UP के परिषदीय विद्यालय पुस्तकालयों में किताब आपूर्ति-भुगतान का जनपदवार सत्यापन, योगी सरकार का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने समग्र शिक्षा और पीएमश्री योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों के पुस्तकालयों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में खरीदी गई पुस्तकों की आपूर्ति एवं भुगतान संबंधी अभिलेखों का जनपदवार सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन से क्रय की गई पुस्तकें निर्धारित विद्यालयों तक वास्तव में पहुँची हैं और भुगतान प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पूरी हुई है। सभी जिलों को इस संदर्भ में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है कि चयनित प्रकाशकों एवं आपूर्तिकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों का जिला स्तर पर उपलब्ध अभिलेखों से मिलान किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को यह सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर प्रमाणित रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी। इसके बाद शासन स्तर पर इन सूचनाओं की समीक्षा कर पुस्तकों की आपूर्ति और भुगतान व्यवस्था का समग्र मूल्यांकन किया जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा, 'विद्यालय पुस्तकालय विद्यार्थियों में अध्ययन संस्कृति विकसित करने और उनके बौद्धिक विकास को गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।' मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सत्यापन महज एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि शिक्षा संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने का ठोस प्रयास है।
आम जनता और विद्यार्थियों पर असर
यह पहल उन लाखों विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। गौरतलब है कि सरकारी योजनाओं के तहत खरीदी गई पुस्तकें यदि विद्यालयों तक नहीं पहुँचतीं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण और वंचित तबके के बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है। जनपदवार सत्यापन से आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी अनियमितता को चिह्नित करना संभव होगा।
क्या होगा आगे
सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रमाणित रिपोर्टें शासन को भेजी जाएंगी, जिनके आधार पर भविष्य में संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और निगरानी के लिए एक मजबूत ढाँचा तैयार किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियमित सत्यापन से दीर्घकालिक रूप से सार्वजनिक शिक्षा व्यय की प्रभावशीलता में सुधार आ सकता है।