अनुसार वैश्विक माल व्यापार का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है और भू-राजनीतिक तनावों के कारण माल ढुलाई दरों में अस्थिरता बढ़ी है।

आयात निर्भरता की चुनौती

गौरतलब है कि भारत अभी अपनी जरूरतों को पूरा करने और कंटेनरों की पुनःस्थिति के लिए हर वर्ष करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। UNCTAD ने भी रेखांकित किया है कि हालिया वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के बाद कई देश कंटेनरों जैसे महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक उपकरणों के घरेलू निर्माण को प्राथमिकता दे रहे हैं। CMAS इसी रणनीतिक जरूरत का जवाब है।

व्यापक नीतिगत ढाँचे से जुड़ाव

यह योजना 'मेक इन इंडिया', 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स विकास जैसी केंद्र सरकार की प्रमुख पहलों के अनुरूप है। इससे पहले केंद्र सरकार ₹70,000 करोड़ के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की घोषणा भी कर चुकी है, जिसका उद्देश्य घरेलू जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाना और समुद्री विनिर्माण में निवेश आकर्षित करना है। CMAS उसी दिशा में अगला कदम है।

शिपिंग, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में चल रहे व्यापक सुधारों के साथ मिलकर यह योजना भारत को समुद्री निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने का लक्ष्य रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। भारत दशकों से कंटेनर निर्माण में चीन के वर्चस्व को तोड़ने की कोशिश करता रहा है, और ₹10,000 करोड़ का परिव्यय उस पैमाने के सामने छोटा लग सकता है। ₹99,149 करोड़ के 'संभावित निवेश' और 53,000 रोजगार के आँकड़े अभी अनुमान हैं — सत्यापन-योग्य मील के पत्थर और स्वतंत्र निगरानी तंत्र के बिना ये केवल लक्ष्य बनकर रह सकते हैं। ₹70,000 करोड़ के शिपबिल्डिंग पैकेज के साथ मिलकर यह योजना सही दिशा में है, पर घरेलू तकनीकी क्षमता और कुशल कार्यबल की उपलब्धता जैसी संरचनात्मक बाधाओं को संबोधित किए बिना रोजगार के आँकड़े हकीकत में नहीं बदलेंगे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS) क्या है?
CMAS केंद्र सरकार की प्रस्तावित योजना है जिसका उद्देश्य भारत में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देना और आयातित खाली कंटेनरों पर निर्भरता घटाना है। इसका परिव्यय ₹10,000 करोड़ है और यह 'मेक इन इंडिया' तथा 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के अनुरूप है।
CMAS से कितने रोजगार पैदा होंगे?
सरकारी बयान के अनुसार CMAS से करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार — कुल मिलाकर 53,000 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है। ये अवसर कंटेनर निर्माण, सहायक उद्योगों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में मिलेंगे।
भारत अभी कितने कंटेनर आयात करता है और CMAS इसे कैसे बदलेगी?
भारत वर्तमान में अपनी जरूरतों और कंटेनरों की पुनःस्थिति के लिए हर साल करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। CMAS का मुख्य उद्देश्य घरेलू निर्माण क्षमता विकसित कर इसी आयात निर्भरता को कम करना है।
CMAS के तहत किन सहायक उद्योगों को फायदा होगा?
कंटेनर निर्माण के अलावा कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पाद बनाने वाले सहायक उद्योगों को भी योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे एक व्यापक घरेलू कंटेनर इकोसिस्टम विकसित होगा।
CMAS और शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज में क्या संबंध है?
केंद्र सरकार पहले ही ₹70,000 करोड़ के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की घोषणा कर चुकी है, जो घरेलू जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है। CMAS उसी व्यापक समुद्री विनिर्माण रणनीति का अगला चरण है, जो कंटेनर निर्माण पर विशेष रूप से ध्यान देती है।
राष्ट्र प्रेस
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