गुजरात में अमेजन के जरिए घर बैठे मिलेंगी पाठ्यपुस्तकें, राज्य बोर्ड ने किया MOU
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल टेक्स्टबुक्स ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन के साथ समझौता (MOU) कर राज्य के विद्यार्थियों और अभिभावकों को पाठ्यपुस्तकें सीधे घर पर उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू की है। 'बुक टू स्टूडेंट विथ जस्ट वन क्लिक' नाम की इस पहल के तहत किताबें उनकी मुद्रित कीमत पर ही मिलेंगी और कोई अतिरिक्त डिलीवरी शुल्क नहीं लिया जाएगा। गांधीनगर से लागू यह व्यवस्था गुजरात सरकार की शिक्षा को डिजिटल बनाने की दिशा में एक ताज़ा कदम है।
पहल की मुख्य विशेषताएँ
बोर्ड की ओर से सभी कक्षाओं और सभी माध्यमों में प्रकाशित पाठ्यपुस्तकें अमेजन के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दी गई हैं। किताबें मुद्रित मूल्य पर ही मिलेंगी — यानी कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं — और घर तक डिलीवरी निशुल्क होगी। गुजरात स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल टेक्स्टबुक्स हर साल करीब डेढ़ करोड़ पाठ्यपुस्तकों का वितरण करता है, इसलिए यह सुविधा व्यापक पैमाने पर प्रभाव डाल सकती है।
किन पुस्तकों पर लागू होगी सुविधा
गुजरात के स्कूलों में मुख्यतः दो श्रेणी की पाठ्यपुस्तकें प्रचलित हैं। पहली वे, जो राज्य सरकार विद्यार्थियों को निःशुल्क वितरित करती है। दूसरी वे, जिन्हें विद्यार्थियों को स्वयं खरीदना होता है और जिनका उपयोग विशेष रूप से सेल्फ-फाइनेंस्ड स्कूलों में होता है। अमेजन के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही पुस्तकें दूसरी श्रेणी की हैं, जिन्हें अब तक बुकस्टोर्स से खरीदना पड़ता था।
अभिभावक और बोर्ड अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
अभिभावक किंजल मकवाना ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, 'मेरा बच्चा पहली कक्षा में पढ़ता है। हम दोनों वर्किंग हैं, इसलिए दुकान जाने का समय नहीं मिल पाता था। पाठ्यपुस्तक मंडल गुजरात के माध्यम से अमेजन से किताबें मंगवाईं और सभी पुस्तकें बिना किसी परेशानी के घर पर आ गईं।'
गुजरात स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल टेक्स्टबुक्स के कार्यकारी अध्यक्ष मनुभाई पावरा ने बताया कि बोर्ड ने हाल ही में अमेजन के साथ MOU किया है। उन्होंने कहा, 'विद्यार्थियों और अभिभावकों को पाठ्यपुस्तकें उनकी मुद्रित कीमत पर ही घर बैठे उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए किसी अतिरिक्त लागत का भुगतान नहीं करना होगा।'
आम जनता पर असर
यह सुविधा विशेष रूप से उन कामकाजी अभिभावकों के लिए राहत लेकर आई है, जो व्यस्तताओं के चलते बुकस्टोर्स पर लंबी कतारों में खड़े नहीं हो पाते। गौरतलब है कि हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में पाठ्यपुस्तक विक्रय केंद्रों पर भारी भीड़ जमा होती है, जो अभिभावकों के लिए समय और यातायात दोनों की दृष्टि से कठिनाई बन जाती है। इस पहल से वह असुविधा काफी हद तक दूर हो सकती है।
आगे की दिशा
यह पहल गुजरात सरकार की शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुलभ और डिजिटल बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। जैसे-जैसे ई-कॉमर्स का विस्तार ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में होगा, इस व्यवस्था का लाभ और अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचने की संभावना है।