गुजरात बोर्ड की पाठ्यपुस्तकें अब अमेजन पर उपलब्ध, प्रिंटेड कीमत पर मिलेगी घर तक डिलीवरी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात राज्य स्कूल पाठ्यपुस्तक बोर्ड ने 25 सितंबर 2026 को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत सभी कक्षाओं और माध्यमों की बोर्ड-अनुमोदित पाठ्यपुस्तकें अब ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। गांधीनगर से शुरू हुई इस पहल के अंतर्गत छात्रों और अभिभावकों को किताब की केवल प्रिंटेड कीमत ही चुकानी होगी — कोई अतिरिक्त डिलीवरी शुल्क नहीं।
क्या है यह नई व्यवस्था
इस समझौते के अंतर्गत बोर्ड द्वारा प्रकाशित पाठ्यपुस्तकें अमेजन के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध की जाएंगी। अभिभावक और छात्र अपनी ज़रूरत के अनुसार ऑर्डर दे सकेंगे और किताबें सीधे घर पर पहुँचेंगी। बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष मनुभाई पावरा ने कहा कि इस एमओयू का उद्देश्य बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पाठ्यपुस्तकें छात्रों के दरवाज़े तक पहुँचाना है।
किसे मिलेगा सबसे ज़्यादा फायदा
गुजरात सरकार कुछ पाठ्यपुस्तकें छात्रों को मुफ्त उपलब्ध कराती है, लेकिन सेल्फ फाइनेंस्ड स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अनेक किताबें स्वयं खरीदनी पड़ती हैं। ऐसे छात्रों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी होगी। इसके अलावा, जिन छात्रों को सरकारी वितरण के अतिरिक्त किताबों की अतिरिक्त प्रतियों की जरूरत होती है, वे भी इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
अहमदाबाद की अभिभावक किंजल मकवाना, जिनका बच्चा पहली कक्षा में पढ़ता है, ने इस सेवा को पहले ही आज़मा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि दोनों माता-पिता के कामकाजी होने के कारण किताबें खरीदने के लिए दुकान तक जाना संभव नहीं था, परंतु ऑनलाइन ऑर्डर के बाद सभी किताबें आसानी से घर पहुँच गईं।
बोर्ड की वितरण क्षमता और पहल का दायरा
गुजरात राज्य स्कूल पाठ्यपुस्तक बोर्ड प्रतिवर्ष करीब 1.5 करोड़ पाठ्यपुस्तकों का वितरण करता है। नई ऑनलाइन सुविधा इस मौजूदा वितरण तंत्र की पूरक होगी और उन छात्रों तक पहुँच सुनिश्चित करेगी जो किसी कारण से नियमित वितरण चैनल से वंचित रह जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल इंडिया के तहत शिक्षा क्षेत्र में ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार तेज़ी से हो रहा है।
आम जनता पर असर
पाठ्यपुस्तकें हर सत्र की शुरुआत में एकसाथ खरीदनी पड़ती हैं, जिससे अभिभावकों पर एकमुश्त आर्थिक और समय का दबाव पड़ता था। इस व्यवस्था से कामकाजी परिवारों को राहत मिलेगी और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र भी बिना पुस्तक विक्रेता तक यात्रा किए किताबें प्राप्त कर सकेंगे। गौरतलब है कि गुजरात में लाखों छात्र विभिन्न माध्यमों — गुजराती, हिंदी और अंग्रेज़ी — में पढ़ाई करते हैं, और बोर्ड की किताबें इन सभी माध्यमों में उपलब्ध कराई जाएंगी।
क्या होगा आगे
बोर्ड अध्यक्ष पावरा के अनुसार अमेजन के साथ हाल ही में हुई बातचीत के बाद यह एमओयू संपन्न हुआ है और सेवा अब सक्रिय है। आने वाले शैक्षणिक सत्रों में यह व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होने की संभावना है। राज्य के डिजिटल शिक्षा एजेंडे के लिए यह कदम एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।