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गुजरात में 80,000 स्कूल छोड़ चुके बच्चों की वापसी, CM भूपेंद्र पटेल ने लॉन्च किया 'समरस विद्या सेतु' अभियान

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गुजरात में 80,000 स्कूल छोड़ चुके बच्चों की वापसी, CM भूपेंद्र पटेल ने लॉन्च किया 'समरस विद्या सेतु' अभियान

सारांश

गुजरात सरकार ने 80,000 से अधिक स्कूल-ड्रॉपआउट बच्चों को वापस कक्षाओं में लाने के लिए 'समरस विद्या सेतु' अभियान शुरू किया है। CM भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद से इसका शुभारंभ करते हुए 'जीरो ड्रॉपआउट' का लक्ष्य रखा — शिक्षक, जनप्रतिनिधि और समुदाय मिलकर अभिभावकों तक पहुँचेंगे।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने 22 जुलाई 2026 को 'समरस विद्या सेतु' अभियान लॉन्च किया।
80,000 से अधिक स्कूल-ड्रॉपआउट बच्चों की जिलावार पहचान की जा चुकी है।
बच्चों को कक्षा 1 से 12 तक आयु के अनुसार पुनः दाखिला दिलाया जाएगा; पिछड़े बच्चों के लिए विशेष शैक्षणिक सहायता भी।
गुजरात में स्कूल ड्रॉपआउट दर घटकर 2% रह गई है — CM पटेल का दावा।
शिक्षक, जनप्रतिनिधि और सामुदायिक नेता मिलकर अभिभावकों से सीधे संपर्क करेंगे।

गुजरात सरकार ने 22 जुलाई 2026 को 80,000 से अधिक स्कूल-ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद से 'समरस विद्या सेतु' मेगा अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य 'जीरो ड्रॉपआउट' हासिल करना है — यानी राज्य का एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

अभियान में क्या शामिल है

सरकार की योजना के तहत कक्षा 1 से 12 तक के उन बच्चों को उनकी आयु के अनुसार उचित कक्षा में पुनः दाखिला दिलाया जाएगा, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। जो बच्चे पाठ्यक्रम में पिछड़ चुके हैं, उनके लिए विशेष शैक्षणिक सहायता और अंतरिम शिक्षा व्यवस्था भी तैयार की गई है, ताकि वे सीखने की कमियों को दूर कर सकें।

मुख्यमंत्री पटेल ने बताया कि गुजरात भर में जिलावार सूचियाँ तैयार कर ली गई हैं। शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामुदायिक नेता मिलकर अभिभावकों से संपर्क करेंगे और उन्हें बच्चों को स्कूल वापस भेजने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

ड्रॉपआउट दर और पृष्ठभूमि

पटेल ने दावा किया कि गुजरात में स्कूली शिक्षा छोड़ने की दर घटकर दो प्रतिशत रह गई है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल ड्रॉपआउट एक दीर्घकालिक चुनौती रही है — विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों, प्रवासी मज़दूरों के बच्चों और बालिकाओं के बीच। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब गुजरात खुद को व्यापार और रोज़गार के एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, जिसके लिए कुशल और शिक्षित युवाओं की आवश्यकता अनिवार्य है।

शिक्षकों और समाज की भूमिका

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की सक्रिय भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे उपस्थिति पर कड़ी निगरानी रखेंगे और ज़रूरत पड़ने पर व्यक्तिगत रूप से फॉलो-अप करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'जीरो ड्रॉपआउट' का लक्ष्य सरकार, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही संभव है — यह किसी एक पक्ष की जिम्मेदारी नहीं।

आगे की राह

अभियान के तहत चिह्नित बच्चों को चरणबद्ध तरीके से स्कूलों में वापस लाया जाएगा। सरकार का फोकस केवल नामांकन तक सीमित नहीं है — शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित करना भी इस पहल का अभिन्न हिस्सा है। राज्य सरकार की यह कोशिश शिक्षा के अधिकार कानून की भावना के अनुरूप है और आने वाले महीनों में इसके नतीजे ही बताएंगे कि यह अभियान कितना प्रभावी साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 बच्चों की पहचान और जिलावार सूचियाँ तैयार करना प्रशासनिक तत्परता का संकेत है, लेकिन असली परीक्षा नामांकन के बाद की है — क्या ये बच्चे स्कूल में टिके रहेंगे? ड्रॉपआउट की जड़ें अक्सर आर्थिक मजबूरी, बाल श्रम और प्रवासन में होती हैं, जिन्हें महज सामुदायिक संपर्क से नहीं सुलझाया जा सकता। राज्य की 2% ड्रॉपआउट दर का दावा उत्साहजनक है, पर स्वतंत्र सत्यापन के बिना यह आँकड़ा पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। 'जीरो ड्रॉपआउट' का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब सरकार शैक्षणिक निरंतरता और सीखने के परिणामों को भी उतनी ही गंभीरता से मापे जितनी नामांकन संख्या को।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'समरस विद्या सेतु' अभियान क्या है?
यह गुजरात सरकार का राज्यव्यापी शिक्षा अभियान है, जिसे 22 जुलाई 2026 को CM भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद से लॉन्च किया। इसका उद्देश्य 80,000 से अधिक स्कूल-ड्रॉपआउट बच्चों को कक्षा 1 से 12 तक पुनः दाखिला दिलाना और 'जीरो ड्रॉपआउट' लक्ष्य हासिल करना है।
गुजरात में कितने बच्चों ने स्कूल छोड़ा है?
राज्य सरकार ने अब तक 80,000 से अधिक ऐसे बच्चों की पहचान की है जिन्होंने स्कूली शिक्षा बीच में छोड़ दी थी। इनकी जिलावार सूचियाँ तैयार की जा चुकी हैं।
ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूल में कैसे लाया जाएगा?
शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामुदायिक नेता मिलकर अभिभावकों से सीधे संपर्क करेंगे। प्रत्येक बच्चे को उसकी आयु के अनुसार उचित कक्षा में दाखिला दिया जाएगा, और पढ़ाई में पिछड़े बच्चों के लिए विशेष शैक्षणिक सहायता व अंतरिम शिक्षा की व्यवस्था की गई है।
गुजरात में स्कूल ड्रॉपआउट दर कितनी है?
CM भूपेंद्र पटेल के अनुसार गुजरात में स्कूली शिक्षा छोड़ने की दर घटकर 2% रह गई है। यह दावा राज्य सरकार की ओर से किया गया है।
इस अभियान से किन बच्चों को फायदा होगा?
कक्षा 1 से 12 तक के वे सभी बच्चे जिन्होंने किसी भी कारण से स्कूल छोड़ दिया था, इस अभियान के दायरे में आते हैं। विशेष रूप से वे बच्चे जो आर्थिक या पारिवारिक कारणों से शिक्षा से वंचित हो गए थे, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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